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सहयोग: आपदा में काम आ रहे हैं भारत के दोस्त

अवधेश कुमार Published by: अवधेश कुमार Updated Wed, 19 May 2021 03:55 AM IST
प्रतीकात्मक तस्वीर
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : PTI
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जिस तरह विश्व समुदाय ने भारत के लिए खुले दिल से सहयोग और सहायता का हाथ बढ़ाया है, वह अभूतपूर्व है। भारत तक आवश्यक सहायता सामग्रियां जल्दी पहुंचे, इसके लिए सैन्य संसाधनों तक का इस्तेमाल किया जा रहा है। अभी तक 40 से ज्यादा देशों से सहायता सामग्रियां भारत पहुंच चुकी हैं। जो सामग्रियां आ रही हैं, उनमें स्वाभाविक ही ऑक्सीजन उत्पादक संयंत्र, ऑक्सीजन सांद्रक, छोटे-बड़े ऑक्सीजन सिलेंडर, टेस्ट किटों के अलावा कोरोना मरीजों के लिए आवश्यक औषधियों में रेमडेसिविर, टोसिलिजुमैब, फेवीपिरवीर आदि हैं। अमेरिका से सबसे ज्यादा सामग्रियां आईं हैं। ह्वाइट हाउस प्रवक्ता का बयान है कि हम दिन-रात काम कर रहे हैं, जिससे भारत को आवश्यक सामग्रियां मिलती रहें। 

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ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने कहा है कि हम भारत के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे हैं। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भारत के लिए एक फेसबुक पोस्ट लिखी। उन्होंने लिखा, हम जानते हैं कि भारत एक मुश्किल दौर से गुजर रहा है। फ्रांस और भारत हमेशा एकजुट रहे हैं। ऐसे उदाहरण कम ही होंगे, जब सहायता के लिए एक देश दूसरे देश को आवश्यक सहयोग कर रहे हैं, जिससे आसानी से सामग्रियां पहुंच सकें। उदाहरण के लिए, फ्रांस ने खाड़ी स्थित अपने देश की एक गैस निर्माता कंपनी से दो क्रायोजेनिक टैंकर भारत को पहुंचाने की इच्छा जताई, तो कतर ने उसे तत्काल स्वीकृति दी। 


इस्राइल के नई दिल्ली स्थित राजदूत रॉन मलका ने कहा कि भारत के साथ अपने संबंधों को देखते हुए उनकी सरकार ने एक टास्क फोर्स गठित किया है, ताकि भारत को तेजी से मदद पहुंचाई जा सके। केवल देश और संस्थाएं ही सहायता नहीं कर रहीं, अनेक देशों के नागरिक तथा विश्व भर के भारतवंशी भी इस समय हरसंभव मदद के लिए आगे आ रहे हैं। कई देशों में भारतीय मूल के डॉक्टरों ने भी ऑनलाइन मेडिकल परामर्श मुफ्त में देने का अभियान चलाया हुआ है। सिंगापुर में रहने वाले भारतीयों ने वहां की सरकार के माध्यम से बड़ी खेप भारत भेजी है। लेकिन इसके समानांतर देसी-विदेशी मीडिया का एक धड़ा, एनजीओ आदि अपने व्यापक संपर्कों का प्रयोग कर कई प्रकार का दुष्प्रचार कर रहे हैं। मसलन, विदेशी सहायता सामग्रियां तो वहां जरूरतमंदों तक पहुंच ही नहीं रहीं... सामग्रियां कहां जा रही हैं किसी को नहीं पता...आदि आदि। 

आपको सैकड़ों ऐसे बयान मिल जाएंगे, जिससे आपके अंदर यह तस्वीर बनेगी कि कोहराम से परेशान होते हुए भी भारत सरकार इतनी गैर जिम्मेवार है कि वह इनका वितरण तक नहीं कर रही या गोपनीय तरीके से इनका दुरुपयोग कर रही है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय की एक ब्रीफिंग में भी यह मुद्दा उठाया गया। एक पत्रकार ने पूछा कि भारत को भेजे जा रहे अमेरिकी करदाताओं के पैसे की जवाबदेही कौन लेगा? अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि हम आपको यकीन दिलाना चाहते हैं कि अमेरिका इस संकट के दौरान अपने साझेदार भारत का ख्याल रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

बीबीसी के एक संवाददाता ने इस मुद्दे पर ब्रिटेन के फॉरेन कॉमनवेल्थ ऐंड डेवलपमेंट ऑफिस (एफसीडीओ) तक से बात की। उसने पूछा कि क्या उसके पास इस बात की कोई जानकारी है कि ब्रिटेन की ओर से भेजी गई मदद भारत में कहां बांटी गई? एफसीडीओ ने कहा कि भारत को भेजे जा रहे मेडिकल उपकरणों को कारगर तरीके से पहुंचाने के लिए ब्रिटेन इंडियन रेड क्रॉस और भारत सरकार के साथ काम करता आ रहा है। यह भारत सरकार तय करेगी कि ब्रिटेन की ओर से दी जा रही मेडिकल मदद कहां भेजी जाए और इसकी प्रक्रिया क्या होगी। ये दो उदाहरण यह समझने के लिए पर्याप्त हैं कि एक ओर महाआपदा से जूझते देश में जिससे जितना बन पड़ रहा है, कर रहा है और दूसरी ओर किस तरह का माहौल भारत के खिलाफ बनाने के कुत्सित प्रयास हो रहे हैं।

वास्तव में भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों और द्विपक्षीय संबंधों में जिस तरह की भूमिका निभाई है, उसका विश्व समुदाय पर सकारात्मक असर हुआ है। विदेशों से आ रही मदद और सद्भावना में आ रहे बयान इस बात का प्रमाण हैं कि भारत का सम्मान और साख विश्व स्तर पर कायम है।

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