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बुध का तुला राशि गोचर, जानें क्या होगा आपके जीवन पर प्रभाव
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क्लैट 2019 : सोशल मीडिया से दूरी बनाकर की तैयारी, पाई 26वीं रैंक, दिए कारगर टिप्स

क्लैट में ऑल इंडिया 26वीं रैंक हासिल करने वाली अदिति सेठ ने सोशल मीडिया से दूरी बनाकर तैयारी की।

16 जून 2019

Digital Edition

गुजरात: जूनागढ़ जिले में सेना के जवान को पुलिसकर्मियों ने डंडे से पीटा, दो पुलिस जवान सस्पेंड

गुजरात के जूनागढ़ जिले में सेना के एक जवान को पुलिसकर्मियों द्वारा पीटे जाने का मामला सामने आया है। इस मामले का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

वीडियों में दो पुलिसकर्मियों ने एक आर्मी जवान को डंडे से बुरी तरह से पीटा गया है। इस मामले का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद सख्त कार्रवाई की गई है। इसके तहत घटना में शामिल दो पुलिस जवानों को सस्पेंड किया गया है।

अधिकारियों ने इस बात की जानकारी दी। जिन दो पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की गई है उनके नाम राजेश बांधिया और चेतन मकवाना बताए गए हैं। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक जूनागढ़ एसपी रवि तेजा वसमसेट्टी के आदेश पर इन्हें बांटवा पुलिस थाने से अटैच कर दिया गया है। 

29 अगस्त की रात का है मामला
सोशल मीडिया पर जो वीडियो है वह 29 अगस्त की रात का है। यह मनावदार तालुका के पदर्दी गांव बताया जा रहा है। वीडियो में दिख रहा है कि दो पुलिसवाले सेना के एक जवान को बुरी तरह से मार रहे हैं।

अधिकारियों ने सेना के जवान का नाम कान्हाभाई केशवाला बताया है। वह कुछ ही दिन पहले छुट्टी पर अपने गांव आया था। दोनों पुलिसकर्मी सेना के इस जवान को अन्य पुलिसकर्मियों और गांववालों की मौजूदगी में डंडे से पीट रहे हैं। साथ ही उनके ऊपर घूंसे भी बरसाए जा रहे हैं। 
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गुजरात में धर्मांतरण: दुबई, यूएई व यूके से आता था पैसा, आरोपी ने पांच साल में बनवाईं 103 मस्जिद

गुजरात में धर्मांतरण का रैकेट चलाने के मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पूछताछ में पता चला है कि धर्मांतरण के लिए दोनों आरोपियों ने हवाला के जरिए 60 करोड़ रुपये जुटाए थे। इसमें से 19 करोड़ रुपए यूके, यूएई, यूएस से दुबई के रास्ते आए थे। वडोदरा पुलिस कमिश्नर शमशेर सिंह ने बताया कि इन पैसों से धर्मांतरण के साथ-साथ पांच राज्यों में 103 मस्जिदों का निर्माण भी कराया गया है। 

सरकार विरोधी प्रदर्शन के लिए भी होती थी फंडिंग 
गिरफ्तार किए गए आरोपी जम्मू-कश्मीर से हैं। पुलिस का कहना है कि सरकार के विरोध में प्रदर्शन करने के लिए भी हवाला फंड का इस्तेमाल होता था। इसके लिए भी करोड़ों रुपये चंदे के रूप में दुबई के रास्ते भारत पहुंचते थे। 

संसोधन पर हाईकोर्ट की ना 
इससे पहले गुजरात हाईकोर्ट ने नए धर्मांतरण रोधी कानून की धारा पांच पर लगी रोक को हटाने से जुड़ी राज्य सरकार की याचिका को खारिज कर दिया था। धर्म की आजादी (संशोधन) बिल 2021 की धारा पांच के तहत किसी भी व्यक्ति को धर्म से दूसरे धर्म में परिवर्तित करने के लिए धार्मिक पुजारियों को जिला मजिस्ट्रेट से अनुमति लेनी होगी। इसके अलावा जिन्होंने धर्म परिवर्तन कर लिया है, उन्हें भी एक निर्धारित प्रपत्र में जिला मजिस्ट्रेट को इसकी सुचना देनी होगी। 

जबरन धर्म परिवर्तन पर 5 साल तक की सजा
गुजरात में यह नया कानून 15 जून को अस्तित्व में आया था। इसके तहत पांच साल की सजा और अधिकतम 5 लाख रुपए के जुर्माने का प्रावधान है। इसे धार्मिक स्वतंत्रता एक्ट, 2003 में संशोधन करके लाया गया था। सरकार ने इस अधिनियम में पीड़िता के नाबालिग होने पर 7 साल तक की कैद और 3 लाख रुपए तक का जुर्माने का प्रावधान किया है। इसके साथ ही अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों के लिए भी कम से कम 7 साल की सजा का प्रावधान है।
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काबुल से वापसी: उम्मीद ही नहीं थी कि जिंदा बचेंगे, पति का हो गया था एयरपोर्ट पर अपहरण 

पिछले 15 सालों से काबुल में रह रहे शिवांग दवे और उनकी पत्नी सकुशल भारत लौट आए हैं। वह अफगानिस्तान की एक प्राइवेट कंपनी में इंजीनियर थे। भारत लौटने के बाद उन्होंने अपने अनुभवों को मीडिया से साझा किया। शिवांग ने बताया कि उन्होंने अपनी जिंदगी में ऐसा डर का माहौल कभी नहीं देखा। 
वह आगे कहते हैं कि अफगानिस्तान पर तालिबान का कब्जा होने के बाद हमें यह नहीं पता था कि आगे क्या होने वाला है। हमारे पास पैसे नहीं थे। न कोई नौकरी बची थी, ऐसे में सिर्फ एक ही डर था कि आने वाला पल हमारे लिए क्या लेकर आएगा। 

गुजरात के प्रसिद्ध कवि के पोते हैं शिवांग 
शिवांग, गुजरात के प्रसिद्ध कवि हरिंद्र दवे के बड़े बेटे रोहितभाई दवे के पुत्र हैं। रविवार को भारत पहुंचने के बाद भावनगर स्थिति अपने घर पहुंच चुके हैं। वह बताते हैं कि हमारी आंखो के सामने बहुत कुछ हो रहा था। तालिबान के आने के बाद सड़कें बंद कर दी गई थीं, कई जगह पर जाम लग चुका था। ऐसे में हमें नहीं पता था कि हम काबुल एयरपोर्ट तक कैसे पहुंचेंगे। 

काबुल एयरपोर्ट पहुंचने पर पति का हुआ अपहरण 
शिवांग की पत्नी बताती हैं कि हम जैसे-तैसे काबुल पहुंचे थे कि मेरे पति को तालिबानियों ने पकड़ लिया। मैं बहुत डर गई थी। उम्मीद ही नहीं बची थी कि हम जिंदा बचेंगे और भारत वापस जा पाएंगे। 

भारत पहुंचने के बाद ली राहत की सांस 
शिवांग बताते हैं कि उनसे 40-50 मीटर की दूरी पर तालिबानी लोगों को मार रहे थे। हमने भी उम्मीद छोड़ दी थी, लेकिन सौभाग्यवश भारतीय और अमेरिकन दूतावासों ने हमारी मदद की और हमें बाहर निकाला। जबतक विमान भारत में उतर नहीं गया तबतक हमारी सांसे अटकी ही रहीं। 

अब तक 800 लोग पहुंचे भारत
तालिबान के कब्जे के बाद अफगानिस्तान से अपने लोगों को निकालने के लिए भारत सरकार लगातार प्रयास कर रही है। जानकारी के मुताबिक अबतक अफगानिस्तान से 800 लोगों को सुरक्षित भारत लाया गया है। 
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गुजरात: शादी के बाद जरबन धर्मांतरण के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचा बेटी का पिता, पुलिस ने नहीं दर्ज की थी एफआईआर

बेटी की शादी के बाद उसका जबरन धर्मांतरण कराए जाने के खिलाफ एक पिता ने गुजरात हाईकोर्ट में गुहार लगाई है। पिता का आरोप है कि पुलिस ने उसकी शिकायत पर एफआईआर दर्ज नहीं की और तीन महीने तक टहलाती रही। इसके बाद पीड़ित पिता ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। जिस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने इस मामले में और जानकारियां तलब की हैं। 

क्या है मामला 
याचिकाकर्ता मोहम्मद सईद का कहना है कि उनकी बेटी 16 जून को लापता हो गई थी। बाद में पता चला कि उसने एक युवक ने शादी कर ली थी। लेकिन बाद में उसका जबरन हिंदू धर्म में धर्मातंरण कराया गया। जबकि, यह हाल ही में धर्मांतरण को लेकर कानून में हुए संशोधन का उल्लंघन है। मोहम्मद सईद का कहना है उन्होंने इसके खिलाफ 24 जून 2021 को आनंद जिला पुलिस के समक्ष शिकायत दी थी, लेकिन उनकी एफआईआर अबतक नहीं दर्ज की गई है। 

27 अक्टूबर को हाईकोर्ट करेगा सुनवाई
हाईकोर्ट ने इस मामले में सुनवाई करते हुए इसकी जांच के आदेश दिए हैं। वहीं इसकी अलगी सुनवाई 27 अक्टूबर को होगी। 
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गुजरात हाईकोर्ट गुजरात हाईकोर्ट

गुजरात :  ब्रेन ट्यूमर से पीड़ित 11 साल की बच्ची को एक दिन के लिए बनाया गया अहमदाबाद का कलेक्टर

गुजरात: '2022 की पिच' पर मुख्यमंत्री से लेकर मंत्री तक सब पहली दफा मंत्रिमंडल में, क्या चुनावों तक राज्य की ब्यूरोक्रेसी करेगी बैटिंग?

गुजरात में अगले साल विधानसभा के चुनाव होंगे और चुनाव से पहले जिस तरीके का फेरबदल हुआ है, वह राजनीति में सबसे 'विस्फोटक' फेरबदल माना जाता है। मुख्यमंत्री से लेकर पूरी कैबिनेट तक बदल दी गई। गुजरात की जो कैबिनेट बनी है, उसे मुख्यमंत्री से लेकर मंत्री तक सब पहली दफा अपना पोर्टफोलियो संभालने वाले हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि जिस तरीके से गुजरात में इतना बड़ा फेरबदल हुआ है वह भारतीय जनता पार्टी के लिए गेम चेंजर साबित होगा या नहीं, लेकिन पहली बार मुख्यमंत्री से लेकर कैबिनेट मंत्री शासन सत्ता का अनुभव न होने के चलते ब्यूरोक्रेसी पर निर्भरता जरूर ज्यादा बढ़ जाएगी।

भारतीय जनता पार्टी ने उत्तराखंड और कर्नाटक में मुख्यमंत्री बदला। बात जब गुजरात में मुख्यमंत्री बदलने की आई तो राजनीतिक चर्चाएं सबसे ज्यादा होने लगीं। उसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि गुजरात देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और गृह मंत्री अमित शाह का गृह राज्य भी है। लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा तब होनी शुरू हुई, जब नए मंत्रिमंडल में सभी बनाए गए मंत्री पहली दफा मंत्री बने थे। राजनीतिक विशेषज्ञ और गुजरात कैडर के पूर्व आईएएस शंभूभाई पटेल कहते हैं गुजरात में एक साथ पहली बार अनुभवहीन मंत्रियों को बहुत बड़ा पोर्टफोलियो दिया गया है। वे कहते हैं कि मंत्रियों से लेकर मुख्यमंत्रियों तक का शासन सत्ता चलाने का पहले कोई भी अनुभव नहीं है। ऐसे में जब चुनाव सिर पर है, तो निश्चित तौर पर भाजपा इस तरह के फेरबदल को मास्टर स्ट्रोक के तौर पर ही देख रही होगी। हालांकि शंभू भाई पटेल का कहना है कि कैबिनेट जरूर नई है, लेकिन जिस तरीके से जातिगत समीकरणों को भारतीय जनता पार्टी ने साधा है वह विजय रूपाणी के दौर में हुई जातिगत समीकरणों की अस्थिरता को निश्चित तौर पर रोकने का काम कर सकती है।




क्योंकि विजय रूपाणी के कार्यकाल में गुजरात के ज्यादातर इलाकों में खास तौर से जातिगत समीकरणों के आधार पर लोगों में जबरदस्त नाराजगी शुरू हो गई थी। वे कहते हैं कि भारतीय जनता पार्टी ने उस नाराजगी को दूर करने के लिए इतना व्यापक फेरबदल कर डाला। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि भारतीय जनता पार्टी गुजरात में किसी भी तरीके का कोई रिस्क नहीं उठाना चाहती है। उसके प्रमुख वजह देश के प्रधानमंत्री और गृहमंत्री का गुजरात से सीधा कनेक्शन होना है, बल्कि भारतीय जनता पार्टी भी एक बड़ी प्रयोगशाला गुजरात रही है।
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गुजरात में भूपेंद्र पटेल सरकार के नए मंत्रियो का शपथग्रहण समारोह एक दिन के लिए टला

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गुजरात: बार-बार क्यों चूक जाते हैं नितिन पटेल? मोदी ने बनाई नए नेताओं की खेप तैयार करने की रणनीति

गुजरात की मुख्यमंत्री आनंदी बेन पटेल के मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद इस पद के सबसे प्रबल दावेदार उप मुख्यमंत्री नितिन पटेल थे। लेकिन ताज सजा केंद्रीय गृहमंत्री और तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की खास पसंद विजय रूपाणी के सिर। पांच साल गुजर गए। विजय रूपाणी ने अचानक इस्तीफा दिया। भाजपा मुख्यालय के सूत्र बताते हैं कि रूपाणी को इस्तीफा देने के लिए प्रधानमंत्री और गृहमंत्री ने कहा। रूपाणी ने बात मान ली और इस्तीफा देने की घोषणा कर दी। एक बार फिर नितिन पटेल के पास संभावना आई थी, लेकिन इस बार फिसलकर उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के करीबी और पहली बार के विधायक भूपेन्द्र पटेल के पास चली गई।

नितिन पटेल के हिस्से में एक बार फिर भाजपा के सिपाही की तरह पार्टी की सेवा और जिम्मेदारियों के निर्वहन का विकल्प बचा है। गुजरात भाजपा के एक पूर्व वरिष्ठ नेता कहते हैं कि आप समय से पहले और भाग्य से ज्यादा कुछ नहीं पा सकते। वहीं गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के पहले कार्यकाल में उनके साथ काम कर चुके सूत्र का कहना है कि प्रधानमंत्री जनसेवक हैं। उन्हें पता होता है कि दूसरे जन सेवक और जन नेता के साथ कैसा व्यवहार जरूरी है। वह हमेशा नए दृष्टिकोण वाले नेताओं और लोगों को प्रोत्साहित करते हैं।

केंद्र में भी मोदी का गणित ऐसे ही चलता है

प्रधानमंत्री मोदी सक्रिय राजनीति में एक आयु सीमा को लागू करने के प्रस्ताव को लेकर आए। वह प्रस्ताव लेकर नहीं आए, बल्कि एक दो अपवाद को छोड़कर इसे दृढ़ता से लागू भी किया। हालांकि इस विषय पर भाजपा के नेता चर्चा नहीं करना चाहते, लेकिन राजनीति को जानने समझने वालों को भाजपा के मार्गदर्शक मंडल के दो वरिष्ठ नेताओं का राजनीतिक सन्यास याद करना चाहिए। डा. मुरली मनोहर जोशी की कुछ स्तर पर नाराजगी भी। राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र समेत कई नेताओं का केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा भी। प्रधानमंत्री ने हाल के अपने मंत्रिमंडल विस्तार में भी कई विश्वसनीय माने जाने वाले सहयोगियों को केंद्रीय मंत्रिमंडल से संगठन की तरफ का रास्ता दिखाया। इसमें प्रकाश जावड़ेकर, रविशंकर प्रसाद, रमेश पोखरियाल निशंक, डा. हर्षवर्धन के मंत्रिमंडल से इस्तीफे ने सबको चौंकाया। प्रधानमंत्री के प्रिय थावर चंद गहलोत की मंत्रिमंडल से छुट्टी और कर्नाटक का राज्यपाल बनाना। अश्विन वैष्णव को रेलमंत्री और दूर संचार मंत्री, अनुराग ठाकुर को केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री, मनसुख मंडाविया को केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय जैसा प्रभार देकर संदेश देने की कोशिश की।

'भाग्य' ने नहीं दिया नितिन पटेल का साथ?

इस बारे में कोई स्पष्ट खुलकर नहीं बोलना चाहता। समझा जाता है कि प्रधानमंत्री की सहमति के बिना भूपेंद्र पटेल का नाम तय नहीं हुआ है। लेकिन राजनीति के गलियारे में दो चर्चा जोर पकड़ रही है। पहली यह कि शांत, सौम्य भूपेंद्र पटेल पाटीदार समाज को साध सकते हैं। दूसरा यह कि भाजपा को गुजरात की राजनीति में एक संतुलन बनाना है। इसमें नितिन पटेल का नाम कुछ कारणों से फिट नहीं बैठ रहा था। वह अंदरूनी राजनीति का भी शिकार बन रहे थे। दबी जुबान से एक चर्चा यह भी है कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने भावी राजनीति और चुनौतियों को ध्यान में रखकर अपनी सलाह दी है। प्रधानमंत्री के बारे में आम है कि वह संबंधित लोगों की सलाह लेकर ही अपना मन बनाते हैं, लेकिन आखिरी निर्णय की जानकारी कम लोगों को होती है। इसलिए निष्कर्ष पर पहुंचने के पहले भेद खुलना मुश्किल होता है।
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सम्मान: पानी में डूब गया था अस्पताल तब भी ड्यूटी करती रही यह नर्स, अब मिलेगा फ्लोरेंस नाइटिंगेल अवार्ड

अगर आपमें सेवाभाव, संघर्ष करने का इरादा और मानवता के प्रति संवेदनाएं हों तो एक दिन आपको मेहनत का फल जरूर मिलता है। इसी तरह गुजरात की एक नर्स को भी उनके सेवाभाव और संघर्ष का फल मिला है।  
गुजरात के वडोदरा के सर सयाजीराव जनरल अस्पताल की नर्स भानुमति घीवला को फ्लोरेंस नाइटिंगेल अवार्ड से सम्मानित किया जाएगा। उन्हें यह अवार्ड कोरोना काल और 2019 में बाढ़ के समय लगातार ड्यूटी के लिए दिया जा रहा है। 

मुझे कैजुअल लीव लेना नहीं पसंद 
अस्पताल के स्त्री व बाल रोग वार्ड में ड्यूटी करने वाली नर्स भानुमति घीवला कहती हैं कि मुझे कैजुअल लीव लेना पसंद नहीं है। वह कोविड-19 के समय गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी के साथ ही साथ नवजात बच्चों की देखभाल करती रहीं हैं। इसके अलावा जब 2019 में बाढ़ आई थी और अस्पताल में पानी भर गया था, तब भी भानुमति लगातार अस्पताल आती रहीं और स्त्री रोग विभाग व बाल रोग वार्ड में ड्यूटी करती रहीं। उनके इसी सेवाभाव के लिए उन्हें भारतीय नर्सिंग परिषद, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से फ्लोरेंस नाइटिंगेल अवार्ड से नवाजा जाएगा।
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