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सबसे बड़े सरकारी अस्पताल का हाल: 12वीं पास कर रहा था दिल की जांच, स्वास्थ्य विभाग की नाक के नीचे चल रहा था खेल

कैलाश गठवाल, अमर उजाला, फरीदाबाद Published by: Vikas Kumar Updated Sun, 06 Nov 2022 05:26 PM IST
सार

बादशाह खान अस्पताल हार्ट सेंटर में झज्जर की स्वास्थ्य विभाग टीम ने छापा मारा। पीएनडीटी के नोडल अधिकारी डॉ. शैलेन्द्र डोगरा और उनकी टीम ने हार्ट सेंटर में ईको जांच कर रहे कार्डियक टेक्नीशियन को मरीजों की ईको जांच करते धर दबोचा। 

बीके सिविल अस्पताल
बीके सिविल अस्पताल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

फरीदाबाद जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में लापरवाही बरती जा रही थी। बीके अस्पताल में 12वीं पास व्यक्ति मरीजों के दिल की धड़कनों की जांच कर रहा था। शुक्रवार को झज्जर की स्वास्थ विभाग की टीम ने छापा मारकर फर्जीवाड़े का खुलासा किया। घटना के बाद से सरकारी अस्पतालों में इलाज की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं। शुरुआती पूछताछ में सामने आया कि आरोपी दिनेश (51) ने मात्र 12वीं कक्षा तक पढ़ाई करने के बाद दिल्ली से कार्डियक टेक्नीशियन का दो साल का डिप्लोमा किया था। साल 2018 में यहां टेक्नीशियन पद पर भर्ती हुआ था। उसके बाद से लगातार सेवाएं दे रहा था, उससे पूछताछ जारी है। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर एक दिन की रिमांड पर लेकर पूछताछ शुरू कर दी है है।

बादशाह खान अस्पताल (बीके) में पीपीपी मोड पर चल रहे हार्ट सेंटर में शुक्रवार सुबह करीब नौ बजे झज्जर की स्वास्थ्य विभाग टीम ने छापा मारा। पीएनडीटी के नोडल अधिकारी डॉ. शैलेन्द्र डोगरा और उनकी टीम ने हार्ट सेंटर में ईको जांच कर रहे कार्डियक टेक्नीशियन को मरीजों की ईको जांच करते धर दबोचा। आरोपी जांच के बाद रिपोर्ट पर विशेषज्ञ डॉक्टरों के फर्जी हस्ताक्षर भी करता था। टीम ने सूचना के आधार पर जाल बिछाया और दो फर्जी ग्राहक जांच के लिए भेजे। इनमें एक चार माह की गर्भवती भी थी। दिनेश ने दोनों मरीजों की जांच के बाद विशेषज्ञ डॉक्टर के हस्ताक्षर कर दिए। टीम ने पुलिस बुलाकर आरोपी के खिलाफ पीएनडीटी एक्ट के तहत केस दर्ज कर लिया है।

कागजों मे तैनात हैं दो विशेषज्ञ डॉक्टर
टीम ने जब मामले की जांच की तो और भी खुलासे हुए। हार्ट सेंटर में ईको जांच करने के लिए दो विशेषज्ञ डॉक्टर की नियुक्ति की गई है। डॉ. गुंजन गर्ग व डॉ. ओमजीवन ईको जांच करने के लिए पीएनडीटी एक्ट के पंजीकृत हैं। फर्जी ग्राहकों की जांच के दौरान दोनों ही मौके पर मौजूद नहीं थे। प्रावधान के मुताबिक दोनों को सुबह नौ से शाम पांच बजे तक मरीजों की ईको जांच करनी होती है। मौके पर केवल कागजों में ही इनकी तैनाती मिली, जांच 12वीं पास व्यक्ति कर रहा था। वहीं डॉक्टर ओपीडी में सेवा दे रहे थे।

एक ही मशीन से हो जाती है दिल और गर्भ की जांच
महिला रोग विशेषज्ञ व आईएमए हरियाणा की प्रदेश अध्यक्ष डॉ. पुनीता हसीजा ने बताया एक ही ईको व गर्भ जांच के लिए अलग-अलग मशीन की जरूरत नहीं होती। एक ही मशीन से दोनों जांच की जा सकती हैं। इसमें अलग अलग प्रोब लगे हुए होते हैं। जांच करने वाला डॉक्टर यदि मशीन में फोटो लेता है या किसी जांच को सेव करता है तो मशीन में इसका बाद में भी पता लग जाता है। मशीन को कितनी बार ऑन-ऑफ किया गया यह जानकारी भी मशीन में सुरक्षित होती है।

स्वास्थ्य विभाग की नाक के नीचे होता रहा खेल
फरीदाबाद के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में इतना बड़ा फर्जीवाड़ा स्वास्थ विभाग की नाक के नीचे चलता रहा और अधिकारियों को इसकी भनक तक नहीं लगी। झज्जर की टीम शिकायत के बाद 15 दिनों से हार्ट सेंटर पर नजर बनाए हुए थी। पूरी तरह से पुख्ता होने के बाद ही टीम ने छापा मारकर कार्रवाई की गई। एसजीएम नगर थाना प्रभारी इंस्पेक्टर संदीप धनखड़ का कहना है कि आरोपी से पूछताछ की जा रही है। डॉक्टरों की मिलीभगत वाले एंगल की भी जांच हो रही है।
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