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Corona Alert: सभी सैंपलों की नहीं हो रही है जीनोम सिक्वेंसिंग, लक्षणों से खुद पहचानें डेल्टा है या ओमिक्रॉन

Rahul Sampal राहुल संपाल
Updated Sat, 15 Jan 2022 06:24 PM IST

सार

सफदरजंग अस्पताल के प्रोफेसर निदेशक कम्युनिटी मेडिसिन डॉ. जुगल किशोर ने अमर उजाला को बताया कि कोविड की किसी भी जांच में यह सामने नहीं आता है कि कोविड पॉजिटिव मरीज किस वैरिएंट से संक्रमित है। उसे डेल्टा है या फिर नए वैरिएंट ओमिक्रॉन से संक्रमित है। इसका पता जीनोम सीक्वेंसिंग में ही चलता है...
कोरोना की जांच कराते लोग
कोरोना की जांच कराते लोग - फोटो : अमर उजाला (फाइल फोटो)
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विस्तार

भारत में रोजाना कोरोना मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। ज्यादातर मरीजों के ओमिक्रॉन वैरिएंट से संक्रमित होने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि अभी मरीजों के सैंपलों की बिना जीनोम सीक्वेंसिंग जांच हुए इस बारे में कुछ भी कहना मुश्किल है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में जीनोम सीक्वेंसिंग की सुविधा कम होने से बहुत कम संख्या में ही लोगों में वैरिएंट की जांच हो पा रही है। फिलहाल अभी लोगों में ओमिक्रॉन वैरिएंट के लक्षणों को देख कर ही अनुमान लगाया जा सकता है।

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कोविड जांच से वैरिएंट का पता नहीं चलता

हालांकि कोविड संक्रमित मरीज इन बातों पर गौर करें तो वे आसानी से अंदाजा लगा सकते हैं कि वे कौन से वैरिएंट से संक्रमित हैं। सफदरजंग अस्पताल के प्रोफेसर निदेशक कम्युनिटी मेडिसिन डॉ. जुगल किशोर ने अमर उजाला को बताया कि कोविड की किसी भी जांच में यह सामने नहीं आता है कि कोविड पॉजिटिव मरीज किस वैरिएंट से संक्रमित है। उसे डेल्टा है या फिर नए वैरिएंट ओमिक्रॉन से संक्रमित है। इसका पता जीनोम सीक्वेंसिंग में ही चलता है। उदाहरण के लिए आरटीपीसीआर के माध्यम से देश में दो लाख कोविड केस रोजाना आ रहे हैं, लेकिन ओमिक्रॉन या अन्य किसी वैरिएंट की जांच के लिए सिर्फ 10 हजार सैंपल ही जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए जा रहे हैं। ऐसे में बाकी के 1.90 लाख लोगों को डेल्टा है या ओमिक्रॉन है, इसका तो पता ही नहीं चलेगा।

डेल्टा के मुकाबले तेजी से फैल रहा ओमिक्रोन

डॉ जुगल किशोर ने बताया कि भारत में बहुत कम संख्या में ही सैंपलों की जीनोम सीक्वेंसिंग की जा रही है। लेकिन जितने भी केस जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए जा रहे हैं उनमें से करीब 80 फीसदी मामलों में कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट की पुष्टि हो रही है। सीक्वेंसिंग के लिए ये सैंपल रेंडम लिए जाते हैं। यानि कि जहां भी कोरोना के अचानक कई केस एक साथ सामने आते हैं, वहां से कुछ सैंपलों में वैरिएंट की जांच की जाती है। ऐसे में सीधे तौर पर तो यह नहीं कहा जा सकता कि भारत में ज्यादातर मरीज ओमिक्रॉन के हैं लेकिन आंकड़ों के आधार पर अनुमान लगाया जा सकता है।

पहले वैरिएंट के मुकाबले देखा गया है कि ओमिक्रॉन इनसे करीब 70 फीसदी ज्यादा संक्रामक है और तेजी से फैलता है। यह एयरबोर्न है ज्यादा लोगों को संक्रमित कर सकता है। दूसरी तरफ डेल्टा वैरिएंट की तुलना में अभी कोरोना मरीजों के मामले कई गुना देखे जा रहे हैं। लिहाजा इसके आधार पर भी कहा जा सकता है कि देश में ओमिक्रॉन वैरिएंट ही इस बार प्रमुखता से संक्रमण फैला रहा है।

मरीज इन लक्षणों का रखें विशेष ध्यान

उनका कहना है कि अप्रैल से जून 2021 के मुकाबले इस बार कोरोना होने पर हल्के लक्षण सामने आ रहे हैं। मसलन इसमें एक या दो दिन बुखार, सर्दी, खांसी, जुकाम, बदन दर्द या सिरदर्द आदि देखे जा रहे हैं। वहीं कई मामलों में मरीजों को कोई लक्षण ही नहीं हैं। इस बार मॉडरेट या गंभीर मरीजों की संख्या काफी कम है। खास बात है कि दुनिया भर में ओमिक्रॉन के मरीजों में कोरोना के लक्षण काफी हल्के हैं, जबकि डेल्टा के काफी गंभीर। जैसे उल्टी, दस्त, सांस फूलने, ऑक्सीजन स्तर घटने, बीपी कम होने की समस्याएं सामने आ रही हैं। ऐसे में यह माना जा सकता है कि इस बार ओमिक्रॉन ही भारत में संक्रमण की प्रमुख वजह है।

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