जाप प्रमुख को बड़ी राहत: 32 साल पुराने अपहरण केस में पप्पू यादव बरी, साक्ष्यों के अभाव में मधेपुरा विशेष कोर्ट ने सुनाया फैसला

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना  Published by: प्रशांत कुमार झा Updated Mon, 04 Oct 2021 03:25 PM IST

सार

11 मई को पटना से गिरफ्तार किए गए जाप प्रमुख एवं पूर्व सांसद पप्पू यादव पांच महीने बाद जेल से बाहर आएंगे। मधेपुरा विशेष अदालत के एडीजे तीन निशिकांत ठाकुर ने सबूतों के अभाव में उन्हें बरी करने का फैसला सुनाया है।
पप्पू यादव, जाप प्रमुख
पप्पू यादव, जाप प्रमुख - फोटो : Social media
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विस्तार

मधेपुरा व्यवहार न्यायालय की विशेष अदालत ने 32 साल पुराने अपहरण के मामले में जन अधिकार पार्टी (जाप) के प्रमुख और पूर्व सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया। सोमवार को अंतिम फैसला सुनाते हुए अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह विशेष अदालत निशिकांत ठाकुर ने पप्पू यादव को सबूतों के अभाव में रिहा कर दिया। 
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पप्पू यादव को तीन दशक पुराने अपहरण के एक मामले में 11 मई को पटना से गिरफ्तार किया गया था। पटना के गांधी मैदान थाना से उन्हे रातोरात मधेपुरा पुलिस पटना से पप्पू यादव को लेकर सिविल कोर्ट पहुंची थी। जहां कोर्ट ने पप्पू यादव को जेल भेज दिया था। बता दें कि पटना से गिरफ्तारी के बाद पप्पू यादव के समर्थकों के भारी विरोध के बीच उन्हें मधेपुरा ले जाया गया था। कोर्ट का फैसला आने के बाद पप्पू यादव ने ट्वीट किया। उन्होंने ट्विटर पर लिखा इंसाफ हुआ, षड्यंत्र बेनकाब हुआ। जनता के आशीर्वाद से आज बाइज्जत बरी हो गया।




पप्पू यादव के लिए रात में खुला था कोर्ट
पप्पू यादव की पेशी के लिए रात 11 बजे मधेपुरा सिविल कोर्ट को खोला गया था। पप्पू यादव को जब गिरफ्तार किया गया था तो बिहार समेत पूरे देश में कोरोना की दूसरी लहर पीक पर चल रही थी। इस दौरान पप्पू यादव लोगों की मदद भी कर रहे थे। साथ ही कोरोना प्रबंधन की अच्छी व्यवस्था नहीं होने से सरकार की आलोचना भी कर रहे थे। 

दरभंगा मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल में थे भर्ती
मई में गिरफ्तारी के बाद ही उन्होंने तबीयत खराब होने का हवाला दिया था। इसके बाद कोर्ट के आदेश पर उन्हें दरभंगा के DMCH में इलाज के लिए भर्ती कराया गया था। पप्पू तब से ही DMCH में भर्ती थे। वहीं से वो कोर्ट की तारीखों पर सुनवाई के लिए आते-जाते थे। आज सुबह वह अपने पैरों पर खड़े होकर एंबुलेंस में बैठकर मधेपुरा कोर्ट पहुंचे। इससे पहले वो ह्वील चेयर पर बैठे नजर आते थे। 

हाईकोर्ट ने छह महीने में मामला खत्म करने का दिया था आदेश
पटना हाईकोर्ट ने इस मामले को छह महीने में सुनवाई कर खत्म करने का आदेश जारी किया था।  सभी पक्षों की गवाही हो चुकी है। इस मामले में दो गवाहों की मौत भी हो चुकी है। दोनों पक्षों ने कोर्ट में सुलहनामा भी दाखिल कर दिया था। हाईकोर्ट के आदेश पर चार महीने में ही मामले की सुनवाई कर फैसला सुना दिया गया।  पप्पू यादव पर 1989 के दौरान शैलेंद्र यादव ने मुरलीगंज थाना में राम कुमार यादव और उमाशंकर यादव के अपहरण किए जाने का मामला दर्ज करवाया था। 32 साल पुराने अपहरण मामले में पप्पू यादव मई से जेल में बंद थे। मधेपुरा विशेष कोर्ट ने सबूतों के अभाव में उन्हें रिहा कर दिया। 

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