नंदीशाला में ही बंदी बनकर रह गए 800 नंदी, न धूप से सुरक्षा न बारिश से कोई बचाव

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 26 Sep 2021 12:56 AM IST
नंदीशाला में बिना शेड के धूप व बारिश में खड़े नंदी जहां बैठने के लिए भी ठीक से जगह नहीं है। संवाद
नंदीशाला में बिना शेड के धूप व बारिश में खड़े नंदी जहां बैठने के लिए भी ठीक से जगह नहीं है। संवाद - फोटो : Bhiwani
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संजय वर्मा
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भिवानी। नगर परिषद की नंदीशाला लावारिस गोवंश के लिए बंदीशाला बनकर रह गई। यहां रखे 800 से अधिक नंदियों के लिए न धूप से बचाव की कोई सुरक्षा है, न ही बारिश से कोई बचाव। यहां नंदियों के लिए ठीक से बैठने तक की जगह नहीं है। ज्यादातर नंदी तो बीमार और लाचार हालत में हैं, जिनकी सेहत जांचने के लिए यहां पशु चिकित्सक भी नहीं आते हैं।
लंबे अर्से से जिला प्रशासन ने भी यहां की व्यवस्था संभालने को लेकर हाथ खड़े कर दिए हैं, जिसके बाद यहां नंदियों की देखभाल और पशुचारे की व्यवस्था भी गो सेवकों के कंधे पर आ टिकी है। पशुचारे का इंतजाम करने के लिए नंदीशाला के पास 32 एकड़ भूमि भी है, लेकिन यह खाली पड़ी है।

हालुवास गेट मुक्तिधाम मार्ग पर नगर परिषद ने करीब पांच साल पहले नंदीशाला की स्थापना की थी। जिसमें शहर व आसपास के गांवों से लावारिस पशुओं को रखने का इंतजाम किया गया था। शुरुआत में सरकार से नंदीशाला के लिए अलग से बजट आने की बातें हुई थीं, मगर आज तक सरकार की तरफ से नंदीशाला के लिए कोई बजट नहीं आया। जिसकी वजह से प्रशासनिक अधिकारियों ने भी नंदीशाला में पशुचारा को लेकर अपने हाथ खड़े कर दिए। इसके बाद नंदीशाला में चारे का नैतिक दायित्व समाजसेवी लोगों ने संभाला, कई माह तक वे नंदीशाला में पशुओं के लिए सूखा और हरा चारा पहुंचाते रहे, मगर वे भी थक गए। अब नंदीशाला में कई महीनों से गो सेवकों ने पशु चारे की व्यवस्था का जिम्मा संभाला हुआ है, लेकिन यहां पर क्षमता से अधिक 800 से ज्यादा नंदी हैं। इसी वजह से अधिकतर नंदियों को तो खुली धूप व बारिश में अपने हाल पर छोड़ा जा रहा है। फिलहाल बारिश और एक बाड़े में ज्यादा नंदी होने के चलते बैठने के लिए भी व्यवस्था नहीं है। कमजोर और बीमार नंदी लगातार कीचड़ में खड़े रहने से भी दम तोड़ने के कगार पर पहुंच रहे हैं। नंदीशाला में चारा भी सिर्फ सात से 10 दिन का ही बचा है।
पांच कर्मचारियों के कंधों पर 800 नंदियों का भार
हालुवास गेट की नंदीशाला में फिलहाल पांच कर्मचारी तैनात हैं। इन कर्मचारियों के कंधों पर 800 से ज्यादा नंदियों की व्यवस्था संभालने का भार है। कर्मचारियों की कमी की वजह से भी यहां के हालात लगातार बिगड़ रहे हैं। इन नंदियों के लिए यहां कम से कम 12 कर्मचारियों की जरूरत महसूस हो रही है, लेकिन जो पांच कर्मचारी यहां लगे हैं, उन्हें भी तीन माह से वेतन भुगतान नहीं हुआ है।
मृत नंदी को उठाने के लिए जेसीबी भी नहीं
नंदीशाला में स्वयंसेवक के तौर पर सहयोग करने वाले गो सेवकों का कहना है कि यहां बीमार व लाचार नंदियों के लिए कोई भी पशु चिकित्सक नहीं आता है। जब कोई बीमार नंदी मर जाता है तो उसके दाह संस्कार के लिए भी नगर परिषद जेसीबी तक का इंतजाम नहीं करती, जबकि नगर परिषद के अंतर्गत ही नंदीशाला की सभी व्यवस्थाएं आती हैं।
नप हाउस की बैठक में रखेंगे मसला
नंदीशाला में व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के लिए जल्द ही नप हाउस की बैठक में मसले को रखा जाएगा। यहां पर नए शेड का निर्माण भी कराया जाएगा। नंदीशाला में नंदियों के लिए समुचित व्यवस्थाएं बनें, इसके लिए जरूरी कदम उठाएंगे।
- राहुल नरवाल, अतिरिक्त उपायुक्त व जिला नगर आयुक्त भिवानी।

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