Covid Vaccines: सितंबर में जब भारत में हर दिन 80 लाख डोज लग रहे थे, तब वैक्सीनेशन में 50 से अधिक देश पिछड़ रहे थे

Pratibha Jyoti प्रतिभा ज्योति
Updated Fri, 22 Oct 2021 06:37 PM IST

सार

डब्ल्यूएचओ का कहना है कि अधिक वैक्सीनेशन वाले देशों में कई मध्यम या उच्च-आय वर्ग वाले हैं और जो वैक्सीन बनाने वाली कंपनियों से सीधी खरीद कर रहे हैं। जबकि गरीब देश इसमें पिछड़ रहे हैं। डब्ल्यूएचओ ने वर्ष के अंत तक 40 फीसदी और 2022 के मध्य तक 70 फीसदी से अधिक टीकाकरण का लक्ष्य रखा है। 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के मौके पर सरकार ने टीकाकरण के लिए देशभर में विशेष शिविरों का आयोजन किया था। कर्नाटक के चिकमगलूर में भी बड़ी संख्या में लोग वैक्सीन लगवाने कैंपों में पहुंचे- (फाइल फोटो)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के मौके पर सरकार ने टीकाकरण के लिए देशभर में विशेष शिविरों का आयोजन किया था। कर्नाटक के चिकमगलूर में भी बड़ी संख्या में लोग वैक्सीन लगवाने कैंपों में पहुंचे- (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
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विस्तार

अक्तूबर का महीन अभी खत्म भी नहीं हुआ है लेकिन हमने गुरुवार को 100 करोड़ वैक्सीन लगा दिए। वहीं, सितंबर महीने में 50 से अधिक देश विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की ओर से तय किए गए 10 फीसदी के वैक्सीनेशन के लक्ष्य से चूक गए। इनमें से ज्यादातर देश अफ्रीका के हैं। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक सितंबर तक अफ्रीका में पूरी तरह से टीकाकरण कराने वालों का कुल आंकड़ा महज 4.4 फीसदी था।
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जबकि भारत ने सितंबर में ही लगभग 80 करोड़ के आंकड़े को पार कर लिया था। 17 सितंबर को नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर रिकॉर्ड 2.50 करोड़ वैक्सीनेशन किया गया। पिछले पांच महीनों में भारत ने कोरोना वैक्सीनेशन अभियान में काफी बेहतर प्रदर्शन किया। सितंबर का महीना तो काबिल-ए-तारीफ रहा, जब हर दिन लगभग 80 लाख लोगों को वैक्सीन लगाया गया। ब्लूमबर्ग के वैक्सीन ट्रैकर से मिले आंकड़ों के मुताबिक भारत में 51.2 फीसदी लोगों को  वैक्सीन की पहली डोज और 21 फीसदी को दोनों डोज लग चुकी है। वहीं अमेरिका में 66.1 प्रतिशत लोगों को पहली डोज और 57.1 फीसदी लोगों को दोनों लगाई जा चुकी है। 


दुनिया भर के कम से कम 196 देशों में, 6.5 बिलियन से अधिक लोगों को वैक्सीन की खुराक दी जा चुकी है। हालांकि, दुनिया के विभिन्न हिस्सों में प्रगति की गति में बहुत अंतर है। भारत, चीन, अमेरिका समेत कई देशों ने अपनी आबादी के एक बड़े हिस्से को सुरक्षित खुराक दी है, लेकिन कई देश अभी भी बहुत पीछे हैं। खासतौर पर अफ्रीकी देशों में टीके की आपूर्ति को लेकर बड़ी समस्या आ रही है। कई गरीब देश कोवैक्स जो गावी की नेतृत्व वाली योजना है उसकी डिलीवरी पर भरोसा कर रहे हैं, जो कि डब्ल्यूएचओ और कोलिजन फॉर एपिडेमिक प्रिपेयर्डनेस इनोवेशन (सीईपीआई) के साथ मिलकर चलाई जा रही है। 
 
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