लोकप्रिय और ट्रेंडिंग टॉपिक्स

Hindi News ›   Business ›   Business Diary ›   Swiggy Delivery Executive With Disability story in Bengaluru Moves Internet news in hindi

Swiggy: 'दरवाजा खोला और...', डिलीवरी एजेंट को देखते ही क्यों माफी मांगने लगा शख्स, भावुक कर देगी कहानी

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेंगलुरु Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Thu, 11 Aug 2022 09:17 PM IST
सार

बेंगलुरु के जिस व्यक्ति ने यह कहानी साझा की है, उसका नाम रोहित कुमार सिंह बताया गया है। उन्होंने लिंक्डइन पर पूरी पोस्ट डाली है, जिसमें डिलीवरी एग्जीक्यूटिव कृष्णप्पा राठौड़ के मुश्किलों का सामना करते हुए डिलीवरी पूरी करने की घटना का जिक्र है। 

स्विगी डिलीवरी एजेंट कृष्णप्पा राठौड़।
स्विगी डिलीवरी एजेंट कृष्णप्पा राठौड़। - फोटो : Social Media
विज्ञापन
ख़बर सुनें

विस्तार

फूड डिलीवरी कंपनी के कर्मचारियों का काम काफी मुश्किल होता है। खासकर डिलीवरी एजेंट्स के लिए तो समय पर उपभोक्ता तक पहुंचने के मायने सबसे ज्यादा होते हैं। फिर चाहे मौसम खराब हो या सड़कों पर जबरदस्त ट्रैफिक हो। अनुशासन से खाना पहुंचाना और फाइव स्टार रेटिंग हासिल करना इन डिलीवरी एजेंट्स की सबसे अहम जरूरत है। इस बीच कर्नाटक के बेंगलुरु में स्विगी से खाना मंगाने वाले एक उपभोक्ता ने अपने साथ हुए एक वाकये को सोशल मीडिया पर साझा किया है। अपने काम के प्रति एक डिलीवरी एजेंट के समर्पण को बताती यह कहानी पूरे देश में काफी वायरल हुई है। 


बेंगलुरु के जिस व्यक्ति ने यह कहानी साझा की है, उसका नाम रोहित कुमार सिंह बताया गया है। उन्होंने लिंक्डइन पर पूरी पोस्ट डाली है, जिसमें डिलीवरी एग्जीक्यूटिव कृष्णप्पा राठौड़ के मुश्किलों का सामना करते हुए डिलीवरी पूरी करने की घटना का जिक्र है। 

स्विगी
स्विगी - फोटो : अमर उजाला
रोहित कुमार के पोस्ट में क्या?
रोहित कुमार ने अपने पोस्ट में लिखा- स्विगी पर उन्होंने जो ऑर्डर किया था, वह लगातार लेट होता जा रहा था। इसके बाद उन्होंने डिलीवरी एजेंट को फोन किया, ताकि उसके आने का सही समय पता चल सके। रोहित के मुताबिक, डिलीवरी एजेंट ने उन्हें जल्द से जल्द ऑर्डर डिलीवर करने की बात कही। हालांकि, जब कुछ और मिनट गुजर जाने के बाद डिलीवरी नहीं मिली तो रोहित ने फिर उसे फोन लगाया। इस बार कृष्णप्पा ने घर तक पहुंचने के लिए पांच और मिनट का समय मांगा। 

रोहित ने पोस्ट में लिखा, "आखिरकार 5-10 मिनट बाद उनके घर की घंटी बजी और वे तुरंत ही दरवाजे पर पहुंचे। रोहित ने कहा कि वे डिलीवरी एजेंट से ऑर्डर पहुंचाने में इतनी देरी के लिए निराशा जाहिर करने वाले थे। हालांकि, कृष्णप्पा को देखते ही उन्हें अपनी गलती का अहसास हुआ। 

बेंगलुरु के इस व्यक्ति ने बताया- "दरवाजा खोलने के बाद मैंने देखा कि एक 40 साल के करीब का एक व्यक्ति खुद को बैसाखी के सहारे संभालने की कोशिश कर रहा था।" रोहित ने कहा कि डिलीवरी एजेंट को देखने के बाद उन्हें यह लगा कि उसे घर तक ऑर्डर लाने में कितनी दिक्कत हुई होगी। इसलिए मैंने तुरंत ही कृष्णप्पा से माफी मांगी और बातचीत की कोशिश की। 

रोहित ने बताया कि बातचीत के दौरान उन्हें पता चला कि कृष्णप्पा ने कोरोनावायरस महामारी के दौरान कैफे में मिली नौकरी गंवा दी थी। इसके बाद से ही वह शांत तरह से डिलीवरी का काम कर रहे हैं। कृष्णप्पा के तीन बच्चे हैं, जिन्हें खराब वित्तीय स्थितियों की वजह से वे शिक्षा के लिए बेंगलुरु नहीं ला पाए हैं।
विज्ञापन

आपकी राय हमारे लिए महत्वपूर्ण है। खबरों को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से आप संतुष्ट हैं?
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें कारोबार समाचार और Budget 2022 से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। कारोबार जगत की अन्य खबरें जैसे पर्सनल फाइनेंस, लाइव प्रॉपर्टी न्यूज़, लेटेस्ट बैंकिंग बीमा इन हिंदी, ऑनलाइन मार्केट न्यूज़, लेटेस्ट कॉरपोरेट समाचार और बाज़ार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
एप में पढ़ें

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
डेली पॉडकास्ट सुनने के लिए सब्सक्राइब करें

क्लिप सुनें

00:00
00:00