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Chandigarh: सात माह से GMSH-16 में एमआरआई मशीन इंस्टालेशन का इंतजार, मरीजों की जेब पर पड़ रहा बोझ

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Tue, 27 Sep 2022 02:18 AM IST
सार

अस्पताल में पहले वाली कंपनी एमआरआई के लिए 2900 रुपये शुल्क लेती थी। नए टेंडर में मरीजों को राहत देने के लिए रियायत का प्रावधान किया गया है। इसके अंतर्गत 2900 रुपये में की जाने वाली एमआरआई 1885 रुपये में की जानी है।

GMSH 16 Chandigarh
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विस्तार

मरीजों को सस्ती दर पर एमआरआई की सुविधा मुहैया कराने के लिए जीएमएसएच-16 में पिछले सात महीने से कवायद चल रही है। एमआरआई के लिए जिस कंपनी को टेंडर दिया गया है, वह पिछले मार्च महीने से यूनिट का रेनोवेशन करवा रही है लेकिन अब तक काम पूरा नहीं हो पाया है। नतीजतन मरीजों को महंगी दर पर निजी सेंटरों में एमआरआई करवाना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि इमरजेंसी में की जाने वाली जांच के लिए अगर इतनी धीमी रफ्तार में काम होगा तो जरूरतमंद मरीज को सरकारी इलाज की सुविधा कैसे मिलेगी।



गौरतलब है कि अस्पताल में पहले वाली कंपनी एमआरआई के लिए 2900 रुपये शुल्क लेती थी। नए टेंडर में मरीजों को राहत देने के लिए रियायत का प्रावधान किया गया है। इसके अंतर्गत 2900 रुपये में की जाने वाली एमआरआई 1885 रुपये में की जानी है। नई कंपनी मरीजों को पहले वाले टेंडर से 35 प्रतिशत कम शुल्क पर जांच की सुविधा मुहैया कराएगी लेकिन चिंता की बात यह है कि नई कंपनी की धीमी रफ्तार मरीजों को राहत देने की राह में रोड़ा अटका रही है। उधर, पीजीआई में मरीजों के दबाव के कारण अगले साल की तारीख मिल रही है। यही हाल जीएमसीएच 32 में भी है। वहां एमआरआई के लिए चार से पांच महीने की तारीख मिल रही है।

सरकारी अस्पतालों में एमआरआई कराना है तो अभी समय लगेगा

  • जीएमएसएच-16 में पिछले सात महीने से बंद है एमआरआई
  • पीजीआई में मौजूदा समय में पांच एमआरआई मशीनों का हो रहा संचालन
  • पीजीआई में एमआरआई के लिए 2500 रुपये शुल्क है तय
  • यहां एक ओपीडी, एक कॉर्डियक सेंटर, एक ट्रॉमा सेंटर और दो रेडियोडायग्नोसिस विभाग में हैं इंस्टॉल
  • प्रतिदिन 80 से 90 मरीजों की की जा रही है एमआरआई
  • जीएमसीएच-32 में एमआरआई की एक मशीन है और यहां जांच के लिए तय है 1800 रुपये शुल्क
  • यहां मरीजों को चार से पांच महीने बाद की दी जा रही है डेट

मरीजों को राहत देने के लिए बनी थी कमेटी  

जरूरतमंद मरीजों को जांच में राहत देने के लिए जीएमसीएच-32 के पूर्व डायरेक्टर प्रिंसिपल के कार्यकाल में एक कमेटी का गठन किया गया था। इसमें शहर के निजी डायग्नोसिस सेंटरों से रेट लिस्ट लेकर उसे सरकारी अस्पतालों में आने वाले मरीजों की पहुंच के हिसाब से संशोधित कर लागू कराना था। इसके लिए लगभग सात सेंटरों ने अस्पताल की रेट लिस्ट के अनुसार वहां आने वाले मरीजों को रियायत देने की हामी भी भरी थी। मरीजों की सहूलियत के लिए उस सुविधा को लागू करने की तैयारी पूरी कर ली गई थी लेकिन इसी बीच डायरेक्टर प्रिंसिपल का निधन हो गया और पूरी योजना ठंडे बस्ते में चली गई।

जनता बोली-ये तो हद ही हो गई
सरकारी सुविधा में विलंब होता है, लेकिन इतना ज्यादा विलंब करना भी ठीक नहीं है। आखिर जनता के पैसे से ही जनता को सुविधा उपलब्ध कराना है, फिर उसमें अनदेखी क्यों की जा रही है।  -संतोष यादव, सेक्टर 45


सरकारी अस्पतालों में स्थिति चिंतनीय है। सुविधा के नाम पर मरीजों को मानसिक तनाव दिया जा रहा है। ओपीडी में लंबी कतार होती है और जांच के नाम पर निजी सेंटरों में जाना पड़ता है। यह व्यवस्था बदलनी चाहिए।  -अलका सिंह, मलोया
 

जीएमएसएच 16 में एमआरआई के लिए टेंडर हो चुका है। नई मशीन को इंस्टॉल करने में समय लग रहा है। विलंब के कारणों की जांच करवाकर जल्द से जल्द सुविधा शुरू कराई जाएगी। -यशपाल गर्ग, स्वास्थ्य सचिव

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