विश्व रेबीज दिवस: चंडीगढ़ में दो साल में हर माह बढे़ 600 केस, रोजाना 90 लोग बन रहे कुत्तों का शिकार

नवदीप मिश्रा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: Trainee Trainee Updated Tue, 28 Sep 2021 10:44 AM IST

सार

विश्व रेबीज दिवस पर जानकारी सामने आई है कि चंडीगढ़ में दो साल में हर माह 600 नए केस कुत्तों के काटने के बढ़े हैं। हर रोज 90 लोगों को काटने के मामले सामने आ रहे हैं। दो साल पहले तक केवल 70 ही मामले रोजाना सामने आते थे। प्रशासक की डॉग पार्क की याेजना पर भी काम नहीं चल रहा  है। नगर निगम की ओर से उपाय नहीं किए जा रहे हैं।
 
सांकेतिक तस्वीर।
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

चंडीगढ़ शहर में रेबीज के मामले साल दर साल बढ़ते जा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार 2019 में जहां प्रतिदिन रेबीज के 70 मरीज अस्पताल आते थे, वहीं, वर्तमान में यह संख्या 90 तक पहुंच गई है। इनमें नए और पुराने दोनों केस शामिल हैं। रोजाना आने वाले मरीजों के हिसाब से वर्ष 2019 में हर माह 2100 केस आते थे, जो बढ़कर अब 2700 हो गए हैं। ऐसे में दो साल में ही रेबीज के हर माह आने वाले केसों में 600 का इजाफा हुआ है।
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स्वास्थ्य विभाग की ओर से सेक्टर-19 में एंटी रेबीज क्लीनिक बनाया गया है। क्लीनिक की प्रभारी डॉ. परमज्योति ने बताया कि शहर में कुत्तों के काटने की घटनाओं के साथ ही अन्य जानवरों के काटने की घटनाएं भी बढ़ी हैं। दो साल पहले प्रतिदिन 20 केस नए तो 40 से 45 फॉलोअप के केस आते थे। वहीं, अब प्रतिदिन 40 केस नए, जबकि 45 से 50 केस फॉलोअप के आ रहे हैं। रेबीज का समय रहते इलाज मिल जाए तो कोई खतरे की बात नहीं है, लेकिन लापरवाही बरतने पर यह जानलेवा साबित हो सकता है।

 

एक साल में एक करोड़ खर्च, समस्या जस की तस
नगर निगम ने एक साल में चार हजार कुत्तों की नसबंदी पर 40 लाख रुपये खर्च किए। इसके अलावा उन्हें पकड़ने और वापस वहीं छोड़ने पर 60 लाख रुपये खर्च किए गए, लेकिन फायदा कुछ नहीं हुआ। कुत्तों की नसबंदी करने वाले डॉ. अमनदीप अनुबंध के अनुसार एक केस का लगभग एक हजार रुपये शुल्क लेते हैं।

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कुत्तों की संख्या तेजी से बढ़ी, पंजीकरण की गति धीमी
अधिकारियों के अनुसार एक अप्रैल 2015 से लेकर अगस्त 2021 तक 17,445 लावारिस कुत्तों को नगर निगम की ओर से एंटी रेबीज के इंजेक्शन लगाए गए हैं। इस बीच लगभग छह माह तक कोरोना के कारण कोई इंजेक्शन नहीं लगा। वर्ष 2012 में हुए सर्वे के अनुसार शहर में कुल 7900 लावारिस कुत्ते थे, जो अब बढ़कर 15 हजार से ज्यादा हो चुके हैं। वहीं, 7100 पालतू कुत्तों का पंजीकरण कराया गया था। वर्तमान में पंजीकृत पालतू कुत्तों की संख्या केवल 9 हजार तक ही पहुंची है, जबकि शहर में बड़ी संख्या में पालतू कुत्ते हैं।
 
कागजों में ही रह गई डॉग पार्क बनाने की योजना
पिछले साल प्रशासक वीपी सिंह बदनौर के कहने पर नगर निगम ने लावारिस कुत्तों की समस्या से निपटने को एक राष्ट्रीय स्तर का सेमिनार आयोजित किया था। इस दौरान विशेषज्ञों ने कई सुझाव दिए थे, लेकिन अमल किसी पर नहीं हुआ। वहीं, रायपुरकलां में बनने वाला एडवांस एनीमल बर्थ कंट्रोल सेंटर भी पिछले दो साल में पूरा नहीं हो सका है। प्रशासन ने गार्डन में कुत्तों के घुमाने और कुत्ते पालने वालों के खिलाफ कानून तो सख्त बना दिए, लेकिन उसका असर नहीं दिखता। कुत्तों को घुमाने के लिए सेक्टर-43 में डॉग पार्क बनाने की योजना भी सिर्फ कागजों में ही है।
 
रायपुरकलां के सेंटर के बारे में एक बार अधिकारियों से चर्चा की जाएगी। लावारिस कुत्तों की समस्या को समाप्त करना हमारी प्राथमिकता सूची में है। इसके लिए योजना बना रहे हैं। -आनिंदिता मित्रा, आयुक्त, नगर निगम चंडीगढ़

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