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सरस्वती नदी होगी पुनर्जीवित: 387 करोड़ की लागत से सोमनदी पर बनेगा डैम, 21 को होगा दो मुख्यमंत्रियों के बीच समझौता

संवाद न्यूज एजेंसी, यमुनानगर (हरियाणा) Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Tue, 11 Jan 2022 05:51 PM IST

सार

हरियाणा और हिमाचल के मुख्यमंत्री 21 जनवरी को आदिबद्री पहुंचेंगे और समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे। आदिबद्री में सोमनदी पर डैम 387 करोड़ की लागत से बनाया जा रहा है। यमुनानगर डीसी ने आदिबद्री का दौरा किया।
सरस्वती नदी
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विस्तार

आदिबद्री में सोमनदी पर 387 करोड़ की लागत से बनने वाले डैम के संबंध में 21 जनवरी को हरियाणा और हिमाचल के मुख्यमंत्री आदिब्रदी पहुंचेंगे। इस दौरान दोनों मुख्यमंत्रियों के बीच में डैम से उपलब्ध होने वाले पानी के बंटवारे को लेकर समझौता होगा। इस दौरान दोनों समझौते पर भी हस्ताक्षर करेंगे। दोनों मुख्यमंत्रियों के दौरे को लेकर यमुनानगर के डीसी पार्थ गुप्ता ने सोमवार को आदिबद्री जाकर व्यवस्थाओं की जानकारी ली।  

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उल्लेखनीय है कि सोमनदी पर डैम बनाने की घोषणा 2018 में हुई थी। डैम निर्माण के लिए जमीन चिह्नित कर ली गई है। अप्रैल से इसमें निर्माण कार्य शुरू करने की योजना है। परियोजना के अंतर्गत तीन जलाशयों का निर्माण होना है। सोमनदी में बनने वाले इस डैम के पानी के बंटवारे के संबंध में हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के बीच समझौता होना है। इसी समझौते को लेकर दोनों प्रदेशों के मुख्यमंत्री 21 को जनवरी आदिबद्री पहुंच रहे हैं।  


मुख्यमंत्रियों के इस दौरे के मद्देजनर डीसी पार्थ गुप्ता ने सोमवार को आदिबद्री का दौरा किया। इस दौरान उनके साथ विभिन्न विभागों के अधिकारी व कर्मचारी भी मौजूद रहे। उन्होंने आदिबद्री रेस्ट हाउस में अधिकारियों के साथ बैठक कर व्यवस्थाओं की जानकारी ली। उन्होंने कार्यक्रम के आयोजन की तैयारियों को लेकर अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।

उन्होंने सड़कों के निर्माण, बाबा बंदा सिंह बहादुर म्यूजियम, मार्शल आर्ट स्कूल, किलानूमा वॉल, साढौरा में बनने वाले पीर बुधशाह मेमोरियल हॉल और इस क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने से संबंधित अन्य विकास परियोजनाओं पर विस्तृत जानकारी हासिल की।  

पर्यटन के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी यह परियोजना 

सोमनदी पर डैम बनने से संस्कृति से जुड़ी सरस्वती नदी को पुनर्जीवित करने योजना सफल रहेगी। डैम बनने यह परियोजना जल संरक्षण, सिंचाई, पेयजल के साथ-साथ पर्यटन के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगी। इतना ही नहीं सरस्वती नदी को रास्ता देने के लिए क्षेत्र के कई किसान आगे आए हैं। इन किसानों ने अपनी इच्छा से भूमि को दान किया है। बताया जा रहा और भी कई किसान ऐसे हैं जो नदी के प्रवाह केे रास्ता देने के लिए आगे आ रहे हैं। 

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