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NMCG Meeting: जियो-मैपिंग और वेटलैंड संरक्षण पर सरकार ने दी 13 प्रोजेक्ट को मंजूरी, 818 करोड़ लागत

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Thu, 18 Aug 2022 10:04 PM IST
सार

गंगा नदी और उसकी सहायक नदियों के वैज्ञानिक भू-मैपिंग के लिए तीन परियोजनाओं को मंजूरी दी गई। इनमें एनईईआर द्वारा 'फ्लुवियल जियोमॉर्फोलॉजी मैपिंग ऑफ हिंडन रिवर बेसिन' शामिल है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार

सरकार ने लगभग 818 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से भू-मैपिंग, सीवरेज प्रबंधन और आर्द्रभूमि संरक्षण से संबंधित 13 परियोजनाओं को मंजूरी दी है। जल शक्ति मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) ने बुधवार को एनएमसीजी के महानिदेशक जी अशोक कुमार की अध्यक्षता में कार्यकारी समिति की 44वीं बैठक का आयोजन किया। बैठक में उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और दिल्ली के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में भू-मानचित्रण से संबंधित 13 परियोजनाएं, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल में सीवरेज प्रबंधन, उत्तराखंड में रिवरफ्रंट विकास कार्य, आर्द्रभूमि संरक्षण, अर्थ गंगा और फाटकों का नवीनीकरण, कोलकाता में बेलिया सर्कुलर कैनाल को मंजूरी दी गई। इन परियोजनाओं की अनुमानित लागत लगभग 818 करोड़ रुपये है।



गंगा नदी और उसकी सहायक नदियों के वैज्ञानिक भू-मैपिंग के लिए तीन परियोजनाओं को मंजूरी दी गई। इनमें एनईईआर द्वारा 'फ्लुवियल जियोमॉर्फोलॉजी मैपिंग ऑफ हिंडन रिवर बेसिन' शामिल है। हिंडन नदी गंगा की दूसरी स्तर की सहायक नदी है। प्रदूषण के बिंदु स्रोतों के मानचित्रण के साथ-साथ मानवजनित गतिविधि या प्राकृतिक कारकों द्वारा लाए गए फ्लूवियल भू-आकृति विज्ञान परिवर्तन सहायक नदी के कायाकल्प में सहायता करेंगे और मुख्य नदी प्रणालियों के स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए एक गहरा दृष्टिकोण लाएंगे।


इस परियोजना के मुख्य उद्देश्य हिंडन नदी बेसिन के साथ नदी के भू-आकृति विज्ञान की विशेषताओं का चित्रण, नदी के भू-आकृति विज्ञान में दशकीय परिवर्तनों की पहचान, धारा नेटवर्क का चित्रण और उपयुक्त पुनर्भरण क्षेत्र, हिंडन नदी के संगम के करीब प्रदूषक इनपुट के बिंदु स्रोतों का चित्रण करना है। इस परियोजना की अनुमानित लागत 16.4 लाख रुपये है। देहरादून के लिए इसी तरह के एक प्रस्ताव - 'जियो-गंगा: अंतरिक्ष-आधारित मानचित्रण और गंगा नदी की निगरानी' यूएवी / सर्वेक्षण और रिमोट सेंसिंग तकनीकों का उपयोग करने वाली 5.4 करोड़ रुपये की लागत योजना को भी मंजूरी दी गई है। यह परियोजना भारतीय इंस्टीट्यूट ऑफ रिमोट सेंसिग, देहरादून द्वारा क्रियान्वित की जाएगी। 
 

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