फेसबुक पेज बनाकर कर रहे थे किडनी ट्रांसप्लांट के नाम पर ठगी, दो गिरफ्तार

Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Wed, 27 Oct 2021 10:27 PM IST
Two arrested for cheating in the name of getting kidney transplant done by creating Facebook page
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नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने फेसबुक पर पेज बनाकर किडनी ट्रांसप्लांट करवाने के नाम पर ठगी करने वाले दो जालसाजों को गिरफ्तार किया है। दोनों ने मुंबई के सर्जन से ट्रांसप्लांट करानेे के नाम पर 10 लाख रुपये ठग लिए थे। गिरफ्तार आरोपी अलीगढ़ निवासी विपिन कुमार (21) और प्रतापगढ़ निवासी रोहित कुमार यादव (27) दिल्ली, हरियाणा, यूपी और हरियाणा में कई लोगों से धोखाधड़ी कर चुके हैं। फेसबुक चैट से पता लगा कि हाल ही में इन्होंने पांच लोगों से ठगी की है जबकि 50 से ज्यादा लोगों से किडनी ट्रांसप्लांट के लिए संपर्क में थे।
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संयुक्त पुलिस आयुक्त आलोक कुमार के मुताबिक डॉ. राजीव चंद्रा मुंबई में सर्जन हैं। बीमारी के कारण उन्हें किडनी ट्रांसप्लांट की सलाह दी गई थी। फेसबुक पर विज्ञापन देखकर उन्होंने करण से संपर्क किया। करण ने उन्हें मिलने के लिए दिल्ली बुलाया। वह 27 अगस्त को दिल्ली आ गए। दोनों के बीच 22 लाख में सौदा हुआ। यहां करण ने छह लाख रुपये एडवांस के तौर पर मांगे। डॉ. राजीव ने साढ़े तीन लाख रुपये देकर बाकी रकम बाद में देने की बात कही। सितंबर में उन्होंने एक लाख रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर किए। आरोपी करण ने 17 सितंबर को डॉ. राजीव को दक्षिण दिल्ली के एक नामी अस्पताल के पास बुलाया। यहां पर आरोपी ने डॉक्टर से पांच लाख रुपये ले लिए और डॉक्टर को अस्पताल के अंदर जाने को कहा। पैसे लेते ही आरोपी वहां से फरार हो गया।

वहीं डॉ. राजीव जब अस्पताल के अंदर गए तो पता लगा कि उनका अस्पताल में कोई अप्वाइंटमेंट नहीं था। डॉक्टर की शिकायत पर अपराध शाखा ने मामला दर्जकर जांच शुरू की। डॉ. राजीव ने दस लाख देने की शिकायत की है। जांच में पता लगा कि करण का असली नाम विपिन है। पुलिस ने उसे कानपुर से गिरफ्तार कर लिया। उसकी निशानदेही पर मंगलवार को दूसरे आरोपी रोहित कुमार यादव को प्रतापगढ़, यूपी से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस आरोपियों के फरार साथियों की तलाश में जुटी है।
लॉकडाउन में नौकरी जाने के बाद शुरू किया फर्जीवाड़ा
12वीं पास विपिन कुमार संगम विहार में अकाउंटेंट था। लॉकडाउन में उसकी नौकरी चली गई। उसी समय उसकी मुलाकात रोहित कुमार से हुई। रोहित भी बेरोजगार था। दोनों ने मिलकर एक फेसबुक आईडी बनाई। इसी आईडी पर फेसबुक पेज बनाकर उन्होंने किडनी के डोनर और मरीजों की जानकारी अपलोड की। साथ ही दोनों ने विजय पांडे के नाम से फर्जी फेसबुक पेज बनाया था और किडनी से संबंधित पोस्ट इस पर डालने लगे। इसके बाद लोग इनसे संपर्क करते थे। आरोपी लोगों से फेसबुक चैट पर संपर्क करते थे। उनकी ज्यादातर बातचीत चैट के माध्यम से ही होती थी।

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