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DPS Controversy: क्यों निलंबित हुई डीपीएस रोहिणी की मान्यता और बच्चों पर क्या होगा असर? यहां जानें पूरा मामला

एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: देवेश शर्मा Updated Wed, 07 Dec 2022 10:41 AM IST
सार

DPS Rohini Controversy: हाल ही में DPS शृंखला का एक स्कूल डीपीएस, रोहिणी विवादों में आ गया। स्कूल पर अधिक फीस वसूलने और पात्र छात्रों को नियमानुसार छूट न देने के मामले में कार्रवाई करते हुए उसकी मान्यता निलंबित कर दी गई है। तो आइए जानते हैं कि क्या है पूरा मामला और क्या है स्कूल के पास विकल्प और इस मामले से छात्रों के भविष्य पर क्या असर पड़ेगा? 

DPS Rohini Controversy
DPS Rohini Controversy - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

DPS Rohini Controversy: डीपीएस यानी दिल्ली पब्लिक स्कूल (DPS) को देश भर में सबसे प्रतिष्ठित स्कूल शृंखला में से अहम माना जाता है। लेकिन हाल ही में इस शृंखला का एक स्कूल डीपीएस, रोहिणी विवादों में आ गया। स्कूल पर अधिक फीस वसूलने और पात्र छात्रों को नियमानुसार छूट न देने के मामले में कार्रवाई करते हुए उसकी मान्यता निलंबित कर दी गई है। ऐसे में स्कूल में पढ़ रहे विद्यार्थियों के भविष्य को लेकर अभिभावकों और माता-पिता के मन में चिंता और जिज्ञासाएं उठना लाजिमी है। तो आइए जानते हैं कि क्या है पूरा मामला और क्या है स्कूल के पास विकल्प और इस मामले से छात्रों के भविष्य पर क्या असर पड़ेगा? 

फीस बढ़ोतरी संबंधी आदेश का उल्लंघन किया

दरअसल, दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय (DOE) ने नियमों का उल्लंघन कर 2021-22 शैक्षणिक सत्र के दौरान फीस बढ़ाने के लिए डीपीएस रोहिणी की मान्यता निलंबित कर दी है। मंगलवार को जारी एक आदेश में, डीओई ने कहा कि स्कूल अधिकारी 2021-22 के दौरान बढ़ी हुई फीस वसूल कर विभाग के साथ-साथ उच्च न्यायालय द्वारा जारी निर्देशों का पालन नहीं कर रहे थे और सत्र 2020-21 के लिए फीस हाइक संबंधी विभिन्न अदालती आदेश का उल्लंघन कर रहे थे। 

 

डीडीए द्वारा आवंटित भूमि पर बना है स्कूल

दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय (DOE) का कहना है कि दिल्ली पब्लिक स्कूल रोहिणी में डीडीए यानी दिल्ली विकास प्राधिकरण द्वारा आवंटित भूमि पर स्थित है। भूमि आवंटन मानदंडों के अनुसार, स्कूल को किसी भी प्रकार से शुल्क वृद्धि से पहले संबंधित शिक्षा निदेशक या निदेशालय से पूर्व में अनुमति या स्वीकृति लेनी होती। डीपीएस, रोहिणी के मामले में ऐसा नहीं किया गया। 

 

फीस संबंधी शिकायतें थीं और निर्देशों का पालन नहीं किया

स्कूल के खिलाफ बढ़ी हुई फीस जमा करने और वार्षिक स्कूल फीस पर 15 फीसदी की कटौती नहीं करने की शिकायतें थीं। आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि डीओई ने स्कूल को शैक्षणिक सत्र 2018-19 और 2019-20 के लिए कोई शुल्क नहीं बढ़ाने और बढ़ी हुई फीस को वापस लेने और 2015-16 में जमा की गई फीस संरचना के ऊपर ली गई राशि को वापस करने या समायोजित करने का निर्देश दिया था। हालांकि, इन निर्देशों पर स्कूल की प्रतिक्रिया संतोषजनक नहीं थी।
 

दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम की अवहेलना की गई

शिक्षा निदेशालय (DOE) ने कहा कि ऐसा लगता है स्कूल प्रबंधन मुनाफाखोरी में लिप्त है। वह अनुचित शुल्क वसूल कर शिक्षा का व्यावसायीकरण और अभिभावकों का शोषण कर रहे हैं। इसके अलावा, सात नवंबर, 2022 को स्कूल परिसर का निरीक्षण करने गए आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल को प्रासंगिक दस्तावेज और रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराकर दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम, 1973 के नियम 50 (xvii) और 50 (xix) का उल्लंघन किया गया है। 

 

मौजूदा छात्रों पर मामले का क्या होगा असर?

सीबीएसई एडुकेटर और स्कूल शिक्षा नीति के जानकार पंकज खंडेलवाल के अनुसार, इस मामले में स्कूल में पढ़ रहे वर्तमान छात्रों के भविष्य पर कोई प्रभाव नहीं पड़ने वाला। क्योंकि, मान्यता निलंबित करने का फैसला मौजूदा सत्र के लिए नहीं हुआ है। यह आदेश स्कूल को अगले शैक्षणिक सत्र यानी 2023-24 के लिए नए दाखिले लेने से रोकता है। 

 

स्कूल के पास क्या हैं विकल्प?

स्कूल के पास सबसे आसान विकल्प है कि वह सरकार की ओर से निर्धारित नियमों, दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम, 1973 और विभिन्न अदालतों द्वारा समय-समय पर जारी दिशा-निर्देशों की पालना सुनिश्चित करे। इसके अलावा वर्तमान मामले का पूरा निपटान भी करना होगा। इसमें स्कूल को निरीक्षण दल द्वारा मांगे गए प्रासंगिक दस्तावेज उपलब्ध कराने होंगे। फीस बढ़ाकर की गई अतिरिक्त वसूली की राशि लौटानी होगी या आगे समायोजित करनी होगी। इसके अलावा पात्र छात्रों को नियमानुसार, 15 फीसदी की छूट भी देनी होगी। 

 

अगर मान्यता रद्द हुई तो आगे क्या होगा?

वैसे तो स्कूल नियमों का अनुसरण करने के लिए सहमत हो ही जाएगा। यदि फिर किसी कारणवश ऐसा नहीं हो पाता है और मान्यता निलंबित रहती है या रद्द भी हो जाती है तो फिर स्कूल प्रबंधन को अपने कर्मचारियों को दिल्ली पब्लिक स्कूल सोसाइटी के अधीन अन्य स्कूलों में समायोजित करना होगा। वहीं, छात्रों के मामले में परिजनों की सहमति के आधार पर ही किसी अन्य नजदीकी स्कूल में पंजीकृत करने का प्रावधान है। 
 
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