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18 अप्रैल 2021

Digital Edition

पंजाब कांग्रेस का घमासान: सिद्धू 72 दिन के प्रदेश अध्यक्ष, लिखा- पंजाब के भविष्य से समझौता नहीं करूंगा

पंजाब कांग्रेस में चल रहे घमासान के बीच मंगलवार को पार्टी प्रधान नवजोत सिद्धू ने 72 दिन बाद अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। कुछ दिन पहले ही पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने अपने पद से इस्तीफा दिया था। इसके बाद चरणजीत चन्नी को मुख्यमंत्री बनाया गया था। उसके बाद से सिद्धू पर सुपर सीएम होने के आरोप लग रहे थे। 

पंजाब के भविष्य से समझौता नहीं कर सकता
मंगलवार को पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी के नाम संबोधित त्यागपत्र में सिद्धू ने लिखा कि समझौता करने से व्यक्ति का चरित्र खत्म हो जाता है। मैं पंजाब के भविष्य और पंजाब की जनता के कल्याण के एजेंडा से कभी समझौता नहीं कर सकता हूं। उन्होंने आगे लिखा, इसलिए मैं पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देता हूं। मैं कांग्रेस की सेवा करता रहूंगा। उनके इस्तीफे के बाद कैप्टन अमरिंदर ने अपनी पहली प्रतिक्रिया ट्वीट के माध्यम से दी। उन्होंने लिखा कि  मैंने तो पहले ही कहा था कि यह आदमी स्थिर नहीं है और सीमावर्ती राज्य पंजाब के लिए सिद्धू सही नहीं है।

सलाहकार बोले- सिद्धांत की राजनीति करते हैं सिद्धू
वहीं सिद्धू के इस्तीफे पर उनके मीडिया एडवाइजर सुरिंदर डल्ला ने कहा है कि नवजोत सिंह सिद्धू सिद्धांत की राजनीति कर रहे हैं। नई सरकार ने कांग्रेस हाइकमान के 18 सूत्रीय फार्मूले पर कोई काम नहीं किया है। पिछले पांच दिनों के कामों से ऐसा कुछ देखने को नहीं मिला है।



पंजाब की राजनीति में उलटफेर जारी है। मंगलवार को पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह के गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात पर अटकलों का सिलसिला खत्म भी नहीं हुआ था कि नवजोत सिद्धू ने इस्तीफा देकर नया धमाका कर दिया। वहीं सूत्रों के अनुसार, सिद्धू इकबाल प्रीत सहोता को डीजीपी बनाए जाने से नाराज थे। 

पार्टी की जीत के साथ ही शुरू हुए थे विवाद
आज पंजाब कांग्रेस जिस समस्या से जूझ रही है, उसकी शुरुआत 2017 चुनाव में पार्टी की जीत के साथ ही हुई थी। दरअसल नवजोत सिंह सिद्धू 2017 चुनाव से पहले कांग्रेस में शामिल हुए थे। बेबाक अंदाज वाले सिद्धू राहुल और प्रियंका वाड्रा की पसंद थे। पार्टी जीती तो सिद्धू को डिप्टी सीएम बनाने की चर्चाएं तेज हो गई। लेकिन जब कैप्टन सीएम बने तो उन्होंने साफ कर दिया कि पंजाब को डिप्टी सीएम की जरूरत नहीं है। राजनीति के जानकार मानते हैं कि अति महत्वाकांक्षी सिद्धू के लिए ये पहला झटका था और कैप्टन सिद्धू विवाद की शुरुआत यहीं से हो गई थी।  ... और पढ़ें
नवजोत सिद्धू। नवजोत सिद्धू।

पंजाब: चन्नी सरकार में काम-काज का बंटवारा, सिद्धू के नजदीकी रंधावा को गृह मंत्रालय की कमान

पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने मंगलवार को अपने मंत्रियों के बीच विभागों का बंटवारा कर दिया। अब तक मुख्यमंत्री के अधीन ही रहा गृह विभाग उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर रंधावा को सौंपते हुए सीएम ने विजिलेंस अपने पास रखा है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग दूसरे उपमुख्यमंत्री ओपी सोनी को दिया गया है।

वहीं दूसरी ओर, चन्नी मंत्रिमंडल में शामिल किए गए पुराने मंत्रियों के विभागों में मामूली बदलाव करते हुए ज्यादातर को उनके पुराने विभाग ही सौंप दिए गए हैं। कैप्टन अमरिंदर सिंह के मंत्रिमंडल में जेल और सहकारिता मंत्री रहे सुखजिंदर रंधावा को चन्नी मंत्रिमंडल में गृह विभाग के साथ ही यह दोनों विभाग भी दिए गए हैं जबकि मनप्रीत सिंह बादल पहले की तरह वित्त विभाग देखेंगे।


विजय इंदर सिंगला इस बार भी पीडब्ल्यूडी मंत्री है, हालांकि उनसे शिक्षा विभाग लेकर परगट सिंह को सौंपा गया है। तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा के पास भी पहले ही तरह ग्रामीण विकास एवं पंचायत और पशुपालन विभाग रहेंगे जबकि रजिया सुल्ताना को अरुणा चौधरी के पुराने विभाग- सामाजिक सुरक्षा व महिला एवं बाल विकास दिए गए हैं। भारत भूषण आशू के पास भी पहले की तरह खाद्य, सिविल सप्लाई व उपभोक्ता मामले विभाग रहेगा।

चन्नी मंत्रिमंडल के जरिए पहली बार मंत्री बने डॉ. राजकुमार वेरका को मेडिकल शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक न्याय, आधिकारिता व अल्पसंख्यक मामले विभाग, रणदीप नाभा को खाद्य प्रसंस्करण, राजा वड़िंग को ट्रांसपोर्ट, संगत सिंह गिलजियां को वन एवं वन्य जीव और गुरकीरत कोटली को उद्योग व कामर्स और सूचना तकनीक विभाग दिए गए हैं।

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यह है चन्नी मंत्रिमंडल में मंत्रियों के विभाग
चरणजीत सिंह चन्नी (सीएम-14 विभाग)  : कार्मिक, विजिलेंस, सामान्य प्रशासन, न्याय, विधि एवं वैधानिक मामले, सूचना एवं जनसंपर्क, पर्यावरण, खनन व भूविज्ञान, नागरिक उड्डयन, एक्साइज, इनवेस्टमेंट प्रमोशन, हास्पिटेलिटी, ऊर्जा, पर्यटन व सांस्कृतिक मामले।
सुखजिदंर सिंह रंधावा (डिप्टी सीएम- 3 विभाग) : गृह, सहकारिता और जेल।
ओपी सोनी (डिप्टी सीएम- 3 विभाग) : स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, डिफेंस सर्विस वेलफेयर, स्वतंत्रता सेनानी मामले।

कैबिनेट मंत्री
ब्रह्म मोहिंदरा : स्थानीय निकाय, संसदीय मामले, चुनाव, शिकायत निवारण।
मनप्रीत सिंह बादल : वित्त, कराधान, गवर्नेंस रिफार्म, प्लानिंग, प्रोग्राम इम्पलीमेंटेशन।
तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा : ग्रामीण विकास एवं पंचायत, पशुपालन, मतस्य पालन व डेयरी विकास।
अरुणा चौधरी : राजस्व, पुनर्वास और आपदा प्रबंधन।
सुखजिंदर सिंह सरकारिया : जल स्त्रोत, हाउंसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट।
राणा गुरजीत सिंह : तकनीकी शिक्षा व औद्योगिक प्रशिक्षण, रोजगार उत्तपत्ति एवं प्रशिक्षण, उद्यान, मृदा एवं जल संरक्षण।
रजिया सुलताना : जलापूर्ति एवं सेनिटेशन, सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास, प्रिंटिंग एंड स्टेशनरी।
विजय इंदर सिंगला : पीडब्ल्यूडी, प्रशासनिक सुधार।
भारत भूषण आशू : फूड, सिविल सप्लाई एंड कंज्यूमर अफेयर्स।
रणदीप सिंह नाभा : कृषि एवं किसान कल्याण, खाद्य प्रसंस्करण।
राजकुमार वेरका : सामाजिक न्याय, आधिकारिता और अल्पसंख्यक मामले, नवीन ऊर्जा स्त्रोत, मेडिकल शिक्षा व अनुसंधान।
संगत सिंह गिलजियां : वन, वन्य जीव, श्रम।
परगट सिंह : स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, खेल एवं युवा मामले, एनआरआई मामले।
अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग : परिवहन।
गुरकीरत सिंह कोटली : उद्योग व कामर्स, सूचना तकनीकी, विज्ञान तकनीकी।
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हरियाणा में हादसा: रतिया में टाटा एस से टकराई स्कूल वैन, कई बच्चे चोटिल, एक की बाजू कटी

रतिया से फतेहाबाद जा रही डीएवी स्कूल की वैन मंगलवार को टाटा एस गाड़ी से टकरा गई। इस टक्कर के कारण 12वीं कक्षा के एक विद्यार्थी की बाजू कट गई, वहीं, कई बच्चों को भी चोटें लगीं। बताया जा रहा है कि दूसरे बच्चों को टूटे शीशे के टुकड़े लगे। जिस छात्र की बाजू कटी है, पहले उसे रतिया के निजी अस्पताल ले जाया गया, वहां से उसे फतेहाबाद रेफर कर दिया गया। फतेहाबाद से बच्चे को हिसार भेज दिया गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार छात्र ने हाथ को खिड़की से बाहर निकाला हुआ था। सूचना पाकर पुलिस मौके पर पहुंची और स्कूल वैन व टाटा एस को थाने लाया गया। फिलहाल मामले की जांच जारी है। जानकारी के अनुसार फतेहाबाद के डीएवी स्कूल की तीन बसें रोजाना रतिया से बच्चों को स्कूल लेकर जाती हैं।

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44 बच्चे सवार थे वैन में
सुबह करीब आठ बजे गांव अहरवां निवासी चालक सतबीर व परिचालक खजान सिंह 44 बच्चों को लेकर रतिया से वापस फतेहाबाद जा रहे थे। इसी दौरान गांव हमजापुर के पास सामने से आ रहे टाटा एस के साथ स्कूल वैन की बराबर से टक्कर हो गई। इससे खिड़की का शीशा टूट गया। शीशे के टुकड़े कुछ बच्चों को लगे, जबकि 12वीं कक्षा के छात्र अमन की बाजू कट गई। आनन-फानन में स्कूल वैन चालक ने छात्रों को रतिया के निजी अस्पताल पहुंचाया। जहां से चिकित्सक ने बाजू कटे छात्र को फतेहाबाद ले जाने को कहा। इसी बीच स्कूल प्रबंधन व छात्र के परिजनों को सूचना दी गई। परिजन बाद में छात्र को हिसार लेकर गए। वहीं, अन्य बच्चों को घर भेज दिया गया।
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पंजाब: अरविंद केजरीवाल का दो दिवसीय दौरा कल से, लुधियाना में उद्यमियों से करेंगे मुलाकात

आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल बुधवार से पंजाब के दो दिवसीय दौरे पर आ रहे हैं। बुधवार को वे लुधियाना में उद्यमियों से मुलाकात करेंगे। इससे पहले केजरीवाल को रविवार को दौरे पर आना था लेकिन उसे रद्द कर दिया गया था। कयास लगाए जा रहे हैं कि इस दौरे पर केजरीवाल फ्री बिजली के बाद उत्तराखंड और गोवा की तर्ज पर रोजगार गारंटी योजना का एलान कर सकते हैं।

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कृषि कानूनों के विरोध में आंदोलनरत किसान पहले ही घोषणा कर चुके हैं कि चुनाव की घोषणा के बाद ही सियासी दल चुनावी रैलियां आयोजित करें। इसके बाद सियासी दल भी चुनाव प्रचार को लेकर बैकफुट पर आ गए हैं। आम आदमी पार्टी भी चुनावी माहौल के बीच किसानों के साथ विवाद में फंसना नहीं चाहती है।  
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भगत सिंह : जिस गुप्त ठिकाने में काटे थे शहीद के केश और दाढ़ी, उसे यादगार बनाने का वादा भूले नवजोत सिद्धू

arvind kejriwal
फिरोजपुर के तूड़ी बाजार (शाहगंज मोहल्ला) में बने शहीद-ए-आजम भगत सिंह और उनके साथियों के गुप्त ठिकाने को यादगार बनाने का वायदा मंत्री रहते हुए पंजाब कांग्रेस के प्रधान नवजोत सिद्धू ने किया था। लेकिन शायद उसे पूरा करना भूल गए।

गौरतलब है कि यह मांग पिछले कई साल से की जा रही है, लेकिन अभी तक किसी भी सियासी दल ने इसे यादगार नहीं बनाया है । इसी इमारत में अंग्रेजों के खिलाफ रणनीति तैयार कर उन्हें देश से खदेड़ा गया था। क्रांतिकारियों के लिए हथियार खरीदने को  अंग्रेजों का खजाना लूटने के लिए भगत सिंह के केश और दाढ़ी भी इसी इमारत में सुखदेव ने काटे थे। ताकि भगत सिंह वेशभूषा बदलकर ट्रेन के माध्यम से बेतिया (बिहार) पहुंच सके।
 

सांडर्स की हत्या से पहले यहीं होती थी निशानेबाजी
यही नहीं, सांडर्स की हत्या करने से पूर्व एयर पिस्टल से इसी इमारत में बनी रसोई की दीवार पर निशानेबाजी की जाती थी, सांडर्स की हत्या करने के बाद रसोई की दीवार पर छर्रों से बने निशान चाकू से खरोंच दिए गए थे, ताकि पता न चले। इसलिए यहां के लोग इसे यादगार बनाने की पिछले लंबे समय से मांग कर रहे हैं, अफसोस किसी राजनीतिक नेता ने इसे यादगार बनाने के किए वायदे को पूरा नहीं किया। कांग्रेस के पंजाब प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू 15 अगस्त 2017 को फिरोजपुर आए थे और उक्त ठिकाने को यादगार बनाने के लिए अपने निजी खाते से पंद्रह लाख रुपये की ग्रांट देने की घोषणा की थी, जो आज तक नहीं दी गई।

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खोजी लेखक राकेश कुमार ने लगाया था इस ठिकाने का पता
इस गुप्त ठिकाने की खोज कर तथ्य जुटाने वाले खोजी लेखक राकेश कुमार लंबे समय से इसे यादगार बनाने की मांग कर रहे हैं। पंजाब स्टूडेंट फेडरेशन व नौजवान सभा भी इसे यादगार बनाने के लिए फिरोजपुर में बड़े स्तर पर रोष मार्च कर निकाल चुकी है। पंजाब सरकार ने कोई ध्यान नहीं दिया है। भगत सिंह और उनके क्रांतिकारी साथियों ने गुप्त ठिकाना यहां 10 अगस्त 1928 को बनाया था। अंग्रेजों को पता लगने के बाद इसे चार फरवरी 1929 को छोड़ दिया था। यह ठिकाना पार्टी की जरूरत तथा गतिविधियों को ध्यान में रखकर बनाया था। यहां पर भगत सिंह के अलावा चंद्रशेखर आजाद, सुखदेव, शिव वर्मा, विजय कुमार सिन्हा, डॉ. गया प्रसाद, महाबीर सिंह तथा जय गोपाल का आना-जाना था।

इसी ठिकाने से जाते थे दिल्ली और दूसरे शहरों में
क्रांतिकारी पंजाब से दिल्ली, कानपुर, लखनऊ व आगरा आदि जगह आने-जाने के लिए फिरोजपुर में बनाए गए इस गुप्त ठिकाने पर भेष बदलकर ट्रेनों में यात्रा करते थे। इसके अलावा बम बनाने का सामान जुटाने के लिए क्रांतिकारी डॉ. निगम को यहां पर निगम फार्मेसी के नाम पर केमिस्ट शॉप खुलवाई थी। ये पार्टी की आर्थिक सहायता के लिए धनराशि एकत्रित करते थे। अंग्रेजों से बचकर निकलने के लिए इसी गुप्त ठिकाने में शहीद भगत सिंह के केश व दाढ़ी काटे गए थे। इसके अलावा गुप्त ठिकाने से लगभग छह किलोमीटर दूर भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय हुसैनीवाला बॉर्डर स्थित शहीदी स्मारक पर शहीद भगत सिंह, राजगुरु व सुखदेव की समाधि बनी है। जहां हर साल 23 मार्च को शहीदी दिवस पर मेला लगता है। यहीं पर शहीद भगत सिंह की माता की भी समाधि है। इसके अलावा बीके दत्त की समाधि भी यहीं पर बनी है।

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पुरातत्व विभाग ने नहीं दी एग्रीमेंट की जानकारी
उधर, लेखक राकेश ने बताया कि भगत सिंह का जन्म 28 सितंबर 1907 को हुआ था। उक्त गुप्त ठिकाना कृष्णा भक्ति सत्संग ट्रस्ट फिरोजपुर शहर के अधीन है, पुरातत्व विभाग ने दिसंबर 2015 को यादगार बनाने संबंधी नोटिफिकेशन जारी किया था। उसके बाद ट्रस्ट के चेयरमैन राजिंदर पाल धवन पुत्र बद्रीदास धवन निवासी मोहल्ला लाहौरियां वाला, फिरोजपुर शहर के साथ पुरातत्व विभाग ने एक एग्रीमेंट किया था। राजिंदर पाल का निधन हो चुका है। पुरातत्व विभाग ने उनसे क्या एग्रीमेंट किया है, इसकी जानकारी सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई थी, जो पुरातत्व विभाग ने नहीं दी।
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चिंताजनक: डेढ़ साल से कम उम्र के 99.9 फीसदी बच्चे मोबाइल पर बिता रहे दो घंटे, दिमाग पर पड़ रहा असर

देश भर में 18 माह से कम उम्र के 99.9 प्रतिशत बच्चे रोजाना मोबाइल पर दो घंटे से ज्यादा वक्त गुजारते हैं। यह चौंकाने वाला खुलासा भारतीय बाल अकादमी की ओर से कोविड काल में किए गए एक सर्वे में हुआ है। इसे लेकर बाल रोग विशेषज्ञ चिंतित हैं, क्योंकि मोबाइल का दुष्प्रभाव बच्चों की आंखों के साथ दिमाग के विकास और व्यक्तित्व पर पड़ रहा है।

पिछले दिनों चंडीगढ़ में हुए अकादमी के राष्ट्रीय सम्मेलन में इस पर विशेषज्ञों ने मंथन किया और बचाव के लिए अकादमी की वेबसाइट पर अभिभावकों को जागरूक करने के विकल्प उपलब्ध कराए गए। विशेषज्ञों ने स्क्रीन की बढ़ती आदत को भविष्य की गंभीर समस्या बताया और कहा कि इससे बचाव के लिए अतिरिक्त सजगता जरूरी है। विशेषज्ञों का कहना है कि अभिभावक शुरुआत में अपनी सुविधा के लिए बच्चों को मोबाइल या टीवी की लत लगाते हैं और आगे चलकर बच्चे को इसकी लत लग जाती है।

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हरियाणा: वाहन निर्माण, मरम्मत और बिक्री में गड़बड़ी करने पर अब लगेगा एक लाख रुपये जुर्माना 

दो साल से कम उम्र के बच्चों के लिए जीरो आवर का मानक तय
अकादमी की कोषाध्यक्ष डॉ. गुंजन बवेजा ने बताया कि अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक की हालिया गाइडलाइन के अनुसार दो साल से कम उम्र के बच्चों के लिए स्क्रीन पर जीरो आवर का मानक तय किया गया है। यानी इस उम्र से पहले टीवी या मोबाइल पर बिताया गया 5 मिनट भी खतरनाक है। ये पहले 18 महीने तक के बच्चों के लिए कुछ मिनट का मानक था। दुष्प्रभाव के चलते इसे पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है।

बच्चे को लेकर चिंतित हैं तो यहां संपर्क करें
भारतीय बाल अकादमी ने अभिभावकों के लिए बच्चों से जुड़ी तमाम समस्याओं के समाधान के लिए अपनी वेबसाइट www.iapindia.org पर समाधान उपलब्ध कराया है। जिस पर बच्चों की सेहत से जुड़ी जानकारी के साथ ही उनके सही विकास के मार्ग बताए गए हैं।

इन सुझावों को लें गंभीरता से
  • मोबाइल और टीवी की लत छुड़ाने के लिए खुद बच्चे के साथ वक्त बिताएं। इससे बच्चा बेहतर महसूस करेगा और उसके दिमाग का अच्छे से विकास होगा।
  • बच्चे को अच्छी सीख देने वाली फिल्में, कहानियां, धार्मिक चीजें आदि दिखा सकते हैं। इससे बच्चे के व्यवहार में सकारात्मक बदलाव दिखेगा।
  • 8 साल से ज्यादा उम्र के बच्चे का स्क्रीन देखने का एक टाइम फिक्स कर दें, ताकि उसका कम से कम समय मोबाइल पर खराब हो।
  • खुद भी सारा टाइम मोबाइल पर न लगे रहें। ऐसा करने से बच्चों में नकारात्मक विचार आते हैं।
  • बच्चों को मोबाइल की जगह पेड़-पौधे लगाने व उन्हें पानी देने और पेटिंग आदि करने को प्रेरित करें। ऐसा करते समय उनके काम की तारीफ करें।
  • बच्चों के सोने के कमरे में कभी टीवी, लैपटॉप, या मोबाइल फोन न रखें।
  • बच्चे से इस बात पर जरूर चर्चा करें कि उन्हें वीडियो गेम, फिल्म और टीवी में क्या पसंद या नापसंद है।
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हरियाणा: वाहन निर्माण, मरम्मत और बिक्री में गड़बड़ी करने पर अब लगेगा एक लाख रुपये जुर्माना

हरियाणा सरकार ने मोटर वाहन अधिनियम में किए गए संशोधनों को लागू कर दिया है। वाहन निर्माण, मरम्मत और बिक्री में गड़बड़ी करने पर एक लाख रुपये जुर्माना लगेगा। यह जुर्माना प्रति वाहन होगा। ड्राइविंग लाइसेंस के लिए अयोग्य व्यक्ति वाहन चलाते पकड़ा जाता है तो दस हजार रुपये का चालान कटेगा।

मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद नई चालान राशि की अधिसूचना परिवहन विभाग प्रकाशित कर चुका है। परिवहन विभाग के तत्कालीन प्रधान सचिव शत्रुजीत कपूर की ओर से यह जारी हुई है। अगर वाहन चालकों, निर्माताओं, लाइसेंस धारकों व अन्य लोगों को नई चालान राशि के बारे में जानकारी नहीं है तो जरूर हासिल कर लें। अगर वाहन के नाजुक सुरक्षा घटकों के साथ कंपनी कोई छेड़छाड़ करती है तो पकड़े जाने पर एक लाख रुपये प्रति घटक जुर्माना वसूला जाएगा। अगर वाहन मालिक नाजुक व जरूरी सुरक्षा घटकों में कोई गैर जरूरी बदलाव या छेड़छाड़ करने के बाद पकड़ा जाता है तो उसे छेड़छाड़ पर प्रति घटक 5000 रुपये चुकाने होंगे।

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अधिसूचना के अनुसार मोटर वाहन अधिनियम के उल्लंघन पर कम से कम जुर्माना 500 रुपये व अधिकतम एक लाख रुपये प्रति घटक अनुसार होगा। पास या बिना टिकट यात्रा व कंडक्टर के कर्तव्य की अवहेलना पर 500 रुपये जुर्माने का प्रावधान किया गया है। अगर वाहन चालक परिवहन विभाग के अधिकारी के आदेशों को नहीं मानता है, कार्य में बाधा डालने या जानकारी न देने या गलत सूचना देने की कोशिश करता है तो 2000 रुपये का चालान होगा।

हल्के वाहन को तेज गति से चलाने पर लगेगा जुर्माना 
परिवहन विभाग के उच्च अधिकारियों ने बताया कि अधिनियम के तहत अयोग्य व्यक्ति कंडक्टर लाइसेंस रखता है या स्टेज कैरिज योजना में अवैध लाइसेंस के तहत कार्य करता है तो दस हजार रुपये जुर्माना किया जाएगा। हल्के वाहन को तेज गति से चलाने पर पहली बार 1000, 2000 व दूसरी बार 2000, 4000 रुपये जुर्माना होगा। खतरनाक तरीके से वाहन चलाने पर दोपहिया, तिपहिया, ट्रैक्टर का पहली बार 2000, हल्के वाहन का 3000 व अन्य वाहन का 5000 जुर्माना होगा, दूसरी बार ऐसा करने पर 3000, 5000 व 10000 रुपये चालान का प्रावधान है। 

रफ्तार का मुकाबला किया तो खैर नहीं 
दौड़ लगाने व रफ्तार का मुकाबला करते पकड़े जाने पर पहली बार 5000 व दूसरी बार 10000 रुपये चुकाने होंगे। बिना पंजीकरण वाहन चलाने पर पहली बार पकड़े गए तो दोपहिया, तिपहिया का 2000, हल्के वाहन का 3000 व अन्य वाहन का 5000 व दूसरी बार पकड़े जाने पर तीनों श्रेणियों में यह चालान राशि दोगुनी हो जाएगी। तय सीमा से अधिक भार, सवारियां ढोने, सीट बेल्ट, हेलमेट न लगाने की नई चालान राशि लागू की है। एम्बुलेंस व अन्य आपातकालीन वाहनों का रास्ता रोकने पर दस हजार रुपये जुर्माना लगेगा। बिना बीमा वाहन चलाते पकड़े गए तो पहली बार 2000 व दूसरी बार 4000 रुपये चुकाने होंगे।
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हरियाणा: 150 से कम बच्चों पर भी नियुक्त होंगे मुख्य शिक्षक, जल्द होगा पदों का वितरण

हरियाणा के शिक्षा विभाग ने बीते नौ अगस्त की छात्र संख्या को आधार मानते हुए जूनियर बेसिक टीचर (जेबीटी), प्राइमरी टीचर्स (पीआरटी) और मुख्य शिक्षक (एचटी) की रेशनेलाइजेशन को अंतिम रूप दे दिया है। स्कूलों में शिक्षकों के पदों का दोबारा वितरण जल्दी होगा। किसी मुख्य शिक्षक को सरप्लस नहीं किया गया है।

इसके लिए 150 से कम विद्यार्थियों पर भी मुख्य शिक्षकों की नियुक्ति को मंजूरी दी गई है। मौलिक शिक्षा निदेशक ने सोमवार को सभी जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों को रेशनेलाइजेशन का पत्र भेज दिया। इसके अनुसार कुल 422 शिक्षक सरप्लस हुए हैं। इनमें 108 नियमित, 314 अनुबंधित व तदर्थ शिक्षक हैं। इन्हें डाइट व नई शिक्षा नीति के कार्यक्रमों में समायोजित किया जाएगा।
 

निदेशक ने एक सप्ताह में मांगी जानकारी
निदेशक ने सभी जिलों से स्कूलों में सरप्लस हुए शिक्षकों की जानकारी एक सप्ताह में भेजने को कहा है। रेशनेलाइजेशन लागू करते समय 70 प्रतिशत दिव्यांग अतिथि शिक्षक सरप्लस नहीं होंगे। प्रदेश के 8672 स्कूलों में 2362 मुख्य शिक्षकों और 36,212 जेबीटी-पीआरटी की जरूरत है। इनकी कुल संख्या 38,574 बनती है। साठ बच्चों तक दो, 90 तक तीन, 120 तक चार, 150 तक पांच जेबीटी-पीआरटी नियुक्त किए जाएंगे। 200 बच्चों तक भी इनकी संख्या पांच ही रहेगी। इसके बाद हर 40 बच्चों को एक अतिरिक्त शिक्षक नियुक्त किया जाएगा।

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सबसे पहले जूनियर टीचर होंगे सरप्लस
बिना वर्कलोड वाले शिक्षकों में सबसे पहले कनिष्ठ अतिथि शिक्षक सरप्लस किए जाएंगे। यदि स्कूल में अतिथि या तदर्थ शिक्षक नहीं है, तो लंबे समय से स्कूल में जमे वरिष्ठ जेबीटी, पीआरटी सरप्लस किए जाएंगे। इनका समायोजन अस्थायी तौर पर किया जाएगा, निकट भविष्य में होने वाले ऑनलाइन तबादलों में इन्हें भाग लेना ही होगा। यदि एक-दूसरे के स्थान पर कोई सरप्लस होना चाहता है, तो दोनों शिक्षकों को सहमति पत्र देना पड़ेगा।
 
इन श्रेणियों को सामान्य स्थिति में नहीं छेड़ा जाएगा
एक साल में सेवानिवृत्त होने वाले, विधवा, परित्यक्ता, गंभीर बीमारियों से पीड़ित शिक्षकों को रेशनेलाइजेशन लागू करते समय बिल्कुल नहीं छेड़ा जाएगा। यदि किसी स्कूल में इसी श्रेणी के सभी शिक्षक हैं, तो सबसे अधिक ठहराव वाले शिक्षक को सरप्लस करना होगा।

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2694 नई वैकेंसी, 5696 पद सुरक्षित पूल में रखे
रेशनेलाइजेशन के बाद 2694 नई वैकेंसी बनती हैं। जिनमें से मेवात कैडर के 852 पदों को भरने के लिए कर्मचारी चयन आयोग को मांग भेजी गई है। नूंह में सबसे अधिक 1375 नए पदों की मांग है। कुल स्वीकृत पद 44,270 हैं, जबकि 38,574 पदों की ही मांग विद्यार्थियों की संख्या के अनुसार है। 5696 को शिक्षा निदेशालय ने सुरक्षित पूल में रखा है। भविष्य में विद्यार्थी बढ़ने पर पूल से पदों का आवंटन स्कूलों को किया जाएगा। अभी 35,860 शिक्षक व मुख्य शिक्षक ही स्कूलों में कार्यरत हैं।
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क्रेज: कोरोना काल में गूगल पर सबसे ज्यादा सर्च हुआ योग, चंडीगढ़ की योग थेरेपिस्ट के शोध से खुलासा

कोविड-19 जब अपने चरम पर था, तो उस समय दुनियाभर में गूगल ट्रेंडस पर योग को सर्वाधिक सर्च किया जा रहा था। लोग गूगल पर योग के साथ-साथ तनाव और अवसाद से बचने को सर्च कर रहे थे। चंडीगढ़ की योग थेरेपिस्ट परिणीता जिंदल ने अन्य शोधकर्ताओं के साथ मिलकर कोरोना महामारी के समय में योगा के चलन पर शोध किया, जिसमें यह जानकारी सामने आई है। इस शोध को पीयूबीएमईडी इंटरनेशनल जर्नल ऑफ योगा में भी पब्लिश किया गया है। ग्रिड की योगा थेरेपिस्ट परिणीता ने बताया कि टीम के साथ एक नवंबर 2019 से लेकर 31 मई 2020 के मध्य गूगल ट्रेंड्स पर योग को लेकर शोध किया।

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तीन भागों में बांटा गया शोध
शोध को उन्होंने तीन भागों में बांटा था। कोरोना काल से पहले का समय, कोविड-19 संक्रमण अवधि और तीसरा कोरोना महामारी का समय शामिल किया गया। शोध में पाया गया कि गूगल ट्रेंडस के अनुसार विश्वभर में कोरोना महामारी के समय में लोगों का योग के प्रति रुझान तेजी से बढ़ा है, लेकिन कोरोना महामारी से उभरने के समय में अब थोड़ा कम होता जा रहा है। इसलिए अभी भी हमें जरूरत है कि हम योग को अपनी प्रतिदिन की जिंदगी का हिस्सा बनाएं। शोध में पाया कि योगा को लोग मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के साथ जोड़कर सर्च कर रहे थे।
 
विदेश में लोगों ने योग को किया अधिक सर्च
शोध में पाया गया कि जब कोविड-19 को महामारी घोषित किया गया, उस दौरान स्पेन, रूस, ब्राजील, फ्रांस और इटली में योग को सर्वाधिक सर्च किया गया। शोध टीम में दिल्ली के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के वरिष्ठ सलाहकार हर आशीष जिंदल, एम्स गुवाहाटी के असिस्टेंट प्रोफेसर लिमालेमला जामिर, आर्म्ड फोर्सेज मेडिकल कॉलेज पुणे के एसोसिएट प्रोफेसर धर्मजीत सिंह और कनाडा की हिमानी दत्ता शामिल रहीं।
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