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नवरात्र : आज मंदिरों में पूजा-अर्चना के लिए उमड़ेगी श्रद्धालुओं की भीड़

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 26 Sep 2022 01:51 AM IST
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जगाधरी। नवरात्र के लिए जिले के मंदिरों को दुल्हन की तरह सजाया गया है। मंदिर के पुजारियों ने मंदिर में पूजा के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के लिए बेहतर व्यवस्था की है। जिस मंदिर में ज्यादा भीड़ होती है वहां बैरिकेड आदि लगाए गए हैं। महिला श्रद्धालु और पुरुष श्रद्धालुओं के लिए अलग से लाइन लगाने की व्यवस्था की गई है।

मां दुर्गा के नवरात्र को लेकर भक्तों में भारी उत्साह है। नवरात्र सोमवार से शुरू हो रहे हैं और भक्त इसकी तैयारी में जुटे हैं। भारी बारिश के बावजूद लोगों ने नवरात्र पूजन के लिए बाजारों में खरीदारी की। वहीं मंदिरों में भी मां का दरबार सजाया जा रहा है। मंदिरों में रविवार देर शाम तक सफाई व सजावट जारी रही। नवरात्र का समापन पांच अक्तूबर को होगा। अष्टमी पूजन सोमवार व नवमी पूजन मंगलवार को होगा। घरों में मां दुर्गा को आमंत्रित करने के लिए भक्तों में भारी उत्साह है। रविवार को ही घरों में मां का दरबार सज गया है। सोमवार सुबह घट स्थापना के साथ माता के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा की जाएगी।

मनवांछित फल देने वाला है रूप
बूड़िया निवासी पंडित ललित शर्मा ने बताया कि नवरात्र के पहले दिन मां के प्रथम स्वरूप शैलपुत्री की पूजा का विधान है। मां का यह स्वरूप बेहद मोहक व कृपा बरसाने वाला है। उन्होंने बताया कि मां शैलपुत्री के एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे हाथ में कमल पुष्प है। वे अपनी सवारी नंदी बैल पर संपूर्ण हिमालय पर विराजमान हैं। वे सभी वन्य जीवों की रक्षक हैं। मां शैलपुत्री को करुणा और स्नेह का प्रतीक माना गया है। पूजन से मां का यह स्वरूप भक्तों पर करुणा बरसाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां शैलपुत्री हिमालय की पुत्री हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार हिमालय के तप से प्रसन्न होकर आदिशक्ति उनके यहां पुत्री के रूप में अवतरित हुईं। जो व्यक्ति श्रद्धा से मां शैलपुत्री की पूजा करता है उसे मनवांछित फल की प्राप्ति होती है।
घट स्थापित करें पूजा प्रारंभ
पंडित ललित शर्मा ने बताया कि नवरात्र के पहले कलश स्थापना की जाती है। प्रात: जल्दी उठें और स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। नए कलश में स्वच्छ जल भरकर के मंदिर में रखें। कलश पर कलावा बांधकर पर हरा नारियल रखें। नारियल चुनरी या कलावा में लपेटा जरूर हो और उसमें कुछ दक्षिणा रखें। गंगा जल से स्थान पवित्र कर चौकी सजाए और मां को श्वेत वस्त्र अर्पित करें। मां शैलपुत्री के चित्र या प्रतिभा के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलित करें। मां को श्वेत वस्तु पसंद हैं। ऐसे में पूजा के लिए श्वेत पुष्प अत्यंत उपयुक्त रहेगा। सामने बैठकर दुर्गा सप्तशती का पाठ करें। पाठ के बाद आरती करके मां को प्रसाद का भोग लगाएं।
इन शुभ मुहूर्त में करें घट की स्थापना
पंडित ललित शर्मा ने बताया कि इस बार मां हाथी पर सवार होकर पृथ्वी लोक पर आएंगी। यह सुख, समृद्धि व ऐश्वर्य का प्रतीक है। बताया कि घट स्थापना प्रात: 6 बजकर 17 मिनट से 7 बजकर 55 मिनट तक की जा सकती है। यह अमृतकाल होगा। इसके अलावा सुबह नौ से 10:30 बजे तक अभिजीत मुहूर्त में घट स्थापना की जा सकती है। इसके अलावा सुबह 11 बजकर 54 मिनट से दोपहर 12 बजकर 42 मिनट तक, दोपहर डेढ़ बजे से तीन बजकर चार मिनट तक घट स्थापना कर सकते हैं। यह समय पूजन के लिए शुभ होगा।

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