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जवान का कारनामा: 16 लाख रुपये में की नकली सैनिक की भर्ती, खुद देता था वेतन, सैन्य क्षेत्र में करवाई ड्यूटी

संवाद न्यूज एजेंसी, पठानकोट (पंजाब) Published by: ajay kumar Updated Sun, 27 Nov 2022 02:33 AM IST
सार

सैन्य सूत्रों के मुताबिक वर्ष 2019 में पीड़ित मनोज की आरोपी के साथी बिट्टू से मुलाकात अयोध्या में सैन्य भर्ती के दौरान हुई थी। 2020 में राहुल ने मनोज को नौकरी लगाने की बात कही और वर्दी पहनकर वीडियो कॉल की। मनोज और उसके भाई भीमसेन से उसने आठ-आठ लाख रुपये ठगे थे।

प्रतीकात्मक तस्वीर
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विस्तार

टेरिटोरियल आर्मी के एक जवान ने साथियों के साथ मिलकर दो लोगों से फौज में भर्ती करवाने के नाम पर 16 लाख रुपये ठगे। आरोपी राहुल पठानकोट में तैनात रहा और वहीं फर्जी नियुक्ति पत्र और वर्दी दिलवाकर दो भाइयों को इंसास राइफल सहित ड्यूटी भी करवाई। वह अपनी जेब से दोनों को हर महीने 12-12 हजार रुपये वेतन भी देता रहा। इसका खुलासा ठगी का शिकार युवकों ने किया है। 



उत्तर प्रदेश के मेरठ स्थित घर पहुंचकर पीड़ित मनोज ने स्थानीय थाने में मामला दर्ज करवाया है। मेरठ पुलिस ने आरोपी जवान समेत दो लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोपी सैनिक मुजफ्फरनगर के खतौली थाना क्षेत्र के कंकराला गांव निवासी राहुल और उसके साथी बिट्टू से पुलिस और सेना की खुफिया एजेंसियां पूछताछ कर रही हैं।

 
आरोपियों से एक पिस्टल 32 बोर, 2 मैगजीन 32 बोर, दो बैज कैप्टन रैंक, 2 रबड़ स्टैंप, 2 रबड़ स्टांप हैंडल, तीन नेम प्लेट, दो आर्मी शोल्डर (टीए) बैज, एक डोरी (एएमसी-आर्मी मेडिकल कोर), डोरी (आर्मी सप्लाई कोर), एक बेल्ट ग्रीन, एक आर्मी आफिसर कैप, एक मोबाइल, आफिसर की पूरी यूनिफार्म, तीन मेडल (ओपी रक्षक, जेएंडके, नो साला) बरामद किया। पठानकोट मिलिट्री इंटेलिजेंस मामले की जांच कर रही है। इसकी रिपोर्ट रक्षा मंत्रालय को भेजी गई है। 

2020 में पठानकोट में तैनात था आरोपी
सैन्य सूत्रों के मुताबिक वर्ष 2019 में पीड़ित मनोज की आरोपी के साथी बिट्टू से मुलाकात अयोध्या में सैन्य भर्ती के दौरान हुई थी। 2020 में राहुल ने मनोज को नौकरी लगाने की बात कही और वर्दी पहनकर वीडियो कॉल की। मनोज और उसके भाई भीमसेन से उसने आठ-आठ लाख रुपये ठगे थे।

आरोपियों ने दोनों को सेना की वर्दी, असलहा और फर्जी आईकार्ड उपलब्ध कराया। फर्जी नियुक्ति कर पठानकोट में 2020 में ट्रेनिंग दी। उस समय आरोपी राहुल की पोस्टिंग पठानकोट में थी। हर महीने उनके खाते में 12 हजार रुपये खुद से वेतन डालता रहा। आर्मी के एक जवान ने उसके पहचान पत्र को फर्जी बताया। इसके बाद आर्मी इंटेलिजेंस से शिकायत की गई। पुलिस और आर्मी इंटेलिजेंस ने जांच के बाद पीड़ित मनोज की शिकायत पर थाने में मुकदमा दर्ज करवाया। 

छह महीने की छुट्टी में युवाओं को ठगने का करता था काम
सैन्य सूत्र बताते हैं कि टेरिटोरियल आर्मी में छह माह नौकरी और छह महीने बिना वेतन घर में रहने का प्रावधान है। इसके चलते राहुल छह महीने सेना के अफसरों की वर्दी पहन साथी बिट्टू के साथ बेरोजगार युवकों को ढूंढता था। जो लोग सेना में भर्ती होने के इच्छुक होते थे, उनके नौकरी लगाने के नाम पर ठगी कर लेता था। इस दौरान आरोपी कभी आर्मी के कैप्टन तो कभी मेजर की वर्दी पहनकर रौब जमाता था। आरोपी राहुल का नेटवर्क कहां तक फैला है, इसकी जांच में पुलिस और सेना की खूफिया एजेंसियां जुटी हैं। अभी तक पूछताछ में सामने आया है कि राहुल की पोस्टिंग अनंतनाग (जम्मू-कश्मीर) में चल रही है।  
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