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Ashok Gehlot: सोनिया गांधी से मिलने के बाद अशोक गहलोत ने वापस ली अध्यक्ष पद की दावेदारी, पढ़ें बयान के मायने

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Thu, 29 Sep 2022 04:48 PM IST
सार

अशोक गहलोत ने अध्यक्ष पद की दावेदारी से मना कर दिया है। कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष से बैठक के बाद उन्होंने जो बयान दिया है उससे एक बार फिर साफ हो गया कि वे राजस्थान के सीएम पद को छोड़ना नहीं चाहते हैं। पढ़ें उनके बयान के मायने... 

अशोक गहलोत, राहुल गांधी, सोनिया गांधी
अशोक गहलोत, राहुल गांधी, सोनिया गांधी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

कांग्रेस अध्यक्ष पद चुनाव के लिए शुरू हुआ सियासी घमासान अभी शांत नहीं हुआ है। पद के सबसे प्रवल दावेदार अशोक गहलोत ने कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी से दिल्ली में उनके आवास 10 जनपथ पर बैठक की । बैठक के बाद उन्होंने जो बयान दिया उसने सबको हैरान कर दिया है। उन्होंने अब चुनाव नहीं लड़ने का फैसला लिया है। उन्होंने कहा कि मैनें सोनिया गांधी से माफी मांग ली है। 



उन्होंने कहा कि वे आगे मुख्यमंत्री रहेंगे कि नहीं यह नहीं पता। बीते दिन जो भी हुआ उसके लिए मैंने सोनिया जी से माफी मांग ली है। बीते 50 सालों में कांग्रेस पार्टी में राजीव जी के बाद सोनिया जी के समय से मैंने वफादार सिपाही के तौर पर काम किया। मुझे हमेशा बड़ी जिम्मेदारी दी गई, चाहे प्रदेश अध्यक्ष हो या केंद्रीय मंत्री। सोनिया जी के आशीर्वाद से मैं तीसरी बार मुख्यमंत्री बना हूं। उन्होंने आगे कहा कि दो दिन पहले जो घटना हुई, उसने हम सबको हिलाकर रख दिया है। उसका  मुझे दुख है, और वो सिर्फ मैं ही जान सकता हूं। मैंने सोनिाय जी से भी सॉरी कहा है। क्योंकि पूरे देश में मैसेज चला गया कि मैं मुख्यमंत्री बने रहना चाहता हूं, इसलिए यह सब कुछ हो रहा है। मैंने सोनिया जी से भी माफ़ी मांगी है, क्योंकि एक लाइन का प्रस्ताव पास नहीं करवा पाया। अपने बयान में अध्यक्ष पद की दावेदारी पर उन्होंने कहा कि मैंने फैसला किया है, अब मैं इस माहौल में चुनाव नहीं लडूंगा।  उनके इस बयान से कई बातें निकलकर सामने आ रही हैं। 


सीएम पद नहीं छोड़ना चाहते
अशोकर गहलोत के कांग्रेस अध्यक्ष पद की रेस से बाहर होने का फैसला करने के बाद ये लगभग साफ हो गया है कि वे ही अब राजस्थान के सीएम पद पर बने रहेंगे। उन्होंने एक झटके में सचिन पायलट की आशाओं को धूमिल कर दिया है। हालांकि उन्होंने ये भी कहा है कि उनके सीएम बने रहने का फैसला सोनिया गांधी ही करेंगी। अपने इस बयान से पहले से ही वह ऐसे बयान दे रहे थे जिनसे यही बात निकलकर सामने आ रही थी कि वे राज्य के मुख्यमंत्री बने रहना चाहते हैं। अध्यक्ष पद के लिए उनके ऊपर आलाकमान का प्रेशर था, जिसे उन्होंने अब खत्म कर दिया है। 

सचिन पायलट का विरोध
दो दिन पहले हुई सियासी उठापटक से पहले भी सचिन पायलट और अशोक गहलोत के बीच टकराहट दिखी है। ताजा घटनाक्रम में अशोक गहलोत गुट के विधायक पहले ही कह रहे थे कि वे किसी भी कीमत पर सचिन पायलट को सीएम के पद पर नहीं देखना चाहते हैं। इन विधायकों का कहना था कि बगावत के समय साथ देने वाले 102 विधायकों में से किसी को भी सीएम बना दिया जाए, हम उसका साथ देंगे। 

आलाकमान पर दबाव की राजनीति
अशोक गहलोत ने एक बार फिर अपने बयान के जरिए कांग्रेस आलाकमान पर भावनात्मक रूप से दबाव बनाने की कोशिश की है। उन्होंने सोनिया गांधी के साध बैठक के बाद मीडिया से कहा कि 'बीते 50 सालों में कांग्रेस पार्टी में राजीव जी के बाद सोनिया जी के समय से मैंने वफादार सिपाही के तौर पर काम किया। मुझे हमेशा बड़ी जिम्मेदारी दी गई, चाहे प्रदेश अध्यक्ष हो या केंद्रीय मंत्री। सोनिया जी के आशीर्वाद से मैं तीसरी बार मुख्यमंत्री बना हूं।' उन्होंने इस तरह का बयान देकर कोशिश की है कि उन्हें सीएम पद पर बरकरार रखा जाए। इससे पहले जिस दौरान पायलट केरल में राहुल, फिर दिल्ली आकर सोनिया और प्रियंका से मिलकर अपना दावा मजबूत कर रहे थे, गहलोत उस दौरान भी राहुल को मनाने में सक्रिय रहे, ताकि उन्हें सीएम पद न छोड़ना पड़े। 

राहुल-सोनिया के इशारे पर नहीं चलना चाहते
कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए मना करने के बाद उन्होंने एक ओर जहां खुद को कांग्रेस का सच्चा सिपाही बताया है। वहीं, उन्होंने इस बात के भी संकेत दिए हैं कि वे राहुल और सोनिया गांधी  के हाथों की कठपुतली बनकर रहना नहीं चाहते। दरअसल, वह पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए गांधी परिवार की पहली पसंद थे। अगर वे अध्यक्ष बन जाते तो एक ओर तो उनके हाथ से सीएम पद की कुर्सी जाती, वहीं दूसरी ओर सोनिया गांधी और राहुल गांधी के दवाब में उन्हें काम करना पड़ता। 
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कांटों भरा ताज लेने को तैयार नहीं
2024 में होने वाले लोकसभा चुनावों से पहले गुजरात, राजस्थान, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश और मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में जो भी अभी कांग्रेस का अध्यक्ष बनेगा उसके लिए ये चुनाव नाक की लड़ाई होंगे। वहीं, इन चुनावों में जो भी परिणाम निकलेगा उसके लिए कांग्रेस का होने वाला अध्यक्ष ही जिम्मेदार माना जाएगा। ऐसे में अशोक गहलोत ये कांटों भरा ताज लेने के लिए तैयार नहीं हैं। 

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