Gorakhpur University: गोरखपुर विश्वविद्यालय से अब कर सकेंगे पार्ट टाइम पीएचडी, डिग्री कॉलेजों के स्नातक शिक्षक भी करा सकेंगे शोध

अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Mon, 27 Sep 2021 06:02 PM IST

सार

विश्वविद्यालय प्रशासन से मिली जानकारी के मुताबिक रिसर्च डिग्री कमेटी (आरडीसी) ने शोध अध्यादेश में संशोधन के लिए अपना प्रस्ताव रखा था। इसपर विद्या परिषद की मुहर लग गई है।
गोरखपुर विश्वविद्यालय:
गोरखपुर विश्वविद्यालय: - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय व संबद्ध महाविद्यालयों से पार्ट टाइम पीएचडी भी की जा सकेगी। इसपर विद्या परिषद ने शनिवार को अपनी मुहर लगा दी है। पार्ट टाइम पीएचडी की पढ़ाई का मामला सोमवार को कार्य परिषद के समक्ष रखा जाएगा। इसमें भी मंजूरी मिलने की उम्मीद है। दूसरी तरफ विश्वविद्यालय से संबद्ध डिग्री कॉलेजों के स्नातक शिक्षकों को बड़ा तोहफा मिला है। अब शिक्षक सुपरवाइजर बनकर शोध करा सकेंगे।
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विश्वविद्यालय प्रशासन से मिली जानकारी के मुताबिक रिसर्च डिग्री कमेटी (आरडीसी) ने शोध अध्यादेश में संशोधन के लिए अपना प्रस्ताव रखा था। इसपर विद्या परिषद की मुहर लग गई है। पार्ट टाइम पीएचडी के लिए अधिकतम आठ वर्ष की समयसीमा तय की गई है। न्यूनतम समयसीमा चार वर्ष है। पीएचडी के कोर्स वर्क के लिए अभ्यर्थी को अवकाश मिलेगा लेकिन पार्ट टाइम पीएचडी के शोधार्थी को स्कॉलरशिप नहीं मिलेगी। पार्ट टाइम पीएचडी के अभ्यर्थी को अपनी संस्था के एचओडी से नान ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (एनओसी) लेना होगा।


पीएचडी की चार सीटें आरक्षित
गोरखपुर विश्वविद्यालय और संबद्ध डिग्री के शिक्षक, अधिकारी व कर्मचारियों के पाल्यों के लिए पीएचडी की चार सीटें आरक्षित रहेंगी। इसमें से दो सीट सामान्य, एक ओबीसी और एक एससी के लिए आरक्षित रहेगी।

विश्वविद्यालय से परास्नातक तो दो फीसदी वेटेज
गोरखपुर विश्वविद्यालय से परास्नातक की पढ़ाई पूरी करने वाले अभ्यर्थियों को पीएचडी में प्रवेश पर दो फीसदी वेटेज दिया जाएगा। ऐसा पहली बार होगा। इसी तरह नेशनल एलिजिबिलिटी टेस्ट (नेट), ग्रेजुएट एप्टीट्यूड टेस्ट इन इंजीनियरिंग (गेट),  स्टेट लेवल एंट्रेंस टेस्ट (स्लेट) में सफल अभ्यर्थियों को पांच फीसदी का वेटेज मिलेगा।
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