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Chandigarh News: सस्सी पुन्नू- ए म्यूजिकल में छात्रों ने रंगमंच पर बिखेरी प्रतिभा

Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Sat, 26 Nov 2022 08:30 AM IST
टैगोर थिएटर में नाटक सस्सी पुन्नू का मंचन करते स्कूली बच्चे।
टैगोर थिएटर में नाटक सस्सी पुन्नू का मंचन करते स्कूली बच्चे। - फोटो : CHANDIGARH
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चंडीगढ़। टैगोर थियेटर के मंच पर शुक्रवार की दोपहर छात्रों ने अविभाजित पंजाब की प्रतिष्ठित प्रेम कहानी ‘सस्सी पुन्नू-ए म्यूजिकल’ का मंचन किया। यह मंचन न केवल छात्रों को समृद्ध लोक संस्कृति से परिचित कराने के विचार से प्रेरित था, बल्कि उन्हें उसी तरह जीने, अनुभव करने और उसे महत्व देने के लिए भी था ताकि वे इसे हमेशा याद रखें और अपने दिलों में संजोकर रख सकें। 70 मिनट के इस नाटक में मोहाली के विवेक हाई स्कूल के नौवीं कक्षा के 81 छात्रों ने प्रस्तुति दी। हिया मदान ने सस्सी और आद्या पराशर ने पुन्नू की भूमिका निभाई। नाटक का मंचन अंग्रेजी में किया गया। खास बात यह रही कि नाटक का दो बार मंचन किया गया। सुबह के समय स्कूल के छात्रों के लिए और दूसरी बार शाम को माता-पिता व अभिभावकों के लिए।

नाटक की निर्देशक व द नैरेटर्स की संस्थापक निशा लूथरा ने बताया कि यह नाटक प्रसिद्ध अभिनेता और चंडीगढ़ संगीत नाटक अकादमी के उपाध्यक्ष बलकार सिद्धू द्वारा पंजाबी भाषा में लिखी गई एक किताब का नाट्य रूपांतर था। पहली बार सिद्धू के साथ नाटक को पढ़ने के बाद, टीम पूरी तरह से इसकी शुद्धता, सांसारिकता, संगीतमयता और नाटक की समग्र डिजाइनिंग से प्रभावित हुई। द नैरेटर्स की टीम ने नाटक को अंग्रेजी में अनुकूलित किया, जिसे छात्रों द्वारा प्रस्तुत किया गया। छात्रों ने अपने विस्मयकारी अभिनय कौशल से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसका मुख्य आकर्षण थी इसकी कोरियोग्राफी जो गिद्दा, भंगड़ा और बलूची-सिंध नृत्य जैसे विभिन्न नृत्य रूपों का एक मिश्रण थी। यहां तक कि ‘खेड्डा’ पंजाबी खेल और मार्शल डांस फॉर्म गतका भी इसका एक अभिन्न हिस्सा था। संगीत रचना केशव सिंह सुनवार और विशाल शर्मा की थी। कार्यक्रम में स्कूल की प्रिंसिपल हरबीना रंधावा ने बच्चों का उत्साहवर्धन किया।

इनसेट-
इसलिए खास थी यह प्रस्तुति
आज का प्रदर्शन विशेष था, क्योंकि यह प्रसिद्ध पंजाबी लोक गायिका सुरिंदर कौर की 93 वीं जयंती पर पेश किया गया, जिन्होंने पहली बार 1960 में %सस्सी पुन्नू% गीत रिकॉर्ड किया था। सुरिंदर कौर ने आने वाली पीढ़ियों के लिए लोकगीतों के प्यार को अमर कर दिया। बाद में उनकी बेटी - प्रसिद्ध पंजाबी लोक गायिका डॉली गुलेरिया, और उनकी बेटी सुनैनी शर्मा (सुरिंदर कौर की पोती) ने 1985 में इसे फिर से रिकॉर्ड किया। डॉली गुलेरिया और सुनैनी शर्मा, दोनों ने ही मंच पर दर्शकों के लिए यह गीत गाया।
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