उत्तराखंड आपदा: 1993 के बाद पहली बार पानी से लबालब भरी सूखाताल झील, अब प्राकृतिक स्वरूप में होगी विकसित

गिरीश रंजन तिवारी, अमर उजाला, नैनीताल Published by: अलका त्यागी Updated Fri, 22 Oct 2021 03:59 PM IST

सार

इसका डिजाइन आईआईटी रुड़की से बन कर आ गया है। अब इस जगह पर सिर्फ दो झीलें और इनके चारों ओर मिट्टी व पेबल से बना कच्चा परिपथ बनेगा, जिससे यहां आने वाला सारा जल भूमि में अवशोषित हो सके।
सूखाताल झील
सूखाताल झील - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

नैनीताल में मैदान बन चुके सूखाताल में बीते दिनों हुई अतिवृष्टि के बाद लबालब पानी भर गया है, जिससे यह बहुत आकर्षक नजर आ रहा है। इससे यह लग रहा है कि यहां जो सौंदर्यीकरण प्रस्तावित है उसके बजाय यदि इसे इसी प्राकृतिक रूप में विकसित किया जाता तो अच्छा होता।
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हालांकि प्रस्तावित किए गए मॉडल के बजाय अब इसे करीब इसी प्रकार विकसित करने की तैयारी है, जिससे इसके अधिकांश क्षेत्र में पानी रहेगा। अब इसके बीच में बनने वाले एक्टिविटी पार्क को न बनाने और उसकी जगह भी झील ही रखे जाने का निर्णय लिया गया है। इससे ऊपरी छोर पर बनने वाले पौंड के बजाय झील का क्षेत्र बढ़ जाएगा।


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ड्रोन से बने वीडियो में बहुत सुंदर नजर आई सूखाताल झील
वर्ष 1993 के बाद पहली बार सूखाताल लबालब नजर आ रहा है। कुमंविनि ने इसे इसी रूप में विकसित करने के उद्देश्य से ड्रोन से इसका वीडियो बनवाया, जिसमें इसका सौंदर्य निखर कर सामने आया है। निगम ने नैनीझील का भी ऐसा ही वीडियो बनवाया है।

सौंदर्यीकरण का काम किया जा रहा
करीब 26 करोड़ रुपये की लागत से सूखाताल का सौंदर्यीकरण किया जा रहा है, जिसके तहत यहां रिचार्ज वैल, 9145 वर्ग मीटर में प्राकृतिक झील का निर्माण, झील के चारों ओर पैदल पथ निर्माण, ओपन एयर थियेटर, चिल्ड्रन पार्क, सूचना केंद्र, वुडन स्ट्रक्चर में क्योस्क, ग्रेवियार्ड संरक्षण एवं लैंड स्केप कार्य किया जाना था।

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परियोजना से जुड़े कुमाऊं मंडल विकास निगम के प्रबंध निदेशक नरेंद्र भंडारी ने बताया कि सौंदर्यीकरण के कार्यों पर निगरानी रखने के लिए नगर के गणमान्य नागरिकों व पर्यावरण विशेषज्ञों और भूवैज्ञानिकों के सुझाव पर इसके पूर्व निर्धारित डिजाइन में परिवर्तन करते हुए यहां बनने वाली दो झीलों के बीच में प्रस्तावित एक्टिविटी पार्क के बजाय अब उस क्षेत्र को भी बड़ी वाली ऊपरी लेक में शामिल किया जा रहा है।

आईआईटी रुड़की ने तैयार किाय डिजाइन

इसका डिजाइन आईआईटी रुड़की से बन कर आ गया है। अब इस जगह पर सिर्फ दो झीलें और इनके चारों ओर मिट्टी व पेबल से बना कच्चा परिपथ बनेगा, जिससे यहां आने वाला सारा जल भूमि में अवशोषित हो सके। झील की सतह में सीमेंट या टाइल का प्रयोग नहीं किया जाएगा बल्कि बायो डिग्रेडेबल मिट्टी इस्तेमाल की जाएगी, ताकि पानी लंबे समय तक इसमें टिका रहे और धीरे धीरे भूमि में अवशोषित होकर नैनीझील को रिचार्ज भी करता रहे। सीमेंट केवल चारों ओर की दीवार के निर्माण में प्रयुक्त होगा।

निगम के महाप्रबंधक एपी वाजपेयी ने बताया कि नए डिजाइन में यह भी व्यवस्था है कि विशेष ट्रेंचलेस तकनीक से बड़ी झील का अतिरिक्त पानी नीचे की छोटी झील में जाता रहे। हाल की अतिवृष्टि जैसी विपदा में इससे भूमिगत रूप से अतिरिक्त जल की निकासी आसानी से की जा सके जिससे आसपास के भवनों को खतरा न हो।

दो मीटर की खुदाई से टली भारी आपदा
सूखाताल के सौंदर्यीकरण कार्यों के तहत भूगर्भ विशेषज्ञों की सलाह पर इसकी खुदाई कर मलबा हटाया जाना प्रस्तावित था। जीएम वाजपेयी ने बताया कि तमाम लोगों ने निर्माण कार्यों का मलबा यहां भर दिया था। इस स्थल की दो मीटर तक खुदाई करके यह मलबा हटा दिया है। यदि यह खुदाई न कि गई होती तो 1993 की अतिवृष्टि की तरह आसपास के भवनों की एक मंजिल पानी में डूब जाने से कोई बड़ा हादसा हो सकता था। अतिक्रमण भी खुदाई के दौरान हटा दिया गया जिससे झील का क्षेत्र और खुल गया है।
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