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मनीष सिसोदिया पर CBI की कार्रवाई: अनियमितता मिलने पर की गई जांच की सिफारिश, ऐसे मच रही थी ठेकों पर छूट की लूट

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vikas Kumar Updated Fri, 19 Aug 2022 10:24 PM IST
सार

आबकारी विभाग ने सक्षम प्राधिकरण से अनुमति के बगैर आठ नवंबर, 2021 को विदेशी शराब के रेट की गणना के लिए फॉमूर्ला बदल दिया। बीयर के प्रत्येक केस पर लगने वाले 50 रुपये के आयात पास शुल्क को भी हटा लिया गया।

मनीष सिसोदिया के घर पर सीबीआई की टीम
मनीष सिसोदिया के घर पर सीबीआई की टीम - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

दिल्ली के आबकारी मंत्री मनीष सिसोदिया पर सीबीआई टीम की चल रही कार्रवाई में ही शराब पर उठे सवालों के जवाब छुपे हैं। राजनीतिक दलों की तरफ से लगातार नई आबकारी नीति पर सवाल उठाए। आबकारी नियमों का उल्लंघन और लाइसेंस धारकों को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए जानबूझकर की गई गलतियों के संकेत मिलने के बाद इस मामले की सीबीआई जांच की सिफारिश की थी। नई आबकारी नीति पर लगातार उठते सवालों के बाद शुक्रवार सुबह से सीबीआई टीम की छापेमारी और पूछताछ में कई सवालों के जवाब बाहर आने बाकी हैं। इस पूरे प्रकरण में कुछ अहम बिंदुओं पर सवाल उठे जिनमें आबकारी मंत्री घिर गए हैं।



आबकारी मंत्री के निर्देश पर आबकारी विभाग ने एयरपोर्ट जोन के एल-1 के लिए बोली लगाने वाले को 30 करोड़ रुपये वापस करने का निर्णय लिया गया। हैरत की बात यह है कि बोलीदाता ने संबंधित से इसके लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) भी हासिल की थी।


इसे आबकारी अधिनियम के प्रावधानों के मुताबिक सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद ही बोलीदाता को लाइसेंस दिया जा सकता है। अगर शर्तें पूरी करने में असफल रहता है तो सुरक्षा राशि के मद में जमा राशि सरकार के खाते में जमा कर ली जाएगी। सरकारी खाते में जमा करने के बजाय सुरक्षा राशि बोलीदाता को वापस कर दी गई।

आबकारी विभाग ने सक्षम प्राधिकरण से अनुमति के बगैर आठ नवंबर, 2021 को विदेशी शराब के रेट की गणना के लिए फॉमूर्ला बदल दिया। बीयर के प्रत्येक केस पर लगने वाले 50 रुपये के आयात पास शुल्क को भी हटा लिया गया। इससे विक्रेताओं को कम कीमत पर विदेशी शराब और बीयर मिलने लगीं जबकि सरकार को राजस्व का नुकसान पहुंचा। 

तयशुदा वक्त पर लाइसेंस फीस, ब्याज और जुर्माना नहीं भरने वालों के खिलाफ पुख्ता सबूत ना होने पर कार्रवाई के बजाय आबकारी विभाग ने टेंडर के लिए तय प्रावधानों में ढील दी। 

दिल्ली सरकार ने दिल्ली के दूसरे व्यवसायियों की अनदेखी करते हुए शराब विक्रेताओं को लाभ पहुंचाने के लिए कोविड-19 महामारी के नाम पर 144 करोड़ रुपये से अधिक की लाइसेंस फीस को माफ कर दी। टेंडर दस्तावेजों में ऐसे किसी आधार पर शराब विक्रेताओं को लाइसेंस फीस में छूट या मुआवजा देने का कोई प्रावधान नहीं था। इससे सरकार को राजस्व का नुकसान का सामना करना पड़ा।

सरकार ने सभी पहलुओं पर मंथन या बगैर ठोस आधार पर प्रत्येक वार्ड में शराब में न्यूनतम दो दुकानें खोलने की शर्त को टेंडर में शामिल कर दिया। आबकारी विभाग ने संबंधित प्राधिकार की इजाजत के बगैर नियमों को ताक पर रखते हुए नॉन कनफर्मिंग वार्डों के बजाय कनफर्मिंग एरिया में दो से अधिक दुकानें खोलने की मंजूरी दे दी। 

शराब की बिक्री और सेवन को प्रोत्साहित करने पर पर पाबंदी के बावजूद दिल्ली सरकार ने सोशल मीडिया, बैनर, होर्डिंग लगातार शराब की बिक्री करने वाले लाइसेंसधारकों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की। लाइसेंस फीस में बढ़ोतरी के बगैर एल-7-जेड और एल-1 लाइसेंसधारकों को संचालन के लिए तय अवधि को दो बार बढ़ाकर 31 जुलाई तक कर दिया गया। इसके लिए उपराज्यपाल या कैबिनेट की मंजूरी नहीं ली गई। 
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