चारधाम यात्रा 2021: यात्रा पर प्रतिबंधों के खिलाफ बंद रही केदारघाटी, जगह-जगह रोके गए सैकड़ों तीर्थयात्री

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रुद्रप्रयाग Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Mon, 27 Sep 2021 11:54 PM IST

सार

18 सितंबर से चारधाम यात्रा शुरू हुई है, लेकिन देवस्थानम बोर्ड व सरकार ने धामों में प्रतिदिन दर्शनार्थियों की सीमित संख्या व धाम जाने के लिए ई-पास की अनिवार्यता की हुई है।
केदारघाटी के सभी बाजार बंद
केदारघाटी के सभी बाजार बंद - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

केदारनाथ यात्रा में ई-पास और सीमित संख्या में यात्रियों की अनुमति के विरोध में श्रीकेदार धाम ऑनर्स होटल एसोसिएशन के आह्वान पर आहूत बंद का केदारघाटी में व्यापक असर रहा। इस दौरान सोनप्रयाग में यात्रा कारोबारियों व तीर्थयात्रियों ने प्रदर्शन के बाद जनसभा का आयोजन किया। उन्होंने सरकार से ई-पास व्यवस्था को खत्म करने और यात्रा को प्रतिबंध मुक्त करने की मांग की। केदारघाटी बंद के चलते यात्रियों व यात्रा ड्यूटी में लगे कार्मिकों को चाय-पानी के लिए भी तरसना पड़ा।
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चारधाम यात्रा 2021: बिना दर्शन लौटने को मजबूर तीर्थयात्री, संख्या बढ़वाने के लिए अब हाईकोर्ट जाएगी सरकार


होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रेम गोस्वामी के नेतृत्व में केदारघाटी के सभी यात्रा कारोबारियों व यूनियन ने बंद का समर्थन किया। इस दौरान कारोबारियों ने अपने व्यवसायिक प्रतिष्ठान बंद रखे और सोनप्रयाग में आयोजित प्रदर्शन में शामिल हुए। यहां पर नारेबाजी के साथ सभी ने एक स्वर में प्रदेश सरकार से यात्रा में ई-पास व्यवस्था को खत्म करने की मांग की गई। 

व्यापारियों का कहना था कि सरकार की इस व्यवस्था से न तो यात्री धामों में दर्शन कर पा रहे हैं और न कारोबार को गति मिल पा रही है। स्थिति यह है कि आए दिन बिना दर्शन के सैकड़ों श्रद्धालु बैरियरों से वापस लौटाए जा रहे हैं, जिससे अच्छा संदेश नहीं जा रहा है। होटल एसोसिएशन के उपाध्यक्ष प्रमोद नौटियाल व सचिव नितिन जमलोकी ने कहा कि कोरोना संक्रमण के कारण यात्रा साढ़े चार महीने की देरी से शुरू हुई है। इसके बावजूद यात्रा पर तमाम प्रतिबंध लगाए गए हैं। 

इस मौके पर आंदोलन को समर्थन देते हुए आम आदमी पार्टी नेता व जिला पंचायत उपाध्यक्ष सुमंत नेगी ने कहा कि यात्रा से हजारों परिवारों की आजीविका जुड़ी है। सरकार ने बिना किसी योजना के यात्रा का संचालन कर रही है, जिसका यात्रियों व कारोबारियों को नुकसान हो रहा है। अब, एक माह की यात्रा शेष रह गई है, इसलिए प्रतिबंधों को खत्म किया जाना चाहिए। 

चाय-पानी के लिए भी तरसे यात्री
केदारघाटी बंद का व्यापार असर रहा। इस दौरान बाजारों में दवा की दुकानों के अलावा अन्य प्रतिष्ठान भी बंद रहे, जिस कारण केदारनाथ यात्रा पर पहुंचे यात्रियों व गांवों से आए कई लोगों को चाय-पानी के लिए भी तरसना पड़ा। वहीं, दूसरी तरफ सोनप्रयाग सहित अन्य स्थानों पर यात्रा ड्यूटी में लगे कर्मचारियों को भी भोजन नहीं मिल पाया। 

पुलिस पर लगाया जबरन रोकने का आरोप 
सोनप्रयाग में अधिक यात्री एकत्रित न हो, इसके लिए पुलिस ने गुप्तकाशी से ही यात्रियों को रोकना शुरू कर दिया था। गुजरात से आए 17 यात्रियों का कहना था कि वे त्रियुगीनारायण के दर्शन के लिए जा रहे थे। लेकिन पुलिस ने उन्हें जबरन रोक दिया। जबकि उनके पास सरकार का अनुमतिपत्र सहित वैक्सीनेशन प्रमाणपत्र भी था। यात्री हरीश कौशिक, दिनेश, विक्रम, भरत ने बताया कि 20 सिंतबर को गुजरात से चलकर यहां पहुंचे थे। 

सिरोहबगड़ बैरियर से बैरंग लौटाए  गुजरात के 114 यात्री

20 सितंबर को सूरत से उत्तराखंड चारधाम पर निकला 114 श्रद्धालुओं का जत्था गंगोत्री व यमुनोत्री के दर्शन कर चुका है। बीते 26 सितंबर को तीन बसों में सवार ये श्रद्धालु ऋषिकेश-बदरीनाथ हाईवे से केदारनाथ के लिए निकले। लेकिन रुद्रप्रयाग जिले की सीमा पर सिरोहबगड़ बैरियर से उन्हें ई-पास के अभाव में पुलिस ने बैरंग लौटा दिया। यात्री दल में शामिल सुमित पटेल, जयेश वघेल, कुनाल पटेल, भावेश रेटीवाला आदि ने बताया कि उन्होंने प्रशासन व पुलिस ने काफी गुहार भी लगाई, लेकिन बेअसर रही। दो दिन से श्रीकोट होटल में रुके हुए हैं।

उनके पास कोविड-19 वैक्सीनेशन के प्रमाण पत्र सहित अन्य पहचान से जुड़े प्रमाण पत्र भी हैं। दल में 25 से अधिक बच्चे, 15 से अधिक बुजुर्ग शामिल हैं। ई-पास व सीमित यात्रियों की संख्या की व्यवस्था ने उनकी चारधाम यात्रा की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। उन्होंने स्थानीय प्रशासन से दर्शन की अनुमति देने की मांग की है। इधर, रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी मनुज गोयल ने बताया कि शासन व देवस्थानम बोर्ड द्वारा जारी एसओपी के तहत यात्रा संचालित हो रही है। मैनुअल पास के लिए पहले से यात्रियों की लंबी कतार है। ऐसे में आ रहे नए यात्रियों की मदद संभव नहीं है।

बिना दर्शन के लौटे चुके दो हजार से अधिक यात्री
उत्तराखंड सरकार की ई-पास व्यवस्था व सीमिति यात्रियों की संख्या के कारण बीते एक सप्ताह में केदारनाथ दर्शन की चाह लेकर लगभग दो हजार यात्री सिरोहबगड़ से वापस लौट चुके हैं। महराष्ट्र, दिल्ली, गुजरात, यूपी सहित अन्य कई राज्यों से पहुंचे इन यात्रियों के ई-पास या तो गलत थे, या किन्हीं कारणों से बन पाए थे। पुलिस से मिली सूचना के अनुसार यात्रा के चार दिनों में ही 700 से अधिक यात्रियों को ई-पास गलत होने के कारण बैरंग भेज दिया गया था।
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