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Medical Education: यूक्रेन और चीन से लौटे छात्रों पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र-एनएमसी को दिया अहम निर्देश, पढ़ें

एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: देवेश शर्मा Updated Fri, 09 Dec 2022 07:18 PM IST
सार

Medical Education: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केंद्र और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) को उन अंडर ग्रेजुएट मेडिकल छात्रों को समायोजित करने के लिए एक समाधान खोजने का निर्देश दिया, जो यूक्रेन और चीन जैसे देशों से लौटे थे।

सुप्रीम कोर्ट।
सुप्रीम कोर्ट। - फोटो : ANI
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विस्तार

Supreme Court on Ukraine China Returned Medical Students: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केंद्र और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) को उन अंडर ग्रेजुएट मेडिकल छात्रों को समायोजित करने के लिए एक समाधान खोजने का निर्देश दिया, जो यूक्रेन और चीन जैसे देशों से लौटे थे। शीर्ष अदालत का कहना है कि इस क्रम में अगर कोई समाधान नहीं हुआ तो उनका करिअर अधर में रह जाएगा। जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस विक्रम नाथ की पीठ ने कहा कि यदि आवश्यक हो तो केंद्र छात्रों की समस्या का समाधान खोजने के लिए विशेषज्ञों की एक समिति नियुक्त कर सकता है।


शीर्ष अदालत ने कहा कि उसे उम्मीद है कि केंद्र उसके सुझाव को उचित महत्व देगा और छात्रों के करिअर को बचाने के लिए एक समाधान खोजेगा। यह छात्र देश की संपत्ति हैं। यदि कोई समाधान नहीं निकलता है, तो उनका पूरा करिअर अधर में रह सकता है, इसके अलावा परिवारों के लिए परेशानी और संकट का कारण बन सकता है। हम पाते हैं कि प्रशिक्षण के लिए विशेषज्ञों द्वारा समाधान के लिए यह एक उपयुक्त मामला है। हम निर्देश जारी करने से बच रहे हैं। लेकिन हम भारत सरकार को नेशनल मेडिकल कमीशन के परामर्श से इस मानवीय समस्या का समाधान निकालने का अनुरोध करते हैं।

वहीं, केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि चिकित्सा पाठ्यक्रम में व्यावहारिक प्रशिक्षण का अत्यधिक महत्व है। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक अध्ययन व्यावहारिक प्रशिक्षण का स्थान नहीं ले सकता है और कहा कि देश के संस्थानों में छात्रों को शामिल नहीं करने का निर्णय स्वास्थ्य, गृह और विदेश मंत्रालय से परामर्श के बाद लिया गया है। 

इस पर शीर्ष अदालत ने कहा कि उनका यह कहना उचित है कि अदालत के पास विशेषज्ञता नहीं है। हालांकि, ऐसी कईं परिस्थितियां हैं जो नियंत्रण से परे हैं जैसे कोविड और युद्ध हैं। जिनके कारण लगभग 500 छात्रों का करिअर, जो पहले ही पांच साल की पढ़ाई कर चुके हैं, दांव पर लग गया है। उन्होंने सात सेमेस्टर शारीरिक रूप से और तीन सेमेस्टर ऑनलाइन के माध्यम से पूरे किए हैं। छात्रों के माता-पिता ने अध्ययन में बड़ी राशि खर्च की होगी और अगर कोई समाधान नहीं मिला, तो उनका पूरा करिअर अधर में छोड़ दिया जा सकता है। 

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