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सीमा विवाद: महाराष्ट्र सरकार ने पवार पर लगाए गंभीर आरोप, कहा- मुख्यमंत्री रहते हुए कुछ नहीं किया

एएनआई, मुंबई Published by: वीरेंद्र शर्मा Updated Thu, 08 Dec 2022 01:04 AM IST
सार

बेलागवी क्षेत्रीय विवाद केंद्र में है क्योंकि महाराष्ट्र दावा करता रहा है कि 1960 के दशक में राज्यों के भाषा-आधारित पुनर्गठन में यह मराठी-बहुल क्षेत्र कन्नड़-बहुल कर्नाटक को गलत तरीके से दिया गया था।

शरद पवार(फाइल)
शरद पवार(फाइल) - फोटो : पीटीआई

विस्तार

कर्नाटक-महाराष्ट्र सीमा विवाद बढ़ता ही जा रहा है। छिड़े राजनीतिक विवाद के बीच राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के प्रमुख शरद पवार पर निशाना साधते हुए महाराष्ट्र सरकार के प्रवक्ता विजय शिवतारे ने बुधवार को कहा कि पवार ने सत्ता में रहते हुए कुछ नहीं किया। 


बता दें कि, राकांपा प्रमुख ने कहा था कि महाराष्ट्र सरकार को 48 घंटे के भीतर कर्नाटक-महाराष्ट्र सीमा विवाद समाधान खोजना चाहिए। शिवतारे ने एएनआई से बात करते हुए कहा कि कि सीमा विवाद पर धमकी देने वाले शरद पवार ने सत्ता में रहते हुए कुछ नहीं किया। शरद पवार चार बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रहे। उन्होंने रक्षा मंत्री और कृषि मंत्री का पद संभाला। इतना शक्तिशाली पद होने के साथ-साथ केंद्र और कर्नाटक में सरकार होने के बावजूद स्थायी समाधान नहीं खोज सके। 


उन्होंने विपक्ष पर कर्नाटक-महाराष्ट्र सीमा पर गंदी राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विपक्ष केवल राजनीति कर रहा है। यह मामला सुप्रीम कोर्ट में सूचीबद्ध है, इसलिए विपक्ष को राजनीति नहीं करनी चाहिए। पवार ने मंगलवार को कहा कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री शिंदे को कोई भी फैसला लेने से पहले सभी पार्टियों को भरोसे में लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि संसद सत्र शुरू होने वाला है। उन्होंने सीमा विवाद पर सभी सांसदों से एक साथ आने और इस पर स्टैंड लेने की अपील की।
 
यह है सीमा विवाद
बेलागवी क्षेत्रीय विवाद केंद्र में है क्योंकि महाराष्ट्र दावा करता रहा है कि 1960 के दशक में राज्यों के भाषा-आधारित पुनर्गठन में यह मराठी-बहुल क्षेत्र कन्नड़-बहुल कर्नाटक को गलत तरीके से दिया गया था। बेलागवी कर्नाटक के उत्तर-पश्चिमी और उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों में फैला हुआ हैं। 1956 के राज्य पुनर्गठन अधिनियम के लागू होने के बाद महाराष्ट्र सरकार ने कर्नाटक के साथ अपनी सीमा के दौबारा समायोजन की मांग की। इसके बाद दोनों राज्यों की ओर से चार सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया।
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