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Punjab News: पंजाब के बस स्टैंड की बदलेगी सूरत, निजी कंपनियों को सौंपने की तैयारी

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Fri, 09 Dec 2022 12:11 AM IST
सार

पंजाब रोडवेज के 18 डिपो हैं। पंजाब रोडवेज की बसें करीब 2.77 लाख किलोमीटर रोजाना सफर करती हैं। पांच लाख सवारियां प्रतिदिन इनमें सफर करती हैं। वहीं, पंजाब रोडवेज द्वारा अपने बेड़े में हर साल नई बसें शामिल की जाती हैं ताकि लोगों का सफर आसान बने। बसों में महिलाओं का सफर पूरी तरह से मुफ्त है। 

फाइल फोटो।
फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

बड़े महानगरों की तर्ज पर अब पंजाब के विभिन्न जिलों में स्थित बस स्टैंडों की सूरत बदल जाएगी। एक तरफ जहां बस स्टैंड साफ सुथरे दिखेंगे, वहीं वहां बिजली पानी से लेकर अन्य इंतजाम भी पूरे होंगे। लोगों को किसी भी तरह की परेशानी नहीं उठानी पड़ेगी। राज्य सरकार ने इस दिशा में कदम बढ़ा दिया है। 17 बस स्टैंडों के संचालन व देखरेख की जिम्मेदारी निजी कंपनियों को सौंपने की तैयारी की गई है। सब कुछ सही रहा इसी महीने यह सपना हकीकत में बदल जाएगा।



राज्य के विभिन्न जिलों में बने बस स्टैंड की हालत काफी खस्ता है। इस वजह से लोगों को काफी दिक्कत उठानी पड़ रही थी। इसके बाद अब राज्य सरकार ने पूरी रणनीति के साथ इन्हें संवारने की योजना तैयार की है। प्रोजेक्ट में पंजाब स्टेट बस स्टैंड मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड (पनबस) नोडल एजेंसी के रूप में काम करेगी। इस दौरान अमृतसर, लुधियाना, तरनतारन, मुक्तसर साहिब, जगरांव, रूपनगर, आनंदपुर साहिब, नंगल, होशियापुर, मुकेरिया, एसबीएस नगर, मजीठा, डेरा बाबा नानक, मोगा, जीरा, पठानकोट और फाजिल्का बस स्टैंड कायाकल्प किया जाएगा। प्रोजेक्ट कामयाब रहा तो इन्हें जिलों में लागू किया जाएगा।

 
रोजाना पांच लाख लोग करते हैं सफर
पंजाब रोडवेज के 18 डिपो हैं। पंजाब रोडवेज की बसें करीब 2.77 लाख किलोमीटर रोजाना सफर करती हैं। पांच लाख सवारियां प्रतिदिन इनमें सफर करती हैं। वहीं, पंजाब रोडवेज द्वारा अपने बेड़े में हर साल नई बसें शामिल की जाती हैं ताकि लोगों का सफर आसान बने। बसों में महिलाओं का सफर पूरी तरह से मुफ्त है। 

चंडीगढ़ से सटे इलाकों में नहीं बने बस स्टैंड
भले ही पंजाब के विभिन्न शहरों में बस स्टैंड की सुविधा है लेकिन नए बने जिलों में अभी तक बस स्टैंड की उचित सुविधा नहीं है। इस वजह से लोगों को सड़कों पर खड़े होकर बसों का इंतजार करना पड़ता है। खरड़ में करीब तीन बार बस स्टैंड का नींव पत्थर रखा गया है लेकिन अभी तक सुविधा नहीं मिल पाई है। राजपुरा में भी उचित इंतजाम नहीं है।

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