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Step-Daughter Rape: सौतेली बेटी से दुष्कर्म के दोषी को 20 साल की कैद, पीड़िता पलटी पर DNA टेस्ट ने दिलाई सजा

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Wed, 30 Nov 2022 02:51 PM IST
सार

आरोपी सौतेले पिता ने 2019 के बाद से दत्तक बेटी के साथ कई बार दुष्कर्म किया। इसी दौरान वह गर्भवती हो गई थी। सुनवाई के दौरान निचली कोर्ट में गवाही के दौरान पीड़िता पलट गई थी, लेकिन कोर्ट ने डीएनए टेस्ट पर भरोसा करते हुए आरोपी को सख्त सजा सुनाई। 

सौतेले पिता को बेटी से दुष्कर्म में 20 साल की जेल
सौतेले पिता को बेटी से दुष्कर्म में 20 साल की जेल - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

मुंबई की एक विशेष कोर्ट ने 16 साल की सौतेली बेटी से दरिंदगी करने वाले पिता को 20 साल के कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने डीएनए टेस्ट रिपोर्ट को सबूत मानते हुए 41 साल के आरोपी को दोषी ठहराया। 


आरोपी सौतेले पिता ने 2019 के बाद से दत्तक बेटी के साथ कई बार दुष्कर्म किया। इसी दौरान वह गर्भवती हो गई थी। सुनवाई के दौरान निचली कोर्ट में गवाही के दौरान पीड़िता पलट गई थी, लेकिन कोर्ट ने डीएनए टेस्ट पर भरोसा करते हुए आरोपी को सख्त सजा सुनाई। 


विशेष न्यायाधीश अनीस खान ने मंगलवार को यह आदेश दिया। उन्होंने अपने आदेश में कहा कि ऐसी अजीबोगरीब परिस्थितियों में, डीएनए जांच आरोप साबित करने का एक प्रभावी तरीका है। अनीस खान, यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (पोक्सो) अधिनियम से संबंधित मामलों की सुनवाई करने वाली विशेष कोर्ट के न्यायाधीश हैं। अदालत ने आदेश में कहा है कि डीएनए रिपोर्ट स्पष्ट रूप से इशारा करती है कि आरोपी सौतेला पिता पीड़िता के भ्रूण का जैविक पिता था। 

सौतेली बेटी के साथ जघन्य अपराध
विशेष कोर्ट ने कहा कि यह दुखद है कि एक सौतेले पिता ने अपनी सौतेली बेटी, जो 18 साल से भी कम उम्र की है, के साथ बहुत ही गंभीर और जघन्य अपराध किया है। मुंबई की विशेष कोर्ट ने साफतौर पर कहा कि पीड़िता और उसकी मां गवाही के दौरान पिता के खिलाफ आरोपों से मुकर गई हैं, इसका मतलब यह नहीं है कि इससे केस खत्म हो जाएगा। 

यह है पूरा मामला
अभियोजन पक्ष के अनुसार नाबालिग बच्ची का सौतेला पिता उसके साथ अक्तूबर 2019 से दुष्कर्म कर रहा था। मामले का खुलासा तब हुआ जब जून 2020 में पीड़िता ने अपनी मां को यह बात बताई। इसके बाद पुलिस में केस दर्ज कराया गया। पीड़िता की चिकित्सा जांच में पता चला कि लड़की 16 सप्ताह से गर्भवती है। इसके बाद उसका गर्भपात कराया गया। केस की गवाही के दौरान पीड़िता और उसकी मां आरोपी के खिलाफ बयान देते वक्त आरोपों से मुकर गए।
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि चूंकि आरोपी परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य है, इसलिए मां व बेटी चाहते थे कि वह जेल से बाहर आ जाए। पीड़िता के बयान से साफ है कि वह मां के भावनात्मक दबाव में है, इसलिए आरोप से मुकर रही है। ऐसे हालात में डीएनए रिपोर्ट अपराध साबित करने का प्रभावी साधन है। कोर्ट ने डीएनए रिपोर्ट को सही मानते हुए उसे स्वीकार करते हुए आरोपी को 20 साल की जेल की सजा सुनाई। 

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