लोकप्रिय और ट्रेंडिंग टॉपिक्स

विज्ञापन
Hindi News ›   India News ›   2nd DNPA Dialogue, Experts Says should collaborate on bringing equality to publisher-platform relationship

DNPA: समाचार प्रकाशक-प्लेटफॉर्म संबंधों को संतुलित बनाने में भारत की भूमिका अहम, पढ़ें विशेषज्ञों ने क्या कहा

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: संजीव कुमार झा Updated Fri, 09 Dec 2022 11:51 PM IST
सार

डीएनपीए दिल्ली स्थित संगठन है। देश के 17 अग्रणी समाचार प्रकाशकों की डिजिटल इकाइयां इस संगठन का हिस्सा हैं। यह संगठन ऐसा निष्पक्ष निकाय है, जो डिजिटल परिवेश में समाचार संगठनों और बड़ी टेक कंपनियों के बीच समानता और निष्पक्षता को बढ़ावा देता है।

DNPA Dialogues
DNPA Dialogues - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन (DNPA) का दूसरा डायलॉग शुक्रवार शाम को वर्चुअल माध्यम से आयोजित किया गया। इसमें कनाडा और अमेरिका के जाने-माने विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। इनके साथ ही इंडियन न्यूज पब्लिशिंग बिजनेस से जुड़े लोग भी डायलॉग में शामिल हुए। इस दौरान पब्लिशर और प्लेटफॉर्म संबंधों को डिकोड करने के तरीकों पर मंथन किया गया।



इन दिग्गजों ने दिया संबोधन
डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन (डीएनपीए) द्वारा आयोजित वर्चुअल राउंडटेबल के दौरान न्यूज मीडिया कनाडा के अध्यक्ष और सीईओ पॉल डीगन, कनाडा के मैक्स बेल स्कूल ऑफ पब्लिक पॉलिसी के बेवरब्रुक चेयर टेलर ओवेन, अमेरिका में यूसीएलए इंस्टीट्यूट फॉर टेक्नोलॉजी, लॉ एंड पॉलिसी में फेलो डॉ. कर्टनी रैडश ने अपना संबोधन दिया। सभी ने एक सुर में सहमति व्यक्त की कि स्वैच्छिक सौदे जो तकनीकी कंपनियां समाचार आउटलेट्स के साथ साझा करती हैं, पर्याप्त नहीं हैं। सभी ने कहा कि भारत और अन्य देशों को प्रकाशक-मंच संबंध में समानता लाने के लिए एक साथ आना चाहिए और सहयोग करना चाहिए।


भारत की क्षमता की तारीफ
ओवेन, रैडश, और डीगन ने भारत को उन देशों में गिना, जो बाकी दुनिया को दिखाएंगे कि राजस्व-साझाकरण, पारदर्शिता और जवाबदेही के मामले में प्रकाशक-प्लेटफॉर्म संबंध को कैसे पुनर्संतुलित किया जाए। वक्ताओं ने बताया कि समाचार मीडिया बार्गेनिंग कोड का कनाडाई संस्करण ऑस्ट्रेलिया द्वारा 2021 में लागू किए गए कोड की तुलना में अधिक मजबूत और पारदर्शी है।

दुनिया के सभी देश एक साथ आएं: डॉ. रैडश
सोशल मीडिया और नागरिक पत्रकारिता के एक प्रमुख विशेषज्ञ डॉ. रैडश ने कहा कि अमेरिका, यूरोप, कनाडा, भारत और यूरोप के कुछ देश एक व्यापक, वैश्विक रूपरेखा तैयार करने के लिए अच्छा काम कर रहे हैं। उन्हें विश्व स्तर पर सहयोग करना चाहिए। वास्तव में यूनेस्को एक वैश्विक मॉडल का निर्माण कर रहा है, जो बोत्सवाना और लीबिया जैसे विभिन्न देशों में विधायी प्रयासों को बचाने के लिए काम कर रहा है, जहां कानून का दुरुपयोग किया जा सकता है। वास्तव में हमने अभी देखा कि जेसीपीए (पत्रकारिता प्रतियोगिता और संरक्षण अधिनियम) को हटाकर अमेरिका में ऐसा हो रहा है। इसलिए यूनेस्को के प्रयास से देशों को एक साथ आने और कानून का उपयोग करके वैश्विक नियामक ढांचा तैयार करने में मदद मिलेगी।

कई देश कोड को अपनाने की तैयारी में: डीगन 
कनाडा में समाचार मीडिया के अधिकारों के लिए एक मजबूत आवाज माने जाने वाले डीगन कई देशों को ऑस्ट्रेलिया और कनाडा के समाचार मीडिया कोड से प्रभावित देखकर काफी उत्साहित हैं। उन्होंने कहा कि यह देखकर बहुत अच्छा लगा कि अन्य देश इस पर ध्यान दे रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया पहले ही ऑफ द मार्क है। अगला कनाडा है और फिर भारत, न्यूजीलैंड और कई अन्य देश कनाडा को बहुत करीब से देख रहे हैं। वास्तव में हम सब अमेरिका की ओर भी देख रहे हैं।

कनाडा का बिल ऑस्ट्रेलिया से बेहतर: ओवेन

  • 'बिग टेक' नामक पॉडकास्ट की मेजबानी करने वाले ओवेन ने उन क्षेत्रों की व्याख्या की, जिनमें कनाडा का बिल ऑस्ट्रेलिया के बिल से बेहतर है। ओवेन ने कहा कि हमने जो बड़े सुधार देखे हैं, उनमें से एक यह है कि इस संस्करण की देखरेख एक प्रतियोगिता ब्यूरो के लेंस के बजाय एक प्रसारण नियामक (दूरसंचार आयोग) द्वारा की जाएगी। इसके अलावा ऑस्ट्रेलियाई कोड के साथ एक प्रकाशक के पदनाम के लिए छूट का तंत्र अपरिष्कृत और ठीक से परिभाषित नहीं था। कनाडाई बिल काफी बेहतर है। इसलिए यह नीतिगत हस्तक्षेप का एक बड़ा हिस्सा है, जिसे अन्य देशों की ओर से फॉलो किया जा सकता है।
  • विज्ञापन
  • उन्होंने यह भी बताया कि कनाडा के बिल ने बेहतर परिभाषित किया है कि एक योग्य पत्रकारिता मंच क्या है। इसमें ऑस्ट्रेलिया की तुलना में अधिक पारदर्शिता है। इससे जनता को कुछ अंदाजा होगा कि पैसा कहां जा रहा है। ओवेन ने कैनेडियन कोड की एक और अनूठी विशेषता पर भी प्रकाश डाला। इसमें सामूहिक बार्गेनिंग का यह घटक है जो कलेक्टिव फॉर्म होने के बाद भी प्रकाशकों को शामिल होने की अनुमति देता है।


मेटा-गूगल एकाधिकार पर कही यह बात
ओवेन और डॉ. रैडश ने टेक प्लेटफॉर्म्स के पुशबैक पर प्रकाश डाला। यह भारत के लिए एक सबक की तरह हो सकता है, क्योंकि यह बिग टेक फर्मों को अधिक निष्पक्षता के साथ समाचार प्रकाशकों से निपटने के लिए राजी करने के उद्देश्य से कानून तैयार करने की योजना बना रहा है। ओवेन ने कहा कि गूगल ने एक ऐसी रणनीति का बनाई है जो कनाडाई बिल के जवाब में प्रकाशकों में फूट डालने की कोशिश करती है। इसमें प्रकाशकों के कुछ स्वतंत्र नेटवर्क का समर्थन भी शामिल है। इसलिए कुछ प्रकाशकों के बीच तीखी बहस भी होती है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। 

डॉ. रैडश ने यह कहते हुए चुटकी ली कि मेटा-गूगल एकाधिकार डिजिटल विज्ञापन बाजार को नियंत्रित कर रहा है और राजस्व का एक महत्वपूर्ण हिस्सा प्राप्त कर रहा है। प्रकाशकों को राजस्व का कम हिस्सा मिल रहा है और पैसा कहां जा रहा है, इस पर डेटा और जवाबदेही की कमी है। विज्ञापन उद्योग इस प्रयास में एक सहयोगी है।

क्या है कनाडा के न्यूज मीडिया बार्गेनिंग कोड?
कनाडा का एक्ट यह सुनिश्चित करता है कि गूगल-फेसबुक जैसे बिग टेक डिजिटल समाचार मीडिया की सामग्रियों से मिलने वाले राजस्व की सही साझेदारी करें। कनाडा में एक्ट को इस साल की शुरुआत में बिल सी-18 के रूप में संसद में पेश किया गया था। अगले साल इसे मंजूरी मिल सकती है। अगर यह लागू होता है, तो इससे कनाडा के न्यूजरूम कॉस्ट का लगभग एक-तिहाई कवर किया जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि कनाडा का प्रस्तावित विधेयक ऑस्ट्रेलियाई कोड में एक अहम सुधार है। इसमें काफी हद तक पारदर्शिता है।

क्या है डीएनपीए?
डीएनपीए दिल्ली स्थित संगठन है। देश के 17 अग्रणी समाचार प्रकाशकों की डिजिटल इकाइयां इस संगठन का हिस्सा हैं। यह संगठन ऐसा निष्पक्ष निकाय है, जो डिजिटल परिवेश में समाचार संगठनों और बड़ी टेक कंपनियों के बीच समानता और निष्पक्षता को बढ़ावा देता है। अपनी तरह का यह पहला अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन डीएनपीए के ही विचारों का परिणाम है। इसमें दो देशों के विशेषज्ञ हिस्सा लेंगे और मीडिया प्रकाशकों को अपने विचारों का आदान-प्रदान करने के लिए मंच मिलेगा। डीएनपीए डायलॉग्स का दूसरा चरण नौ दिसंबर को प्रस्तावित है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

एप में पढ़ें
जानिए अपना दैनिक राशिफल बेहतर अनुभव के साथ सिर्फ अमर उजाला एप पर
अभी नहीं

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
डेली पॉडकास्ट सुनने के लिए सब्सक्राइब करें

क्लिप सुनें

00:00
00:00