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Gorakhpur: निसंतान महिलाओं की गोद भरेगी उत्तर चिकित्सा पद्धति, विश्वविद्यालय में चलेगी 10 विभागों की OPD

अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sat, 03 Dec 2022 11:51 AM IST
सार

महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. अवधेश कुमार सिंह ने बताया कि उत्तर बस्ति चिकित्सा पद्धति काफी पुरानी है। इस पद्धति से नि:संतान महिलाओं का इलाज किया जाता रहा है जो अब तक काफी सफल साबित हुआ है।

गर्भवती महिला
गर्भवती महिला - फोटो : shutterstock
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विस्तार

बार-बार गर्भपात, बांझपन और ट्यूब ब्लॉकेज की समस्या से परेशान महिलाओं की गोद उत्तर बस्ति चिकित्सा पद्धति से भरेगी। इस पद्धति से इलाज की शुरुआत पहले चरण में महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुर्वेद विश्वविद्यालय से होगी। इसके बाद आयुर्वेद विभाग इसकी शुरुआत करेगा। इस पद्धति से इलाज में आईवीएफ की तुलना में मरीजों को काफी कम रुपये खर्च करने होंगे।



महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. अवधेश कुमार सिंह ने बताया कि उत्तर बस्ति चिकित्सा पद्धति काफी पुरानी है। इस पद्धति से नि:संतान महिलाओं का इलाज किया जाता रहा है जो अब तक काफी सफल साबित हुआ है। आयुर्वेद विश्वविद्यालय में इस पद्धति से इलाज की शुरुआत जल्द ही की जाएगी। इस पद्धति में औषधीय तेल और घी का इस्तेमाल किया जाता है। ये दोनों तत्व गर्भाशय में कैथेडर के जरिए डाले जाते हैं। ये दोनों तत्व मूत्र संबंधी विकारों के लिए एक जरूरी पंचकर्म हैं। इस प्रक्रिया में करीब 30 से 40 मिनट का वक्त लगता है।


इस विधि से उपचार महिला के माहवारी शुरू होने के चार से पांच दिन बाद होता है। उपचार पूर्ण होने में दो से तीन माह का समय लगता है। पूरी प्रक्रिया के दौरान मरीजों को यह सलाह दी जाती है कि वह हल्के आहार का सेवन करें। क्योंकि, औषधीय तेल और घी गर्म तासीर का होता है, जो शरीर को गर्मी देता है। इससे महिलाओं की जननांग संबंधी कई बीमारियां भी ठीक हो जाती हैं।

 

आईवीएफ तकनीक से काफी सस्ता है यह उपचार

जिला आयुर्वेद एवं यूनानी अधिकारी डॉ. प्रभाशंकर मल्ल ने बताया कि भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव की वजह से महिलाएं मां नहीं बन पाती हैं। ऐसी स्थिति में उत्तर बस्ति चिकित्सा पद्धति निसंतान महिलाओं के लिए एक वरदान है। इस पद्धति में इलाज काफी सस्ता है। जबकि, आईवीएफ में इलाज काफी महंगा है। आईवीएफ तकनीक में करीब दो से तीन लाख रुपये का खर्च आता है। इसमें 40 से 50 हजार रुपये का खर्च है। बताया कि आयुर्वेद कॉलेज में जल्द ही इस पद्धति से निसंतान महिलाओं का इलाज शुरू किया जाएगा। लाल डिग्गी के पास 50 बेड का अस्पताल बनाया जा रहा है। इसमें मरीजों को भर्ती करने की भी सुविधा होगी।

नए साल से चलेगी आयुर्वेद विश्वविद्यालय में ओपीडी
आयुर्वेद विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार आरबी सिंह ने बताया कि भटहट के पिपरी में बन रहे आयुर्वेद विश्वविद्यालय में दिसंबर माह से ही ओपीडी शुरू होनी थी, लेकिन काम कर रही संस्था ने अब तक एफिलेशन सेंटर का निर्माण पूरा नहीं किया है। उम्मीद जताई है कि दिसंबर माह में निर्माण पूरा कर विश्वविद्यालय को एफिलेशन सेंटर का भवन हैंड ओवर कर दिया जाएगा। इसके बाद नए साल से आयुर्वेद विश्वविद्यालय में 10 विभागों की ओपीडी शुरू की जाएगी। इसमें आठ आयुर्वेद, एक होम्योपैथी और एक यूनानी विभाग की ओपीडी चलेगी। इसके अलावा नए साल से ही पंचकर्म और नेचुरोपैथी विभाग भी शुरू होगा। पंचकर्म में पांच तरीकों से गंभीर रोगों का इलाज किया जाएगा।
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