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जानिए, एफएटीएफ में ब्लैक लिस्ट होने से क्यों डरता है पाकिस्तान

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: संजीव कुमार झा Updated Sat, 07 Nov 2020 04:25 PM IST
पाक पीएम इमरान खान (फाइल फोटो)
पाक पीएम इमरान खान (फाइल फोटो) - फोटो : ANI
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पाकिस्तान तमाम कोशिशों के बावजूद एफएटीएफ के ग्रे लिस्ट से बाहर नहीं आ सका है। अब उसे ब्लैक लिस्ट किए जाने की संभावना जताई जा रही है। पिछले महीने संगठन की बैठक में पाकिस्तान ने जहां खुद को ग्रे लिस्ट से बाहर निकालने के लिए कई तर्क दिए, लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी, वहीं भारत ने उसे ब्लैक लिस्ट में डालने की मांग की।  



बता दें कि यूरोप में आतंकवाद की नई लहर को देखते हुए अब वैश्विक राजनीति में देशों की ओर से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष टेरर फंडिंग का मामला गंभीर होता जा रहा है। ऐसे में इसे रोकने के लिए ही बने एफएटीएफ और इसकी ग्रे व ब्लैक लिस्ट के बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं।


सबसे पहले जानते हैं एफएटीएफ क्या है और क्यों की गई इसकी स्थापना
फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स यानी एफएटीएफ टेरर फंडिंग पर नजर रखने वाली संस्था है। दूसरे शब्दों में कहें तो यह आतंकियों को 'पालने-पोसने' के लिए पैसा मुहैया कराने वालों पर नजर रखने वाली एजेंसी है। इसकी स्थापना फ्रांस की राजधानी पेरिस में जी-7 समूह के देशों ने की थी। 

एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट क्या है
मनी लॉन्ड्रिंग या टेरर फंडिंग जैसी अनियमितताएं रोकने के लिए एफएटीएफ के 27 नियम हैं, जिनका पालन हर सदस्य देश को करना होता है। इनमें से किसी भी नियम का उल्लंघन करने वाले देश को ग्रे लिस्ट में रखा जाता है। यह एक तरह से ये चेतावनी सूची है।

कब कोई देश ब्लैक लिस्ट की श्रेणी में आता है
शर्तों का पालन न करने वाले देशों को पहले चेतावनी दी जाती है। साथ ही कुछ देशों की एक समिति बनाकर निगरानी की जाती है। यदि देश फिर भी स्थिति में सुधार नहीं करता है तो उसे ब्लैक लिस्ट में डालने का प्रस्ताव लाया जाता है।

पाकिस्तान ग्रे लिस्ट में क्यों है शामिल
पाकिस्तान जून 2018 से ग्रे लिस्ट में है। इससे पहले वह 2012 से 2015 तक भी इस लिस्ट में रहा। पाकिस्तान को 27 शर्तों को पूरा करने के लिए सितंबर 2019 तक का समय मिला था। 2020 में पाकिस्तान ने 21 शर्तों का पालन तो कर लिया, लेकिन अब भी छह शर्तों का पालन नहीं कर पाया है और इसी वजह से वह ग्रे लिस्ट में बना हुआ है।

अब जानिए आखिर पाकिस्तान ब्लैकलिस्ट होने से क्यों डरता है
पाकिस्तान के ब्लैकलिस्ट होने का मतलब है कि ईरान की तरह पाकिस्तानी बैंकों की डीलिंग अंतरराष्ट्रीय जगत में खत्म हो जाएगी और कोई भी अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थान पाकिस्तान को आर्थिक मदद नहीं करेगा।

पाक के ब्लैकलिस्ट होने से पाकिस्तानी रुपये पर भारी दबाव पड़ेगा और देश की अर्थव्यवस्था काफी नीचे गिरेगी। इमरान ने कहा कि पाकिस्तान के पास विदेशी मुद्रा रिजर्व भी नहीं है जो पाकिस्तानी रुपये को बचा सके। पीएम इमरान के अनुसार अगर पाकिस्तान को ब्लैकलिस्ट किया जाता है तो महंगाई आसमान पर पहुंच जाएगी। 

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