गोरखपुर पुलिस की बेरहमी: कानपुर के रियल इस्टेट कारोबारी की पुलिस की पिटाई से मौत, हत्या का केस दर्ज

अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Wed, 29 Sep 2021 11:04 AM IST

सार

निलंबित इंस्पेक्टर जगतनारायण सिंह, चौकी इंचार्ज अक्षय मिश्रा और विजय यादव नामजद, तीन अन्य पर भी मुकदमा दर्ज हुआ है। घटना को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दुख जताया और पीड़ित परिवार को दस लाख रुपये की मदद का एलान किया।
 
मृतक व्यापारी।
मृतक व्यापारी। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार

गुरुग्राम से दो दोस्तों के साथ गोरखपुर घूमने आए कानपुर के रियल इस्टेट कारोबारी मनीष गुप्ता (36) की सोमवार देर रात पुलिस की पिटाई से मौत हो गई। आरोप है कि जांच का विरोध करने पर पुलिस कर्मियों ने उनकी बेरहमी से पिटाई की थी। उनके दोस्तों को भी पीटा था। हालत खराब होने के बाद पुलिस मनीष को लेकर एक निजी अस्पताल गई थी, जहां से उन्हें रेफर कर दिया गया था। इसके बाद पुलिस ने उन्हें मेडिकल कॉलेज एंबुलेंस से अकेले ही भेज दिया था, जहां डॉक्टरों ने मनीष को मृत घोषित कर दिया। देर रात ही पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया था।
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उधर, मंगलवार पूरे दिन और देर रात तक काफी किंतु-परंतु के बाद पुलिस ने मामले में रामगढ़ताल थाने में हत्या का मुकदमा दर्ज किया। इस मामले में निलंबित इंस्पेक्टर जगतनारायण सिंह, चौकी इंचार्ज अक्षय मिश्रा और विजय यादव को नामजद किया गया है। तीन अन्य को भी आरोपी बनाया गया है। वहीं, इस घटना पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गहरा दुख जताया है। साथ ही पीड़ित परिवार को दस लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने का एलान किया है।

इससे पहले, मंगलवार दोपहर में एसएसपी डॉ. विपिन ताडा ने घटना में लापरवाही बरतने की बात कहते हुए इंस्पेक्टर जगत नरायन सिंह और चौकी प्रभारी फलमंडी अक्षय मिश्रा सहित छह पुलिस कर्मियों को निलंबित कर दिया था। साथ ही मामले की जांच एसपी नार्थ को सौंपी थी। एसएसपी का कहना था कि जांच रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

हालांकि पुलिस पूरे दिन मनीष और उनके दोस्तों की पिटाई से इनकार करती रही। उसका कहना था कि जांच के दौरान लड़खड़ाकर गिरने से मनीष को चोट लगी, जिससे उनकी मौत हो गई, लेकिन मनीष की पत्नी मीनाक्षी इसे हादसा मानने को तैयार नहीं थीं। हादसे की खबर पाकर गोरखपुर पहुंचीं मीनाक्षी ने आरोप लगाया कि होटल के कमरे में जांच करने पहुंचे पुलिसकर्मियों ने मनीष की बेरहमी से पिटाई की थी, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं थीं। इसी वजह से उनकी मौत हो गई। यह हत्या है और पुलिस कर्मियों पर हत्या का केस दर्ज किया जाना चाहिए। बाद में उन्होंने केस दर्ज करने के लिए तहरीर दी थी। इसके बाद भी जब पुलिस ने केस दर्ज नहीं किया तो वह परिजनों के साथ धरने पर बैठ गईं और शव ले जाने से इनकार कर दिया। इसके बाद जाकर पुलिस ने मामले में तीन पुलिस कर्मियों को नामजद करते हुए हत्या का केस दर्ज किया।
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