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पितृ विसर्जनी अमावस्या: विशेष योग में लोगों ने गंगा में लगाई डुबकी, नारायणी शिला में तर्पण के लिए उमड़ी भीड़

संवाद न्यूज एजेंसी, हरिद्वार Published by: अलका त्यागी Updated Sun, 25 Sep 2022 01:55 PM IST
सार

देवपुरा चौक स्थित नारायणी शिला मंदिर पर भी पूजन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। मंदिर के आसपास मेला लगा है। तर्पण करने के बाद श्रद्धालुओं ने गंगा में डुबकी लगाई।

हरकी पैड़ी पर गंगा स्नान
हरकी पैड़ी पर गंगा स्नान - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

आज पितृ विसर्जनी अमावस्या है। जो लोग पिछले 14 दिन में पूर्वजों के निमित्त श्राद्ध में अर्पण, तर्पण नहीं कर सके या जिन्हें पूर्वजों की मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं है, वे आज तर्पण, पिंडदान, ब्राह्मण भोज और भंडारा करवा सकते हैं। आज तीन योगों सर्वार्थ सिद्धि योग, बुधादित्य योग और त्रिकोण योग का संयोग है। इस मौके पर हरकी पैड़ी व अन्य गंगा घाट पर काफी संख्या में श्रद्धालु स्नान करने पहुंचे। सुबह से ही गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिली। 



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वहीं, देवपुरा चौक स्थित नारायणी शिला मंदिर पर भी पूजन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। मंदिर के आसपास मेला लगा है। तर्पण करने के बाद श्रद्धालुओं ने गंगा में डुबकी लगाई। नारायण ज्योतिष संस्थान के विकास जोशी के अनुसार आज सुबह 6.20 बजे से प्रारंभ होकर 26 सितंबर को सुबह 5.56 बजे तक सर्वार्थ सिद्धि योग रहेगा। साथ ही बुधादित्य योग और गुरु शक्ति का केंद्र त्रिकोण योग भी है। इन तीन संयोग में अर्पण-तर्पण करना फलदायी होगा। पितृ प्रसन्न होकर परिवार की सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देंगे। 

भारतीय प्राच विद्या सोसाइटी कनखल के ज्योतिषाचार्य डॉ. प्रतीक मिश्र पुरी के मुताबिक 15 दिनों से पृथ्वी पर आए पितर आज अमावस्या की सांयकाल अपने धाम लौट जाएंगे। सांयकाल में 30 दीए घी और 30 लोटे जल के गंगा में अर्पित कर पितरों की विदाई करें। उन्होंने बताया कि नारायणी शिला मंदिर में उत्तराखंड के अलावा हरियाणा, यूपी, दिल्ली, हिमाचल, राजस्थान और पंजाब से श्रद्धालु पितरों का तर्पण करने पहुंचते हैं। नारायणी शिला मंदिर के पंडित मनोज शास्त्री ने बताया कि चैत्र अमावस्या के दिन नारायणी शिला के दर्शन मात्र से ही पित्र प्रसन्न हो जाते हैं। 

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