विश्व हार्ट दिवस: मां से तीनों बच्चों में आई दिल की दुर्लभ बीमारी, जानें क्या है मार्फन सिंड्रोम

अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Tue, 28 Sep 2021 12:55 AM IST

सार

डॉक्टरों ने बताया कि मार्फन सिंड्रोम की जेनेटिक प्रकृति के कारण पीड़िता के दो भाइयों में भी इस बीमारी के लक्षण हैं और दोनों की उम्र 20 साल के आसपास है। इसलिए डॉक्टरों ने उनकी भी चिकित्सीय जांच करने की सलाह दी और जांच में पता चला कि पहले से ही हार्ट की समस्या विकसित हो चुकी है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
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विस्तार

विश्व हार्ट दिवस से पहले राजधानी में एक ऐसा परिवार सामने आया है जिसमें चार-चार लोगों को दिल की दुर्लभ बीमारी हुई है। करीब 15 साल पहले मां को जब यह बीमारी हुई तो उसे समय पर इलाज मिलने से बचा लिया लेकिन जब बच्चे बड़े हुए तो उन्हें भी दिक्कत होना शुरू हो गई।
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पहले 23 साल की लड़की को सीने में दर्द हुआ। अस्पताल लाने पर डॉक्टरों ने दुर्लभ बीमारी की पहचान कर ली। डॉक्टरों को शक हुआ तो उसके दोनों भाइयों की भी जांच की तो पता चला सभी में यह आनुवांशिक बीमारी फैल चुकी है। इसके बाद डॉक्टरों ने गेंद के आकार के ब्लड वेसल को बदल लड़की की जाच बचाई।

 
डॉक्टरों के अनुसार लड़की इन्हेरिटेड मारफान सिंड्रोम से पीड़ित थी जिसकी वजह से उसकी असेंडिग एओर्टा और एऑर्टिक डीसेक्शन (एओर्टा की दीवार का फटना) पतला हो गया था जो हार्ट से लेकर दाहिने पैर तक फैल गया था। मार्फन सिंड्रोम ने एओर्टा की बाहरी दीवार के ऊतक को पतला बना दिया। इसकी वजह से उसका असेंडिग एओर्टा 6.5 सेमी चौड़ा हो गया था। यह आकार सामान्य चौड़ाई से दोगुना था।

डॉक्टरों ने बताया कि मार्फन सिंड्रोम की जेनेटिक प्रकृति के कारण उसके दो भाइयों में भी इस बीमारी के लक्षण हैं और दोनों की उम्र 20 साल के आसपास है। इसलिए डॉक्टरों ने उनकी भी चिकित्सीय जांच करने की सलाह दी और जांच में पता चला कि पहले से ही हार्ट की समस्या विकसित हो चुकी है। चूंकि पीड़िता की मां को भी इसी तरह की हार्ट संबंधी समस्या थी और उन्होंने 15 साल पहले सर्जरी करवाई थी। इसलिए अब बच्चों में भी इस तरह की परेशानी देखने को मिली।

जानकारी के अनुसार द्वारका स्थित आकाश अस्पताल में 23 वर्षीय महिला को सीने में दर्द के चलते भर्ती कराया गया। यहां डॉक्टरों ने मार्फन सिंड्रोम की पुष्टि की, जिसे एक दुर्लभ जेनेटिक डिसआर्डर कहा जाता है। यह आंख, दिल, ब्लड वेसल और हड्डियों को प्रभावित करता है। डॉ. अभय कुमार ने कहा कि सर्जरी के दौरान पीड़िता के शरीर के बाहर ब्लड को पंप और ऑक्सीजन युक्त करने के लिए एक एक्स्ट्राकोर्पोरियल मेम्ब्रेन ऑक्सीजनेशन (ईसीएमओ) का उपयोग किया गया था।

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