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बड़ी चुनौती: क्या भारत और कांग्रेस दोनों को जोड़ पाएंगे राहुल गांधी?

onkar singh ओंकार नाथ सिंह
Updated Thu, 29 Sep 2022 04:54 PM IST
सार

तमाम चुनौतियों और संघर्षों के बीच राहुल गांधी निकल तो पड़े हैं अपनी यात्रा पर, लेकिन क्या वो सचमुच भारत और कांग्रेस को अपने पक्ष में जोड़ पाएंगे? 

राहुल गांधी जी इस यात्रा के माध्यम से भारत को यह संदेश देना चाहते हैं कि देश में रहने वाला प्रत्येक नागरिक समान रूप से देखा जाए।
राहुल गांधी जी इस यात्रा के माध्यम से भारत को यह संदेश देना चाहते हैं कि देश में रहने वाला प्रत्येक नागरिक समान रूप से देखा जाए। - फोटो : facebook.com/Rahul Gandhi
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विस्तार

राहुल गांधी जी की भारत जोड़ो यात्रा जब से शुरू हुई है तब से ही यह चर्चा का विषय बनी हुई है। भारतीय जनता पार्टी में बेचैनी है और नित्य कोई न कोई आलोचना का कारण ढूंढती रहती है। इधर, कुछ राजनीतिक दल भारत जोड़ो यात्रा को कांग्रेस जोड़ो यात्रा बताते हैं तो कुछ इसे कहते हैं कि यह पूरे देश में क्यों नहीं हो रही है? जाहिर है वास्तविक कारण कोई नहीं समझ पा रहा है कि यह यात्रा क्यों और किस मकसद से प्रारंभ हुई है।



दरअसल, वर्तमान परिस्थितियों में भारत ही नहीं समूचे विश्व में एक घृणा का वातावरण उत्पन्न हो रहा है या यह कह सकते हैं दक्षिण शक्ति पंथियां हावी हो रही हैं। इसका मतलब है कि हर देश में जो बहुमत के लोग हैं वह चाहते हैं कि देश के अंदर उनकी ही विचारधारा का आदर हो और बाकी लोग उसके अनुसार चलें।


तमाम चुनौतियों और संघर्षों के बीच राहुल गांधी निकल तो पड़े हैं अपनी यात्रा पर, लेकिन क्या वो सचमुच भारत और कांग्रेस को अपने पक्ष में जोड़ पाएंगे? जिस समय राहुल गांधी अपनी इस यात्रा पर निकले हैं वो बहुत महत्वपूर्ण है। जहां एक ओर खुद कांग्रेस के अपने अंतर्द्वंद हैं वहीं पूरे देश में भी विचारधाराओं का टकराव अपने चरम पर है। 

इधर, अभी हाल ही में आपने देखा कि इटली की सत्ता ब्रदर्स ऑफ इटली कि नेता जीओजिया मेलोनी की अगुवाई में मिली है जो फासीवादी तानाशाह बेनिटो मुसोलिनी से खासा प्रेरित है। यूरोप में हाल ही में फ्रांस स्पेन और स्वीडन के चुनाव को दक्षिणपंथी पार्टियों के सत्ता में आने के सिलसिले के तौर पर भी देखा जा सकता है।

जाहिर है जिस प्रकार से दक्षिणपंथी शक्तियां अधिकांश देशों में हावी हो रही हैं प्रसिद्ध दार्शनिक प्लेटो का कथन याद आ रहा है जिन्होंने अपनी किताब (द रिपब्लिक) में आज से 2400 वर्ष पहले लिखा था। यह किताब ग्रीक भाषा में लिखी गई है

 

 

उन्होंने लिखा है- लोगों की सरकार फैसले लेने में उचित नहीं है। उन्होंने यह भी कहा है कि किसी नेता के लिए मतदान करना उन्हें काफी जोखिमभरा लगता है क्योंकि उनके मुताबिक मतदाता उम्मीदवार की प्रसांगिक बातों, उनके व्यक्तित्व और भाषण से प्रभावित हो सकता है चाहे उस व्यक्ति में सरकार चलाने की योग्यता ना हो।

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उनके इस कथन से प्रभावित होकर उनके गुरु सुकरात ने कहा लोकतंत्र अराजकता का सुखद रूप है। कालांतर में आपने विश्व का इतिहास देखा कि किस प्रकार दो बार नेताओं के प्रभाव में विश्व के लगभग सभी देशों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से  विश्व युद्ध कूदना पड़ा और उसका कितना भयावह परिणाम हुआ यह सबके सामने है।

इन विषम परिस्थितियों में राहुल गांधी जी इस यात्रा के माध्यम से भारत को यह संदेश देना चाहते हैं कि देश में रहने वाला प्रत्येक नागरिक समान रूप से देखा जाए। अल्पमत में रहने वालों को हेय दृष्टि से ना देखा जाए। हमारा हिंदू धर्म विशाल है जिसका कोई अंत ही नहीं है।

यह वह धर्म है जिसका कोई एक नियम, संगठन या संस्थापक नहीं है, जिसका कोई एक ग्रंथ नहीं है। अनेकों ग्रंथ हैं जिसे विशाल ज्ञान का भंडार भरा पड़ा है। हमें अपने पूर्वजों पर गर्व है। आदि शंकराचार्य पर गर्व है जिन्होंने इस धर्म का प्रचार प्रसार कश्मीर से कन्याकुमारी और गुजरात से उड़ीसा तक पूरे देश में किया। उन्हे बारंबार प्रणाम है।


हार्वर्ड के दार्शनिक डायना ऐक ने अपनी Sacred Geography Of India किताब में लिखा है-

 

भारत एक सैकड़ों धार्मिक स्थलों से बंधा हुआ देश है।

उनकी यह बात विश्वास करने योग्य है।

हमारे पूर्व राष्ट्रपति डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने हिंदुओं का अंग्रेजी में वर्णन किया है जिसका सारांश इस प्रकार है- 

यह एक सांस्कृतिक इकाई है जिसका एक समान इतिहास, साहित्य और सभ्यता है। अभी तक जो भी हिदुत्व के बारे में जानकारी प्राप्त हुई है। मैं अपने आपको उसका उत्तराधिकारी मानता हूं जो मुझे उस समय में ले जाता है। मैं इस बात से पूरी तरह से सहमत हूं कि जो मेरे दोस्त, हमारे हिंदू साथी को मेरे जैसे हिंदुत्व की आवश्यकता नहीं लगती और अब वह विदेश में रहते हैं और भारतीय नहीं है, मुझे उनसे कोई गुरेज नहीं है। लेकिन मैं इस भौगोलिक और सांस्कृतिक हिंदुत्व में बहुत संतुष्ट हूं जो मुझे मेरे पूर्वजों के अतीत से जोड़ता है।) परंतु हमारे हिंदुत्व ने कभी भी किसी धर्म का विरोध नहीं किया।

भारत एक लोकतंत्र देश है और जब यह देश आजाद हो रहा था तो उस समय ब्रिटेन के प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल ने कहा था-
 

स्वतंत्रता के बाद भारत की सत्ता दुष्टों बदमाशों और लुटेरों के हाथ में चली जाएगी।

आज दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि बात कुछ हद तक सही दिखती लग रही है। राहुल जी की यात्रा का मुख्य उद्देश्य यह है कि विश्व के लोग भारत को भाजपा सरकार के कारनामों से  हिंदुओं और भारत से मत घृणा करें। हमारा देश विविधता से भरा है और हम सभी धर्मो का समान रूप से आदर करते हैं। हमारा प्रत्येक नागरिक भारतीय है  चाहे वह किसी भी धर्म का हो और उसका समान अधिकार है। इसलिए विश्व में रहने वाले सभी भाई प्रत्येक भारतीय को जो वहा का नागरिक है उसे हिंदू समझकर तिरस्कृत ना करें।


हमें इससे निराश होने की आवश्यकता नहीं हमको अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन की बात को याद करना चाहिए जिन्होंने लिखा था जनतंत्र जनता का जनता के द्वारा जनता के लिए शासन है।

हमारी जनता बहुत समझदार है और उसने कई बार लोकसभा और विधानसभा के चुनाव में अपनी समझदारी का भरपूर परिचय दिया है और किसी भी सरकार का अत्याचार नाइंसाफी बर्दाश्त नहीं किया समय आने पर वह उसका फैसला अवश्य करेगी राहुल जी की यात्रा केवल यही सद्भावना यात्रा है।

यह देश सब का है और देश नफरत से नहीं प्रेम के बल पर चलेगा इस संदेश को कश्मीर से कन्याकुमारी तक राहुल जी अपनी पदयात्रा से जनता को पहुंचा रहे हैं लोग उनका स्वागत कर रहे हैं और मुझे पूर्ण विश्वास है जनता समय आने पर इसका जवाब देश में नफरत फैलाने वालों को अवश्य देगी ही और उनका यह प्रेम भरा संदेश विदेशों में भी हिंदुओ और भारतीयों के प्रति बढ़ती  नफरत को *प्रेम* में बदलेगा।

(लेखक ओंकार नाथ सिंह, मीडिया एवं कम्युनिकेशन एडवाइजरी कमेटी, उत्तर प्रदेश कांग्रेस के सदस्य हैं)

 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

 

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