दिल्ली: सास को जहर देकर हत्या के प्रयास के आरोप में महिला और उसके रिश्तेदारों पर एफआईआर दर्ज करने का निर्देश 

अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: सुशील कुमार कुमार Updated Tue, 19 Oct 2021 05:56 PM IST

सार

शिकायतकर्ता ने दावा किया कि कॉफी पीने के बाद उसकी तबीयत खराब हो गई और उसे अस्पताल ले जाया गया। रीता गुप्ता ने आरोप लगाया कि संपत्ति की मांग के दावे को लेकर यह खतरनाक कृत्य किया गया।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार

अदालत ने दिल्ली पुलिस को एक महिला और उसके रिश्तेदारों के खिलाफ जहर देकर उसकी सास की हत्या के प्रयास के आरोप में एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया है।
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शिकायतकर्ता रीता गुप्ता ने आरोप लगाया कि उसकी बहू स्वाती गुप्ता ने अपने परिजनों की मिलीभगत से 25 सितंबर को कॉफी तैयार करते हुए दूध में जहर मिला दिया। शिकायतकर्ता ने दावा किया कि कॉफी पीने के बाद उसकी तबीयत खराब हो गई और उसे अस्पताल ले जाया गया। रीता गुप्ता ने आरोप लगाया कि संपत्ति की मांग के दावे को लेकर यह खतरनाक कृत्य किया गया। जांच अधिकारी ने पेश रिपोर्ट में अदालत को बताया कि सीसीटीवी फुटेज के आधार पर बची हुई कॉफी और कप को जब्त कर जांच के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) भेजा गया है।


कॉफी में मिलाया था जहर
मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट अजय सिंह परिहार ने कहा कि यह संज्ञेय अपराध है और कथित तौर पर उसे जहर देने के लिए इस्तेमाल की गई बची हुई कॉफी की फोरेंसिक रिपोर्ट का लंबित होना पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज न करने का आधार नहीं है। रीता गुप्ता के अधिवक्ता अमित साहनी ने आरोप लगाया कि उनकी मुवक्किला की बहू ने परिवार पर उनके नाम पर संपत्ति हस्तांतरित करने का दबाव बनाया व विरोध करने पर यह खतरनाक कृत्य शुरू हो गया। 

मामला दर्ज करने के लिए एक शर्त मिसाल नही
उन्होंने कहा इस संबंध में मंगोलपुरी थानाध्यक्ष, पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) और पुलिस आयुक्त को शिकायत की गई, लेकिन प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई। उन्होंने कहा पुलिस अधिकारी संज्ञेय अपराध का खुलासा होने पर मामला दर्ज करने के लिए कर्तव्यबद्ध है और सूचना की वास्तविकता या विश्वसनीयता मामला दर्ज करने के लिए एक शर्त मिसाल नहीं है।

गर्भपात कराने के लिए किया था मजबूर
इससे पहले स्वाती गुप्ता ने भी शिकायत दर्ज कराई थी कि 2017 में उसके पति और उसके परिजनों ने उसे जबरन गर्भपात कराने के लिए मजबूर किया था। 9 अक्टूबर को अदालत ने उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें पुलिस को बहू की शिकायत पर एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया गया। अदातल ने कहा उसके द्वारा घटना के संबंध में कोई दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए थे।

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