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पराली जलाने में दो के खिलाफ केस, 10 किसानों पर जुर्माना

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 07 Oct 2022 02:15 AM IST
Case against two for burning stubble, fined 10 farmers
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माई सिटी रिपोर्टर

करनाल। लाख प्रयासों के बावजूद जिले में पराली जलाने की घटनाएं रुक नहीं रही हैं। वीरवार को भी पांच लोकेशन मिलीं हैं, जहां पराली जलाई गई हैं। इधर, पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासन अब एक्शन मोड में आ गया है। अब तक सामने आई 14 लोकेशन में से 12 की पहचान हो चुकी है। इनमें से 10 किसानों पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। वहीं, घरौंडा ब्लॉक के दो लोगों के खिलाफ कृषि विभाग ने एफआईआर दर्ज कराई है।
उपायुक्त अनीश यादव ने बताया कि जिले में पराली जलाने से रोकने के लिए माइक्रो प्लान तैयार किया गया है, जिसके तहत अधिकारियों व कर्मचारियों की संयुक्त टीम फील्ड में उतारी है, जो कि पराली जलाने की घटनाओं पर कड़ी नजर रख रही है। इनमें एसडीएम, बीडीपीओ, तहसीलदार के अलावा गांव स्तर पर कृषि अधिकारी, पटवारी व ग्राम सचिव को तैनात किया गया है, जोकि हर समय निगरानी रख रहे हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि जो किसान समझाने के बावजूद पराली जलाने का प्रयास करेगा, प्रशासन उससे सख्ती से निपटेगा। उपायुक्त ने किसानों से अपील की कि वे पराली जलाने की बजाए उसके बेलर बनवाएं या उन्हें खेतों में ही समायोजित करें, या फिर खेत के बाहर बनाई गई डोल पर रखें। ऐसा करने के लिए सरकार की ओर से एक हजार रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि मिलेगी। इधर, कृषि विभाग से मिली जानकारी के अनुसार वीरवार को चिड़ाव ब्लाक के गोंदर, घरौंडा ब्लाक के मलिकपुर, असंध के पवाना हसनपुर व रहटा और इंद्री खंड के ढ़डखेड़ी गांव में पराली जलाने के चिह्न सेटेलाइट के माध्यम से मिले हैं। यहां कृषि एवं पंचायत विभाग के कर्मचारी लोकेशन को ट्रेस करके कार्रवाई करेंगे। अब तक जिले में 19 पराली जलाने के मामले सामने आ चुके हैं।
पिछले वर्ष पराली जलाने वाले गांवों की सूची तैयार
प्लान के अंतर्गत उपायुक्त की ओर से खंडवार ऐसे गांवों की सूची बनाई गई थी, जिनमें गत वर्ष फसल अवशेषों में आग लगाने की घटनाएं हुई थी और सेटेलाइट के जरिये एक्टिव फायर लोकेशन की जानकारी मिली थी। इन गांवों में संबंधित एसडीएम को नोडल बनाकर बीडीपीओ व तहसीलदार के जरिये गांव के पटवारी व ग्राम सचिव को यह जिम्मेदारी दी गई थी कि वे आग लगाने वाले किसानों को हर तरीके से समझाएं और उनसे एफिडेविट लें कि वे इस बार पराली में आग नहीं लगाएंगे।
तीन गांवों में बनाए पराली एकत्रित करने के डिपो
डीडीए डॉ. आदित्य डबास ने बताया कि किसान यदि फसल अवशेषों का प्रबंधन करे तो यह उसके लिए बहुत उपयोगी है। सरकार की ओर से प्रति एकड़ एक हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। सभी कस्टम हायरिंग सेंटर व कुछ व्यक्तिगत किसानों के पास 250 के करीब बेलर उपलब्ध हैं, जिनसे किसान आसानी से फसल अवशेष प्रबंधन करवा सकता है। किसानों के हित को देखते हुए आईओसीएल को पराली की आपूर्ति की जाएगी, इसके लिए जिले में 57.5 एकड़ भूमि पराली भंडारण के लिए सुनिश्चित की गई है। इस काम के लिए जिले के बांबरेहड़ी, गगसीना और सिरसी में डिपो बनाए गए हैं, जहां पराली एकत्र की जाएगी।

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