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तमिलनाडु में हिंदी प्रेम है : भाषा के नाम पर विभाजन और विवाद को जन्म देने की एक और सियासी साजिश

Palaniappan Chidambram पी. चिदंबरम
Updated Sun, 02 Oct 2022 06:38 AM IST
सार

वित्तमंत्री का यह दावा, कि वहां हिंदी के प्रति नफरत है या जो लोग हिंदी सीखते हैं, उनका मजाक उड़ाया जाता है या गाली दी जाती है, कभी सच नहीं था और अब भी सच नहीं है। तमिलनाडु में वित्तमंत्री ने जो नया मोर्चा खोला है, ऐसा लगता है कि वह एक ऐसा मुद्दा गढ़ने की सुनियोजित रणनीति का हिस्सा है, जिसके आधार पर आसानी से विभाजन का लाभ उठाया जा सके।

प्रतीकात्मक तस्वीर।
प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : Istock
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विस्तार

मुझे सुश्री कस्तूरी पर गर्व है। उसने खुद का परिचय इस तरह से दिया, कि वह मध्य वर्ग से आती है, एक अच्छी छात्रा है और उसने उस स्कूल से पढ़ाई की, जिसमें तमिलनाडु राज्य बोर्ड के पाठ्यक्रम की पढ़ाई होती है। इसके बाद उसने एक धमाका किया, जिससे वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण अवाक रह गई होंगी। वित्तमंत्री की नाराजगी का जवाब देते हुए उसने कहा, 'मैंने एक विषय के रूप में हिंदी की पढ़ाई की है और बाद में संस्कृत (तमिल नहीं) की पढ़ाई की, और मुझे मेधावी विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध हर छात्रवृत्ति भी मिली।' मैं जब यह लेख लिख रहा हूं, श्रीमती सीतारमण ने सुश्री कस्तूरी की बात का खंडन नहीं किया है।



श्रीमती सीतारमण ने गुस्से से तमतमाते हुए आरोप लगाया था कि तमिलनाडु में जो बच्चे स्कूलों में एक विषय के रूप में हिंदी पढ़ते हैं, उन्हें मेधावी छात्रवृत्ति से वंचित किया जाता है और उनके साथ भेदभाव होता है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब वह तमिलनाडु में युवा विद्यार्थी थीं, तब जो कोई भी हिंदी पढ़ता था, उसका मजाक उड़ाया जाता था, उसे स्कूल और सड़क में अपमानित किया जाता था और परोक्ष रूप से उसे बहिष्कृत कर दिया जाता था। उन्होंने उनका साक्षात्कार लेने वाली सुश्री मारिया शकील से कहा, तमिलनाडु में 'बहुत कुछ नहीं बदला है'। उन्होंने तमिल लोगों को 'सभ्य' कहा, लेकिन हिंदी के प्रति नफरत, जिसने लोगों को पसंद से हिंदी सीखने से रोक दिया, 'असभ्यता' थी। उन्होंने कहा कि उन्होंने हिंदी के प्रति नफरत को खारिज कर दिया, चाहे वह उन राजनीतिक दलों ने फैलाई थी, जिनका जन्म जस्टिस पार्टी से हुआ था, या फिर जो 'द्रविड़ मॉडल' में विश्वास करते थे। यकीनन ये बहुत कठोर शब्द हैं। स्क्रीन पर उन्हें देखकर ऐसा लगा, मानो वह जानबूझकर यह लड़ाई शुरू करना चाहती हैं।


दलों ने खारिज किया
द्रमुक और अन्नाद्रमुक- तमिलनाडु में 55 वर्षों से भी अधिक समय तक शासन करने वाले दल— वित्तमंत्री पर भारी तरीके से बरस पड़े। कांग्रेस प्रवक्ता मोहन कुमारमंगलम ने वित्तमंत्री को चुनौती दी कि वह अपने आरोपों के पक्ष में प्रमाण प्रस्तुत करें। फिर उन्होंने खुद ही यह कहकर इसे खारिज कर दिया कि वित्तमंत्री 'नो डाटा एविलेबल' सरकार से जुड़ी हुई हैं। लेकिन यह सुश्री कस्तूरी थीं, जिन्होंने महफिल लूट ली। तमिलनाडु सरकार की आधिकारिक शिक्षा नीति त्रि-भाषा फॉर्मूले को खारिज करती है और दो-भाषा फॉर्मूले का अनुसरण करती है : सरकारी स्कूलों में तमिल और अंग्रेजी। द्रमुक और अन्नाद्रमुक, दोनों ही इस नीति पर कायम हैं। हालांकि अनुदान प्राप्त तथा गैर अनुदान प्राप्त हजारों निजी स्कूलों में एक भाषा के रूप में हिंदी पढ़ाई जाती है और सरकार उनके फैसले में दखल नहीं देती। इसके अलावा 1,417 स्कूल सीबीएसई (केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा मंडल) से, 76 आईसीएसई (काउंसिल फॉर दी इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशंस) से और आठ आईबी (इंटरनेशनल बैकलॉरीएट) से संबद्ध हैं। 41 एंग्लो-इंडियन स्कूल हैं। इसके अलावा केंद्र सरकार द्वारा संचालित 51 केंद्रीय विद्यालय हैं। इन सबमें एक विषय के रूप हिंदी पढ़ाई जाती है।

हिंदी भाषी राज्यों में राज्य सरकारों की अनौपचारिक नीति सरकारी स्कूलों में एक भाषा फॉर्मूले की है। यह एकमात्र भाषा हिंदी है, एक विषय के अध्ययन और निर्देश देने के माध्यम, दोनों रूपों में। दूसरी भाषा के रूप में संस्कृत, पंजाबी, मराठी और गुजराती हैं। यह अपेक्षा की जाती है कि अंग्रेजी भी पढ़ाई जाए, लेकिन अधिकांश स्कूलों में प्रशिक्षित अंग्रेजी शिक्षक नहीं हैं और बहुत कम बच्चे अंग्रेजी को चुनते हैं। दक्षिण भारतीय भाषाओं में से किसी एक को पेश करने का ढोंग भी नहीं किया जाता। निजी स्कूल सरकारी स्कूलों की राह पर हैं। इसलिए प्रभावी रूप से देखें, तो हिंदी भाषी राज्यों में एक भाषा की नीति है; उन राज्यों में दो-भाषा नीति है, जहां स्थानीय भाषा हिंदी नहीं, बल्कि एक सजातीय भाषा है (जैसे गुजराती, मराठी, पंजाबी); और त्रि-भाषा नीति पर जोर केवल दक्षिण भारतीय राज्यों के संबंध में है।

हिंदी सीखना
फिर भी, दक्षिण भारतीय राज्यों के हजारों बच्चे हिंदी सीख रहे हैं, चाहे हिंदी की पेशकश करने वाले स्कूलों में इसे चुनकर या फिर दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा या भारतीय विद्या भवन जैसे संगठनों के जरिये। हर साल हजारों विद्यार्थी हिंदी प्रचार सभा (1918 में स्थापित) द्वारा संचालित पाठ्यक्रम पढ़ते हैं और परीक्षाएं देते हैं। 2022 में अकेले तमिलनाडु में 2,50,000 विद्यार्थी विभिन्न स्तरों की परीक्षाओं में सम्मिलित हुए। इसके अलावा, प्रवासन ने लाखों हिंदी भाषी लोगों को दक्षिण भारतीय राज्यों में ला दिया है। वे अपने घरों में खुशी से हिंदी बोलते हैं, कार्यस्थलों पर अंग्रेजी और सार्वजनिक जगहों पर स्थानीय भाषा बोलते हैं। 
 
शरारती योजना
वित्तमंत्री का यह दावा, कि वहां हिंदी के प्रति नफरत है या जो लोग हिंदी सीखते हैं, उनका मजाक उड़ाया जाता है या गाली दी जाती है, कभी सच नहीं था और अब भी सच नहीं है। तमिलनाडु में वित्तमंत्री ने जो नया मोर्चा खोला है, ऐसा लगता है कि वह एक ऐसा मुद्दा गढ़ने की सुनियोजित रणनीति का हिस्सा है, जिसके आधार पर आसानी से विभाजन का लाभ उठाया जा सके। इस रणनीति को भारी फंड के जरिये मदद की जा रही है। भाजपा द्वारा आंध्र प्रदेश, केरल और तमिलनाडु में विस्तार करने और कर्नाटक और तेलंगाना में अपनी मौजूदगी को मजबूत करने के लिए बेताबी से प्रयास किए जा रहे हैं। स्पष्ट रूप से वित्तमंत्री को जिन मुद्दों को भड़काने या उसकी निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है, उनमें भाषा भी शामिल है। भाजपा कार्यकर्ता पहले ही सड़क पर मुस्लिम गुटों से भिड़ रहे हैं। केरल, तमिलनाडु, तेलंगाना और कर्नाटक के भाजपा नेताओं को आक्रामक और भड़काऊ होने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
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मैं वित्तमंत्री के अग्रिम पंक्ति में रहने की इच्छा से हैरान नहीं हूं। बढ़ती बेरोजगारी, प्रचंड महंगाई, गिरता रुपया, संवेदनहीन बयान (हम प्याज नहीं खाते) और जीएसटी, डीजल तथा पेट्रोल के दाम और कर राजस्व की हिस्सेदारी को लेकर राज्य सरकारों से निरंतर होने वाले झगड़े के कारण जन विश्वास हासिल करने में नाकाम रहने की वजह से संभवतः वह खुद को विवादित नेता के रूप में नए सिरे से ढालना चाहती हैं। मैं वित्तमंत्री को उनके नए अवतार के लिए शुभकामनाएं देता हूं, लेकिन मुझे पूरा यकीन है कि हर कोने पर उनका सामना आत्मविश्वास से भरी और साहसी कस्तूरियों की बढ़ती जमात से होगा।

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