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बुध का तुला राशि गोचर, जानें क्या होगा आपके जीवन पर प्रभाव
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बुध का तुला राशि गोचर, जानें क्या होगा आपके जीवन पर प्रभाव

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मौसम: हिमाचल में दो अक्तूबर तक बरसेंगे बादल, आज इन जिलों में बारिश के आसार

हिमाचल प्रदेश में दो अक्तूबर तक बारिश का दौर जारी रहने के आसार हैं। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के अनुसार 28 सितंबर से दो अक्तूबर तक प्रदेश के मैदानी व मध्य व उच्च पर्वतीय कुछ भागों में बारिश की संभावना है। वहीं, आज शिमला व आसपास भागों में मौसम खराब बना हुआ है। राजधानी में झमाझम बारिश हो रही है। विभाग के अनुसार अगले कुछ घंटों के दौरान ऊना, हमीरपुर, बिलासपुर, कांगड़ा(शाहपुर), मंडी के जोगेंद्रनगर, करसोग व जंजहौली, कुल्लू के बंजार व आनी, शिमला, ठियोग, कुफरी, सोलन, कसौली और आसपास के भागों में भारी की संभावना है। 

वहीं, अक्तूबर के पहले सप्ताह में हिमाचल से मानसून की विदाई होने के आसार हैं। इस मानसून सीजन में अभी तक सामान्य से 11 फीसदी कम बादल बरसे।  बीते 24  घंटों के दौरान जुब्बल में 11, नारकंडा सात, रामपुर पांच व कल्पा में तीन मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। न्यूनतम तापमान सामान्य से 4 से 5 डिग्री अधिक और अधिकतम तापमान सामान्य से 1 से 2 डिग्री अधिक रहा।  केलांग में न्यूनतम तापमान  9.6 और ऊना में अधिकतम तापमान 36 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।  सोमवार को ऊना में अधिकतम तापमान 36, सुंदरनगर 32.5, भुंतर 32.4, बिलासपुर 32, नाहन 31.6, कांगड़ा 31.3, सोलन 31, चंबा 30.9, धर्मशाला 26.2, शिमला 24.7, केलांग 24.5, कल्पा 22.5 और डलहौजी में 19.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ था।

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हिमाचल में दो अक्तूबर तक बरसेंगे बादल हिमाचल में दो अक्तूबर तक बरसेंगे बादल

उपचुनाव: हिमाचल के आठ जिलों में आदर्श आचार संहिता लागू, तबादलों से लेकर नई घोषणाओं पर रोक

चुनाव आयोग की ओर से हिमाचल प्रदेश की एक लोकसभा व तीन विधानसभा सीटों के लिए चुनाव की तारीखों के एलान के साथ ही प्रदेश के आठ जिलों में आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है। इसके साथ ही तबादलों से लेकर नई घोषणाओं पर तत्काल प्रभाव से रोक लग गई है। आचार संहिता लगते ही सीएम जयराम ठाकुर का किन्नौर दौरा भी रद्द हो गया है। बता दें हिमाचल की एक लोकसभा सीट मंडी का उपचुनाव 30 अक्तूबर को होगा। इसी के साथ हिमाचल की तीन विधानसभा सीटों के लिए भी इसी दिन चुनाव होगा। चुनाव आयोग की ओर से मंगलवार को इसकी अधिसूचना जारी की गई। आयोग के शेड्यूल के मुताबिक एक अक्तूबर को चुनाव संबंधी अधिसूचना जारी होगी। नामांकन की अंतिम तिथि आठ अक्तूबर तय की गई है। 11 अक्तूबर को नामांकन पत्रों की छंटनी होगी। 13 अक्तूबर नामांकन वापसी का दिन तय किया गया है। इसके बाद 30 अक्तूबर को मतदान होगा।

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दो नवंबर को वोटों की गिनती होगी। पांच नवंबर से पहले चुनाव प्रक्रिया पूरी होगी। राज्य में मंडी संसदीय सीट पर लोकसभा के चुनाव होने हैं, जबकि फतेहपुर, जुब्बल-कोटखाई और अर्की सीट पर विधानसभा के चुनाव होने हैं। मंडी में सांसद रामस्वरूप शर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के बाद यहां सांसद का पद खाली है। फतेहपुर में पूर्व मंत्री और विधायक रहे सुजान सिंह पठानिया का छह महीने पूर्व देहांत हो गया, जिसके बाद यह हलका तो उपचुनाव के लिए निर्धारित समयसीमा को पार करने लगा है। जुब्बल-कोटखाई में पूर्व मंत्री एवं भाजपा विधायक रहे नरेंद्र बरागटा के देहांत के बाद यहां विधानसभा की सीट खाली हुई है। अर्की में पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस विधायक वीरभद्र सिंह के देहांत के बाद यह सीट रिक्त हुई है।
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केलांग: खंमीगर ग्लेशियर में फंसे 14 पर्वतारोही बेस कैंप के लिए रवाना, शवों को लाने के लिए 32 सदस्यों का दल भेजा

हिमाचल प्रदेश के जनजातीय जिले लाहौल-स्पीति के खंमीगर ग्लेशियर में फंसे पर्वतारोहियों के शवों को लाने के लिए 32 लोगों का दल पिन घाटी के काह गांव से रवाना हुआ। हालांकि, ग्लेशियर में फंसे पर्वतारोही दल के 14 सदस्य धार चांको में बचाव दल को मिल गए हैं। पर्वतारोही दल ने दोनों शवों को खंमीगर ग्लेशियर पर ही छोड़ कर नीचे उतरने का फैसला किया था। मंगलवार देर शाम तक 14 पर्वतारोही काह बेस कैंप तक पहुंच जाएंगे।

वहीं, दोनों शवों को लाने का कार्य बुधवार सुबह शुरू होगा। बचाव दल आज धार चांगो में ही रुकेगा। उपायुक्त नीरज कुमार ने बताया कि एडीएम मोहन दत्त शर्मा ने सुबह बचाव दल को संबधित दिशा-निर्देश दिए हैं। वहीं दो पुलिस कर्मी हेड कांस्टेबल करतार सिंह और कांस्टेबल अश्वनी कुमार काह गांव में बने बेस कैंप में तैनात किए गए हैं। बचाव दल जीपीएस सिस्टम से लैस है। इसके साथ ही रहने, खाने-पीने का सारा सामान बचाव दल के पास मौजूद है। वहीं, बेस कैंप पहुंचने के बाद पर्वतारोही दल के 14 सदस्यों को काजा सीएचसी लाया जाएगा। 

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रेस्क्यू दल में 16 जवान आईटीबीपी और छह सदस्य डोगरा स्काउट के हैं। इन्हीं में एक चिकित्सक भी है। इसके अलावा 10 पोटर यानि बोझा उठाने वाले हैं।  बता दें, माउंटेनिरिंग फांउडेशन पश्चिम बंगाल का पर्वतारोही दल 15 सिंतबर को बातल से काजा के लिए वाया खंमीगर ग्लेशियर से रवाना हुआ था। लेकिन बर्फबारी के कारण आगे का सफर करने में दल असमर्थ हो गया। खंमीगर ग्लेशियर पर दो सदस्यों की मौत गई।

जबकि अन्य सभी सदस्यों ने वहीं पर ठहरने का फैसला किया और आगे का ट्रेक पूरा नहीं किया। इसके बाद एक पर्वतारोही और एक शारपा काजा एडीएम को  सूचना देने के लिए सोमवार को सुबह पहुंचा। इसी के बाद प्रशासन ने बचाव दल काजा से काह के लिए रवाना कर दिया।
खंमीगर ग्लेशियर पर दल के अन्य सदस्य सुरक्षित है। उनके पास रहने और खाने-पीने का समान पर्याप्त है। एडीएम मोहन दत्त शर्मा के साथ डीएसपी रोहित मृगपुरी विशेष तौर पर मौजूद रहे।
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उपचुनाव की घोषणा के बाद हिमाचल में टिकट के चाहवानों की धुकधुकी बढ़ी, जानें सियासी समीकरण

32 लोगों का दल खंमीगर ग्लेशियर रवाना।
हिमाचल प्रदेश में उपचुनाव के लिए चुनाव आयोग ने शेड्यूल जारी कर दिया है। प्रदेश की एक लोकसभा सीट मंडी व तीन विधानसभा सीटों के लिए भी 30 अक्तूबर को मतदान होगा। दो नवंबर को वोटों की गिनती होगी। चुनाव की तारीखों के एलान के साथ ही प्रदेश के प्रमुख राजनीतिक दलों भाजपा और कांग्रेस दोनों तैयारी शुरू कर दी हैं। वहीं, टिकट के चाहवानों की धुकधुकी बढ़ गई है। टिकट झटकने के लिए नेता पहले दिन से ही लॉबिंग में जुटे हैं। इस बार कई मायनों में उपचुनाव रोचक होने वाला है। मंडी लोकसभा सीट में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और वीरभद्र परिवार की प्रतिष्ठा की जंग होगी। सरकार अन्य सीटों पर भी पूरी ताकत झोंकेगी, वहीं कांग्रेस की भी परीक्षा होगी। उपचुनाव को आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सेमीफाइनल की तरह देखा जा रहा है। उपचुनाव में जीत-हार का प्रभाव 2022 के विधानसभा चुनाव में देखने का मिल सकता है। चुनाव में कई सियासी समीकरण अहम होंगे।

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फतेहपुर सीट
मंडी लोकसभा और फतेहपुर व जुब्बल कोटखाई विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव ने सत्तारूढ़ भाजपा और विपक्षी कांग्रेस को धर्मसंकट में डाल दिया है। दोनों पार्टियां तमाम मौकों पर एक दूसरे को वंशवाद को लेकर घेरती रही हैं। लेकिन सूबे की तीन सीटें जिन दिग्गज नेताओं की असामयिक मृत्यु के चलते खाली हुई है, उनके परिवार के सदस्यों ने रिक्त सीट भरने के लिए ताल ठोक दी है। फतेहपुर सीट पर कांग्रेस, जुब्बल कोटखाई विधानसभा और मंडी लोकसभा सीट पर भाजपा का कब्जा था। ऐसे में दोनों दलों पर परिवार के ही सदस्यों को टिकट देने का दबाव बन गया है।  फतेहपुर से विधायक रहे सुजान सिंह पठानिया के बेटे भवानी सिंह पठानिया पिछले कुछ समय से सियासी अखाड़े में सक्रिय हैं। मंडी लोकसभा क्षेत्र से सांसद रहे रामस्वरूप शर्मा के शांति स्वरूप शर्मा ने भी हाल ही में पार्टी के नेताओं से पिता की सियासी विरासत उन्हें देने की इच्छा जताई है।

जुब्बल कोटखाई सीट
जुब्बल कोटखाई से भाजपा विधायक रहे नरेंद्र बरागटा के बेटे व बीजेपी आईटी सेल के मुखिया चेतन बरागटा के पक्ष में क्षेत्र से आवाज उठनी शुरू हो गई है। ऐसे में दोनों दलों पर अपनी सीट बचाने के साथ अब भावनात्मक रूप से टिकट बंटवारे में परिवार के सदस्यों को प्राथमिकता देने का दबाव बन गया है। चूंकि दोनों दल बदलते दौर में सर्वे, नेताओं व अपने सहयोगी संगठनों के फीडबैक के आधार प्रत्याशी तय करते हैं और शांति स्वरूप व भवानी पठानिया अब तक सक्रिय राजनीति से दूर थे, जबकि चेतन बरागटा जुब्बल कोटखाई से ज्यादा शिमला शहर में सक्रिय थे। ऐसे में यह बड़ा सवाल बन गया है कि दोनों ही दल अपनी सियासी नाव को परिवार के सदस्यों के सहारे पार लगाने का फैसला लेते हैं या फिर किसी अन्य को प्रत्याशी बनाते हैं।

कहां किसके नाम है चर्चा में
सूबे की दो विधानसभा सीटों फतेहपुर और जुब्बल कोटखाई के अलावा मंडी लोकसभा क्षेत्र में उपचुनाव होंगे। मंडी में बीजेपी में शांति स्वरूप, महेंद्र सिंह ठाकुर, ब्रिगेडियर खुशहाल ठाकुर, गोविंद ठाकुर और ब्राह्मण चेहरे के तौर पर प्रवीण कुमार शर्मा जैसे नाम चर्चा में है। कांग्रेस में आश्रम शर्मा और ठाकुर सिंह भरमौरी चुनाव लड़ने की इच्छा जता चुके हैं। कौल सिंह और वीरभद्र सिंह के परिवार के सदस्य चुनाव लड़ने से इंकार करते रहे हैं। फतेहपुर विधानसभा सीट पर कांग्रेस से भवानी सिंह पठानिया के  नाम आगे है। भाजपा में पूर्व प्रत्याशी कृपाल परमार के अलावा बलदेव ठाकुर का नाम चर्चा में है। जुब्बल कोटखाई में कांग्रेस से रोहित ठाकुर तो भाजपा से चेतन बरागटा का नाम सबसे आगे है। 

मंडी लोकसभा सीट
कांग्रेस के दिग्गज नेता और हिमाचल प्रदेश के छह बार के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के निधन के बाद सूबे की सियासी तस्वीर भी बदली है। इस बदले घटनाक्रम के बाद कांग्रेस जहां खासी सक्रिय हो गई है, वहीं भाजपा भी इसका तोड़ तलाश रही है। वीरभद्र सिंह की पत्नी व पूर्व सांसद प्रतिभा सिंह मंडी सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं। ऐसे में भाजपा के लिए भी इससे पार पाना बड़ी चुनौती होगी। लोकसभा उपचुनाव सूबे की 20 विधानसभा सीटों पर होना है, ऐसे में इस सेमीफाइनल को भाजपा और कांग्रेस दोनों ही अच्छे अंकों से पास करना चाह रही हैं। वीरभद्र सिंह का गृह क्षेत्र रामपुर और सबसे ज्यादा पकड़ वाला किन्नौर विधानसभा क्षेत्र मंडी लोकसभा सीट में आता है। मंडी जिले से लेकर चंबा के भरमौर, लाहौल-स्पीति और कुल्लू में भी वीरभद्र सिंह का अच्छा प्रभाव रहा है। जुब्बल कोटखाई से वह दो बार विधायक तो रहे ही हैं, साथ ही इस विधानसभा क्षेत्र का कुछ हिस्सा कभी उनकी बुशहर रियासत का तो कुछ परिसीमन के बाद उनकी परंपरागत रोहडू़ सीट से कटकर जुड़ा है। वहीं, फतेहपुर में तो पहले ही वहां के विधायक रहे सुजान सिंह पठानिया के बेटे के पक्ष में सहानुभूति लहर पर कांग्रेस सवार है। अर्की से वीरभद्र वर्तमान में विधायक थे। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का गृह लोकसभा क्षेत्र मंडी है। ऐसे में उनकी प्रतिष्ठा सीधे तौर पर दांव पर है।
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शिमला में दो अफगान नागरिक गिरफ्तार, नौ हजार करोड़ के हेरोइन मामले से जुड़े हैं तार

राजस्व आसूचना निदेशालय (डीआरआई) ने गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह से जब्त की गई हेरोइन की खेप की जांच के संबंध में रविवार-सोमवार की रात राजधानी शिमला स्थित एक होटल से दो अफगान नागरिकों को गिरफ्तार किया है। इन दोनों की सीधे तौर पर हेरोइन की बड़ी खेप को भारत पहुंचाने में अहम भूमिका मानी जा रही है। सूत्रों ने बताया कि रात करीब ढाई बजे डीआरआई की दिल्ली की एक टीम ने छोटा शिमला स्थित एक होटल में दबिश दी। टीम ने यहां पहले से मौजूद दो अफगान नागरिकों को पूछताछ के  लिए हिरासत में लिया और करीब तीन घंटे पूछताछ और कागजी कार्रवाई पूरी करने के बाद दोनों को लेकर सुबह साढ़े छह बजे दिल्ली रवाना हो गई। 

जानकारी के अनुसार डीआरआई ने करीब दस दिन पहले गुजरात के मुंद्रा पोर्ट से कंटेनर में छुपाकर लाई जा रही तीन हजार किलो हेरोइन की बड़ी खेप को पकड़ा था। इस खेप की करीब नौ हजार करोड़ रुपये कीमत आंकी गई है। सूत्रों का कहना है कि मामले की जांच कर रही डीआरआई ने इस संबंध में पिछले तीन दिन में तीन लोगों को अपनी गिरफ्त में लिया है। इन्हीं से हुई पूछताछ के आधार पर जांच अधिकारियों को शिमला में दो अफगान नागरिकों के छुपने की जानकारी मिली थी। दिल्ली की टीम ने छोटा शिमला पुलिस के कुछ कर्मियों के साथ मिलकर इस कार्रवाई को अंजाम दिया। शिमला में हुई इस कार्रवाई की जानकारी बेहद कम लोगों को दी गई। पुलिस के आला अधिकारियों को भी पूरी कार्रवाई के बाद जानकारी दी गई।
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बीएससी नर्सिंग: 1550 सीटों के लिए सात अक्तूबर तक कर सकेंगे आवेदन

हिमाचल: जंगलों में मिलने वाले 30 फीसदी मशरूम ही खाने योग्य, जानें सबसे जहरीली प्रजाति

मशरूम खाने के शौकीन बहुत से लोग होते हैं, लेकिन यही मशरूम आपकी जान के लिए खतरा भी बन सकती है। हिमाचल प्रदेश में तीन हजार से अधिक जंगली मशरूम पाई जाती हैं। इनमें सिर्फ 30 फीसदी मशरूम खाने योग्य हैं। इसका खुलासा खुंब अनुसंधान निदेशालय चंबाघाट की लैब जांच में हुआ है। डीएमआर की ओर से हर वर्ष जंगली मशरूम की खोज की जाती है। इस वर्ष भी करीब 500 प्रजातियों की मशरूम की खोज की गई है। इनमें अमानिटा प्रजाति की मशरूम सबसे अधिक जहरीली पाई गई है। इसका सेवन करने के 24 घंटे में व्यक्ति की मौत हो सकती है। अन्य जहरीले मशरूमों से पेट दर्द, दस्त, उल्टी, पेट में ऐंठन और बार-बार दस्त की समस्या होती है।

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किंग बोलीट, पाइन मशरूम, गुच्छी मशरूम, सीप मशरूम, सल्फर शेल्फ मशरूम इत्यादि सबसे ज्यादा खाए जाने वाली जंगली मशरूम हैं। जंगली मशरूम का सबसे अधिक सेवन जिला कुल्लू, मंडी, चंबा, किन्नौर और सिरमौर में होता है। जानकारी के अनुसार विश्वभर में मशरूम की 14 हजार से अधिक प्रजातियां हैं। अगर खाने लायक मशरूम की बात करें तो लगभग तीन हजार प्रजातियां ही खाने लायक होती हैं। अभी तक के मामलों में लगभग 30 प्रतिशत ऐसी प्रजातियां हैं, जो जहरीली होती हैं। उधर, खुंब निदेशालय के निदेशक डॉ. वीपी शर्मा ने बताया कि ज्यादातर जहरीली मशरूम जंगलों में पाई जाती हैं। जंगली मशरूम को खाने से बचें। मुख्यतया छतरी जैसी मशरूम जहरीली होती है। उसका सेवन न करें। डीएमआर की ओर से हर वर्ष जंगली मशरूम एकत्रित कर उसे पर शोध भी किया जाता है। अभी तक 30 प्रतिशत मशरूम खाने योग्य हैं।

बता दें खुंब अनुसंधान निदेशालय मशरूम के सभी पहलुओं पर मिशन के रूप में नवीनतम अन्वेषण करने, मशरूम जर्मप्लाज्म व सूचना भंडारण व अतिप्रतिष्ठित विद्योपार्जन केंद्र के रूप में काम कर रहा है। इस निदेशालय को देश के क्षेत्रीय महत्व की समस्याओं के समाधान के साथ-साथ पूरे देश में फैली खुंब अनुसंधान इकाइयों के कार्यक्रमों के समन्वयन का भी जिम्मा सौंपा गया है ताकि देश में खुंब उत्पादन व उत्पादकता दोनों में शीघ्र वृद्धि हो सके। निदेशालय प्रौद्योगिकी के विकास के लिए सभी खाद्य मशरूम की उत्पादकता बढ़ाने के लिए बुनियादी उपयोग, रणनीतिक और व्यवहारिक अनुसंधान का संचालन करना, खाद्य मशरूम पर एक राष्ट्रीय वैज्ञानिक जानकारी का भंडार के रूप में काम कर रहा है। साथ ही वैज्ञानिक नेतृत्व प्रदान और मशरूम उत्पादन के क्षेत्र में विशिष्ठ समस्याओं को सुलझाने के लिए राज्य कृषि विश्वविद्यालयों के साथ अनुसंधान का समन्वयन करना करना भी इसका मकसद है। 
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