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Gujarat Results: सूरत की सभी सीटों पर BJP की चमक बरकरार, PM की एक रैली से आप को मिली करारी हार

Rahul Sampal राहुल संपाल
Updated Thu, 08 Dec 2022 04:13 PM IST
सार

भाजपा का गढ़ कहा जाने वाला सूरत इस बार के चुनाव में काफी चर्चित रहा। शहर की 12 सीट सहित जिले की 16 सीटों पर पूरे गुजरात की नजर थी। भारतीय जनता पार्टी का करीब 20 साल से यहां दबदबा है। पिछले 15 वर्षों से भाजपा शहर की एक भी सीट नहीं हारी है। 2022 के विधानसभा चुनाव में भी भाजपा ने यह रिकॉर्ड कायम रखा है।

भाजपा
भाजपा - फोटो : ANI

विस्तार

देश की डायमंड सिटी कहे जाने वाले सूरत में भाजपा की चमक बरकरार हैं। चुनाव प्रचार के दौरान आदमी पार्टी ने इसे धुंधला करने की कोशिश जरूर की, लेकिन गुरुवार को आए चुनाव नतीजों ने सब कुछ साफ कर दिया। सभी सीटों पर आम आदमी पार्टी और कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा। जिले की 16 सीटें जीतकर भाजपा ने अपना दबदबा कायम रखा है।



भाजपा का गढ़ कहा जाने वाला सूरत इस बार के चुनाव में काफी चर्चित रहा। शहर की 12 सीट सहित जिले की 16 सीटों पर पूरे गुजरात की नजर थी। भारतीय जनता पार्टी का करीब 20 साल से यहां दबदबा है। पिछले 15 वर्षों से भाजपा शहर की एक भी सीट नहीं हारी है। 2022 के विधानसभा चुनाव में भी भाजपा ने यह रिकॉर्ड कायम रखा है। विधानसभा चुनाव के दौरान आम आदमी पार्टी का फोकस इसी शहर पर था। क्योंकि आप ने यहीं से गुजरात में पहली जीत का स्वाद चखा था। इस जीत के बाद आप को यहां अपनी जमीन नजर आने लगी और इसी के दम पर पार्टी चुनावी रण में उतरी।


सूरत जिले की वराछा, कतारगाम, करंज, ओलपाड़ और कामरेज पाटीदार बहुल सीट पर भाजपा और आप के बीच कड़ा मुकाबला था। आप के 27 पार्षद भी इन्हीं क्षेत्रों से महानगर पालिका में चुनकर आए। आम आदमी पार्टी ने यहां एक साल में 20 से ज्यादा सभाएं की। इनमें दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल, पंजाब के सीएम भगवंत मान,राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा शामिल है। आप के चुनावी मैदान में उतरने के बाद भाजपा सूरत में पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरी। भाजपा के लिए सूरत की एक भी सीट गंवाना बड़े नुकसान के समान है। सूरत में दो लोकसभा सीटे है। इनमें एक सूरत जहां से केंद्रीय मंत्री दर्शना विक्रम जरदोश सांसद है। वहीं नवसारी सीट से भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सीआर पाटिल चुनकर आते है। नवसारी सीट का आधा हिस्सा सूरत में आता है। ऐसे में प्रदेश अध्यक्ष पाटिल के लिए सूरत की एक सीट भी नहीं जाने देना एक चुनौती के समान है। आप की इस ताबड़तोड़ रैलियों के बाद पाटीदार बहुल सीटों को बचाने के लिए भाजपा ने अंतिम दिनों में पीएम मोदी के वराछा में रोड शो और सभाएं करवाई। जिसका फायदा भाजपा को पूरे जिले में देखने को मिला।

कांग्रेस ने एकमात्र ग्रामीण सीट भी गंवाई
इस बार के चुनाव में कांग्रेस पार्टी को सूरत शहर की एक मात्र सीट सूरत पूर्व और ग्रामीण इलाके की मांडवी सीट पर जीत की उम्मीद थी। सूरत पूर्व से कांग्रेस के उम्मीदवार असलम सायकलवाला 43 फीसदी मुस्लिम मतदाताओं के सहारे चुनावी मैदान में थे। लेकिन उन्हें भी हार का सामना करना पड़ा। पूरे सूरत शहर में कांग्रेस बीते 15 सालों से एक भी सीट नहीं जीत पाई है। 2002 में सूरत शहर में 6 सीटें थी। 2002 के विधानसभा चुनाव में सूरत पूर्व सीट पर कांग्रेस के उम्मीदवार मनीष गिलिटवाला ने जीत हासिल की थी। इसी तरह का कांग्रेस को सूरत ग्रामीण की मांडवी विधानसभा सीट पर जीत की उम्मीद थी। लेकिन इस सीट पर भी उसे हार मिली। यह सीट 2012 में अस्तित्व में आई। इसके बाद से ही यहां कांग्रेस का कब्जा रहा। विधानसभा चुनाव 2017 में कांग्रेस के चौधरी आनंद भाई मोहन भाई ने 50 हजार 776 वोट से जीत हासिल की थी। मांडवी में नगर निगम चुनाव 2021 में बीजेपी ने अच्छा प्रदर्शन किया था। सूरत जिला पंचायत की 36 में से केवल दो सीटों पर कांग्रेस का कब्जा है और दोनों मांडवी से हैं।

आप के प्रदेश अध्यक्ष को मिली हार
आप सूरत में वराछा,करंज,कतारगाम,सूरत उत्तर, कामरेज, ओलपाड सीट पर भाजपा को कड़ी टक्कर दे रही थी। सूरत की कतारगाम सीट से आप के प्रदेश अध्यक्ष गोपाल इटालिया सीट मैदान में थे। लेकिन उन्हें भी हार का सामना करना पड़ा। इसके अलावा वराछा रोड़ से आप उम्मीदवार अल्पेश कथीरिया भी चुनाव में हार गए। आप को जीत की सबसे ज्यादा उम्मीदें इन्हीं दो सीटों से थी। कथीरिया के सामने भाजपा के कुमार कानाणी मैदान में थे। प्रचार के दौरान आप उम्मीदवार ने यह तक कह दिया था कि अगर कुमारी कानाणी जीत जाते है वह अपने कंधे पर बैठाकर उसे घुमाएंगे। 

सूरत जिले की मजूरा सीट से विधायक और प्रदेश के गृह राज्य मंत्री हर्ष संघवी ने बड़े अंतर से जीत दर्ज की है। हर्ष कोरोना महामारी में लोगों की मदद करने पर चर्चा में आए। 2014 में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वाराणसी से लोकसभा चुनाव लड़ रहे थे उस वक्त भी संघवी ने अहम भूमिका निभाई थी। कहा जाता है कि यही वह वक्त था, जब संघवी पीएम मोदी और अमित शाह के करीबी बने। हर्ष सांघवी कहते है कि, कई सालों से विपक्ष ने गुजरात की धरती और लोगों को बदनाम करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। आज फिर से जनता ने ये प्रमाण पत्र दे दिया है कि गुजरात की जनता और भाजपा विश्व की सर्वश्रेष्ठ जोड़ी है। इस चुनाव में भी विपक्ष ने मेरी इस धरती को बदनाम करने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी और जनता ने जवाब देने में कोई कसर नहीं छोड़ी। लोगों का जनादेश ये स्पष्ट करता है कि यहां गुजरात और देश को तोड़ने वालों के लिए कोई स्थान नहीं है।

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