अमर उजाला असर: कुर्ता-पायजामा पहनकर निरीक्षण करने गए 'बीएसएफ' आईजी को हटाया, मूल कैडर में वापस भेजा

जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 19 Jun 2021 05:11 PM IST

सार

सूत्रों के मुताबिक, सलामी लेने और बैठक करने जैसी कई रस्म ऐसी होती हैं, जो वर्दी में ही पूरी की जाती हैं। केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में अनुशासन पर खास ध्यान दिया जाता है, इसलिए बीएसएफ के कैडर अधिकारियों को आईजी साहब का व्यवहार और ड्रेस रास नहीं आया...
बीएसएफ आईजी
बीएसएफ आईजी - फोटो : Amar Ujala (File)
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विस्तार

सीमा सुरक्षा बल 'बीएसएफ' में नॉर्थ बंगाल फ्रंटियर के आईपीएस अधिकारी 'आईजी' सुनील कुमार पर केंद्रीय गृह मंत्रालय की गाज गिर गई है। उन पर आरोप है कि वे कुर्ता पायजामा व चप्पल पहनकर डीआईजी हेडक्वार्टर का वार्षिक निरीक्षण करने पहुंचे थे। यह भी कहा गया कि उन्होंने अधिकारी मेस में दो दिन तक रहने और खाने का बिल नहीं चुकाया। यह खबर बीएसएफ मुख्यालय के अलावा नॉर्थ ब्लॉक तक पहुंच चुकी थी। इस घटना के बाद आईजी सुनील कुमार को दिल्ली बुला लिया गया था। अब उन पर गाज गिर गई है। प्रतिनियुक्ति की अवधि पूरी होने से पहले ही उन्हें अपने मूल कैडर 'जम्मू-कश्मीर' जो अब 'एजीएमयूटी' हो गया है, वापस भेज दिया है।
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यह भी पढ़ें: प्रोटोकॉल: कुर्ता-पायजामा और चप्पल पहनकर निरीक्षण करने पहुंचे बीएसएफ आईजी, खाने का बिल भी नहीं चुकाया

बता दें कि जम्मू-कश्मीर में 96वें बैच के आईपीएस अधिकारी सुनील कुमार को पिछले साल बीएसएफ में नियुक्त किया गया था। उन्हें आईजी नॉर्थ बंगाल के पद पर लगाया था। बीएसएफ के सूत्रों का कहना है कि आईजी के खिलाफ कथित पर तौर पहले भी इस तरह की शिकायतें मिलती रही हैं। पिछले दिनों जब वे डीआईजी हेडक्वार्टर का निरीक्षण करने पहुंचे तो कई प्रोटोकॉल टूट गए थे। केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में अनुशासन पर खास ध्यान दिया जाता है, इसलिए बीएसएफ के कैडर अधिकारियों को आईजी साहब का व्यवहार और ड्रेस रास नहीं आया। आईजी, कुर्ता पायजामा पहनकर मेस में आ गए। यहां के लिए ड्रेस प्रोटोकॉल का पालन किया जाता है। जिस वक्त वे मेस में पहुंचे, वहां पर बीएसएफ के सभी अधिकारी फुल ड्रेस में थे। सूत्रों के मुताबिक, सलामी लेने और बैठक करने जैसी कई रस्म ऐसी होती हैं, जो वर्दी में ही पूरी की जाती हैं। आईजी साहब ऐसी जगहों पर भी कुर्ता पायजामा पहने हुए नजर आए थे। दो दिन रहने के बाद आईजी ने मेस के खाने का बिल भी नहीं चुकाया।

खास बात ये है कि डीआईजी हेडक्वार्टर से उनके कार्यालय की दूरी महज पंद्रह मिनट में तय हो जाती है। बीएसएफ के सभी कैडर अधिकारी अपनी सेरेमोनियल यूनिफॉर्म में थे। आईजी साहब वहां ऑफिशियल लंच पर आईजी साहब कुर्ता पायजामा और चप्पल पहन कर पहुंच गए। कैडर अधिकारियों का कहना है कि आईपीएस आईजी की इन हरकतों से बल का प्रोटोकॉल टूटा है। बल के अनुशासन को ठेस लगी है। ऑफिसर मैस के अपने नियम होते हैं, जिनका पालन सभी अधिकारियों और जवानों द्वारा किया जाता है। वहां पर जूनियर और सीनियर, दोनों तरह के अधिकारी होते हैं। ऑफिसर मेस की एक गरिमा होती है। बिल के बारे में जब आईजी से पूछा गया तो उन्होंने बिल की एडजस्टमेंट के लिए एस्टेब्लिशमेंट के अफसरों की तरफ इशारा कर दिया। नियमानुसार, आईजी को मेस के खाने का बिल क्लेम करना होता है।

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