स्कूलों में विद्यार्थियों की प्रताड़ना रोकने के लिए स्कूलों में नहीं बनी निगरानी कमेटी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 23 Sep 2021 11:14 PM IST
राजकीय मॉडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय।
राजकीय मॉडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय। - फोटो : Fatehabad
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सरकारी और निजी स्कूलों में विद्यार्थियों के साथ होने वाली प्रताड़ना को रोकने के लिए शिक्षा विभाग कमेटी गठित नहीं कर पा रहा है। शिक्षा विभाग निदेशालय ने करीब दो माह पहले शारीरिक दंड निगरानी कमेटी (सीपीएमसी) गठित करके रिपोर्ट मांगी थी लेकिन आज तक सरकारी और निजी स्कूलों में कमेटी गठित करने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है।
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स्कूल पैनल में शामिल वकील और खंड स्तर पर अधिकारियों के प्रतिनिधि शामिल कर कमेटी पूरी नहीं पाए हैं। कमेटी पूरी करने को लेकर पेंच फंसा हुआ है। ये हालात तब हैं जब टोहाना के सरकारी स्कूल में विद्यार्थियों के साथ उत्पीड़न का मामला भी सामने आ चुका है। ये ही नहीं कई ऐसे मामले भी हैं जिनमें विद्यार्थी प्रताड़ित तो हो रहे हैं लेकिन वह अपनी उत्पीड़न को लेकर आवाज नहीं उठा पा रहे हैं। संवाद

कमेटी बनी तो हर माह होगी बैठक
शिक्षा विभाग अधिकारियों की माने तो सीपीएमसी की हर माह बैठक होगी। इस बैठक में विद्यार्थियों साथ प्रताड़ना का मुद्दा रखा जाएगा। इसके अलावा कमेटी के सामने विद्यार्थी अपनी प्रताड़ना भी रख सकते हैं। ये ही नहीं अगर छात्रा भी किसी वजह से प्रताड़ित है तो वह भी अपनी समस्या प्रकोष्ठ के सामने रख सकती है।
कमेटी में ये होंगे शामिल
दो शिक्षक
दो अभिभावक
एक डॉक्टर
एक वकील
एक काउंसलर
दो विद्यार्थी
केस नंबर एक
टोहाना के सरकारी स्कूल में पिछले दिनों छात्रों और शिक्षकों के बीच विवाद हुआ था। छात्रों ने तीन शिक्षकों पर मुर्गा बनाकर पीटने का आरोप लगाया था। आरोप था कि एक छात्र की शरारत पर पूरी कक्षा को सजा दी गई। वहीं इस मामले में एक शिक्षिका ने छात्रों पर छेड़छाड़ का आरोप लगाया था।
केस नंबर दो
भट्टूकलां के एक निजी स्कूल में नौंवी कक्षा के छात्र को दो शिक्षकों द्वारा पीटने का मामला सामने आया था। मामला बाल संरक्षण कार्यालय भी पहुंचा था। आरोप था कि स्कूल के दो शिक्षकों ने विद्यार्थी के साथ मारपीट की और प्रताड़ित किया।
जिले में स्कूलों की स्थिति
सरकारी स्कूल : 629
निजी स्कूल : 189
कमेटी में जाएगा पहले मामला, नहीं रखा गया तो स्कूल जिम्मेदार
स्कूल में विद्यार्थी के साथ कोई प्रताड़ना होती है तो उससे संबंधित पहले मामला शारीरिक दंड निगरानी प्रकोष्ठ में रखा जाएगा। प्रकोष्ठ में पहले मामले को लेकर कार्रवाई होगी। अगर स्कूल में प्रकोष्ठ नहीं बनाए जाते हैं इसके लिए इंचार्ज जिम्मेदार होंगे।
कोट
जिले के सभी स्कूलों में सीपीएम सेल जल्द ही बना दिए जाएंगे और ये सरकारी और निजी के लिए जरूरी है। स्कूलों को कमेटी गठित करने में वकीलों और प्रशासनिक अधिकारियों के प्रतिनिधि को शामिल करने में दिक्कत आ रही थी। पैनल में शामिल पांच-पांच वकीलों की सूची खंड स्तर भेज दी गई है। छात्र के साथ उत्पीड़न का कोई मामला आता है तो उसे पहले संबंधित कमेटी में रखा जाएगा। अगर स्कूल में कमेटी नहीं होगी, इसके लिए इंचार्ज जिम्मेदार होगा।
- सत्यव्रत, उप जिला शिक्षा अधिकारी।

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