किसान आंदोलन: प्रधानमंत्री का बयान बताता है भारत बंद की 'सफलता', भाजपा को सबक सिखाने के लिए अन्नदाता कर रहे बड़ी तैयारी!

Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Tue, 28 Sep 2021 02:30 PM IST

सार

किसान नेता प्रतिभा शिंदे ने अमर उजाला से कहा कि गुजरात के किसानों की स्थिति बदलने का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दावा पूरी तरह सही नहीं है। उन्होंने कहा कि सरदार सरोवर बांध बनने के दौरान गुजरात-मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के लगभग 172 गांव के आदिवासी विस्थापित हुए हैं। आज तक इन हजारों परिवारों का पुनर्वास नहीं किया जा सका है...
भारत बंद के समर्थन पर प्रदर्शन करते लोग।
भारत बंद के समर्थन पर प्रदर्शन करते लोग। - फोटो : अमर उजाला
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किसानों ने 27 सितंबर को भारत बंद का सफल आयोजन कर केंद्र पर गहरा असर डाला है। शायद इसी का असर है कि मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि उन्होंने गुजरात के किसानों की जिंदगी बदलने में सफलता पाई है। गुजरात के कच्छ जैसे इलाकों में जहां कोई खेतीबाड़ी नहीं होती, वहां पानी इत्यादि की सुविधा देने से आज पूरे साल खेती हो रही है। प्रधानमंत्री ने इशारा किया कि केंद्र सरकार के नए कृषि कानूनों से आने वाले दिनों में किसानों की स्थिति बेहतर होगी और आजादी के 100वें वर्ष तक उनकी स्थिति में बड़ा सुधार होगा।
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वहीं, किसानों ने प्रधानमंत्री के इस बयान को भारत बंद के सफल आयोजन का असर बताया है। किसान नेता पुष्पेंद्र चौधरी ने अमर उजाला से कहा कि कोई भी आंदोलन लंबे समय तक खिंचे तो इसका असर खत्म या बेहद कमजोर हो जाता है। ऐसे आंदोलन से जुड़े लोग भी छिटकने लगते हैं, लेकिन केंद्र सरकार ने देखा कि 10 महीने बाद भी किसान अपनी मांगों के प्रति न केवल प्रतिबद्ध हैं, बल्कि वे और ज्यादा पुरजोर तरीके से संगठित हुए हैं। इससे सरकार को यह संदेश गया है कि बिना किसानों की मांग माने हुए अब कोई रास्ता निकलना संभव नहीं है।

किसानों ने दिखाई ताकत

भारत बंद के बाद अब किसानों के पास क्या रास्ता है? किसान नेता ने कहा कि किसानों ने अपने संगठित होने की ताकत दिखा दी है। किसान पूरी ताकत से उत्तर प्रदेश चुनाव में भाजपा को हराने की अपील करेंगे। यदि भाजपा उत्तर प्रदेश में सत्ता से बेदखल हो जाती है तो केंद्र को यह संदेश चला जाएगा कि 2024 के आम चुनाव में उसकी सत्ता भी खतरे में पड़ सकती है। किसान नेता ने कहा कि इस लोकतांत्रिक प्रक्रिया से हम सरकार पर दबाव डालकर कृषि कानूनों को वापस लेने का दबाव बनाएंगे।

महाराष्ट्र-गुजरात के आदिवासी इलाकों में काम करने वाली किसान नेता प्रतिभा शिंदे ने अमर उजाला से कहा कि गुजरात के किसानों की स्थिति बदलने का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दावा पूरी तरह सही नहीं है। उन्होंने कहा कि सरदार सरोवर बांध बनने के दौरान गुजरात-मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के लगभग 172 गांव के आदिवासी विस्थापित हुए हैं। आज तक इन हजारों परिवारों का पुनर्वास नहीं किया जा सका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बताना चाहिए कि क्या ये आदिवासी किसान उनकी प्रमुखता में आते हैं या नहीं।

प्रतिभा शिंदे ने कहा कि गुजरात के अनेक इलाके पहले से ही समृद्ध रहे हैं, जबकि दूर-दराज के इलाके पहले की तरह आज भी संकट झेल रहे हैं। यदि प्रधानमंत्री का दावा सही होता तो गुजरात के किसान भारत बंद का मजबूती के साथ समर्थन न करते। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को जमीनी सच्चाई समझनी चाहिए और किसानों की समस्याओं को समझते हुए एक रास्ता निकालना चाहिए।

पीएम बोले, कच्छ में 12 महीने खेती

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 28 सितंबर को रायपुर के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ बायोटिक स्ट्रेस मैनेजमेंट (National Institute Of Biotic Stress Management) का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने 35 फसलों की उन्नत किस्मों को भी जनता के सामने पेश किया जो प्रतिकूल वातावरण में भी बेहतर उत्पादन कर सकते हैं। प्रधानमंत्री ने मोटे अनाज के उत्पादन और उपभोग को बढ़ावा देने के लिए किसानों को प्रोत्साहित करने की बात कही।

इस दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने गुजरात के किसानों की किस्मत बदली। उन्होंने सिंचाई और अन्य सुविधाएं प्रदान की, जिससे आज गुजरात के कच्छ जैसे इलाकों में भी साल के 12 महीने खेती होती है जहां साल के कुछ महीने ही खेती होती थी।
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