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गांव शामिल होने से कोई राहत नहीं, बढ़ेगी मुश्किलें

Panchkula bureauPanchkula bureau Updated Sat, 10 Nov 2018 12:49 AM IST
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वित्तीय हालत खस्ता, अब 13 गांवों का बोझ कैसे झेलेगा निगम
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प्रशासन के सुझाव मांगने पर भी नगर निगम चुप, प्रशासन की मदद के बिना बढ़ जाएगा संकट


राजेश ढल्ल
चंडीगढ़। प्रशासन ने शहर के 13 गांवों नगर निगम में शामिल करने की तैयारी कर ली है जबकि निगम की वित्तीय स्थित बेहद खस्ता है। इन 13 गांवों के नगर निगम में शामिल किए जाने से निगम की वित्तीय स्थिति और खराब हो जाएगी क्योंकि इन गांवों में व्यवस्था बनाने से लेकर अतिरिक्त स्टाफ की तैनाती समेत कई अन्य कार्य निगम को कराने पड़ेंगे। इसके लिए पैसे की जरूरत पड़ेगी। खास बात यह है कि इस मामले में नगर निगम ने चुप्पी साध रखी है। नगर निगम कमिश्नर और मेयर ने अपने स्तर पर इस संबंध में अब तक प्रशासन से कोई भी बात नहीं की है और न ही प्रशासन ने इस मसले पर नगर निगम से कोई राय ली है।
बता दें कि प्रशासन की ओर से 13 गांवों को नगर निगम में शामिल करने संबंधी ड्राफ्ट अधिसूचना भी जारी की गई है जिस पर 9 अक्तूबर तक आपत्तियां व सुझाव मांगे गए हैं लेकिन नगर निगम ने अपनी ओर से अब तक कोई भी सुझाव नहीं दिया है जबकि 30 अक्तूबर को होने वाली सदन की बैठक में गांवों को निगम में शामिल करने की जानकारी लिखित में लाई गई थी। प्रशासन की ओर से जारी ड्राफ्ट अधिसूचना में साल 2013 के सदन की विशेष बैठक में गांवों को शामिल करने के संबंध में लिए गए फैसले का जिक्र किया गया है जबकि उस समय सदन ने 11 शर्तें लगाकर इन सभी गांवों को नगर निगम में शामिल करने का प्रस्ताव रखा था लेकिन प्रशासन की ओर से जारी अधिसूचना में इन शर्तों का कोई जिक्र तक नहीं है।

लाल डोरे के बाहर बने मकानों को रेगुलर करने पर कोई फैसला नहीं
साल 2013 की बैठक में इस शर्त पर गांवों को निगम में शामिल करने का प्रस्ताव पास किया गया था कि लाल डोरे के बाहर बने निर्माण को रेगुलर किया जाए लेकिन जारी अधिसूचना में इसका कोई जिक्र नहीं है। प्रशासन के अनुसार पेरीफेरी एक्ट लागू रहेगा। इन गांवों में पांच साल टैक्स न लगाने की भी शर्त पास की गई थी लेकिन इस शर्त को भी अधिसूचना में शामिल नहीं किया गया है। साल 2013 में सुभाष चावला तत्कालीन मेयर थे। लाल डोरे के बाहर रहने वाले लोग नगर निगम के पार्षद चुनने में तो वोट डालते हैं लेकिन नगर निगम उनके लिए ज्यादा कुछ नहीं कर पाता है। इसस समय नगर निगम के अंतर्गत 10 गांवों पहले से हैं।

गांवों पर लगेगा टैक्स, हटाने पड़ेंगे पशु
इस समय इन 13 गांवों में कोई भी प्रापर्टी और हाउस टैक्स नहीं लगता है लेकिन नगर निगम में शामिल होने के बाद इन सभी गांवों पर टैक्स लगेगा। इसके साथ ही यहां पर पशुपालन पर भी पाबंदी लग जाएगी। ऐसे में दूध देने वाले पशुओं को इन गांवों से बाहर निकालना पड़ेगा। एक्ट के अनुसार गांव का शहरीकरण होने पर एरिया को कैटल फ्री घोषित कर दिया जाएगा।



कोट...
जिस समय प्रशासन नगर निगम को 13 गांवों को हैंडओवर करेगा, उस समय बजट और अतिरिक्त स्टाफ की बात की जाएगी। अभी इस समय प्रशासन ने निगम के साल 2013 के सदन में पास किए गए प्रस्ताव के आधार पर ही ड्राफ्ट अधिसूचना जारी की है, जिस पर सुझाव मांगे गए हैं।
- केके यादव, नगर निगम कमिश्नर

कोट
वर्ष 2013 में 13 गांवों को निगम में शामिल करने का प्रस्ताव 11 शर्तें लगातार पास किया गया था। यह भी कहा गया था कि इन शर्तों के बिना गांवों को शामिल करने का प्रस्ताव मंजूर नहीं किया जाएगा जबकि भाजपा पार्षदों ने उस समय इस प्रस्ताव का जमकर विरोध किया था और अब भाजपा खुद ही मंजूरी दे रही है। इससे भाजपा के दोहरे चेहरे पता लगता है। भाजपा इस समय पूरे मामले से चुप है जबकि गांव वालों का नुकसान होने जा रहा है।
-सुभाष चावला, पूर्व मेयर

कोट
गांवों को नगर निगम में शामिल करने का निर्णय प्रशासन को लेना है। हम अपनी जिम्मेदारी पूरी तरह से निभाएंगे। शहर की तर्ज पर ही निगम में शामिल होने वाले गांवों का विकास किया जाएगा।
-देवेश मोदगिल, मेयर

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