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Pilot vs Gehlot: गहलोत नहीं तो किस पर दांव लगाएगी कांग्रेस? कान बंद रखने वाले इन लोगों से भी नाराज है पार्टी

Ashish Tiwari आशीष तिवारी
Updated Mon, 26 Sep 2022 06:57 PM IST
सार

Pilot vs Gehlot: अशोक गहलोत की कैबिनेट के मंत्रियों और पार्टी के विधायकों की बगावत के बाद कांग्रेस आलाकमान का रुख गहलोत को लेकर सख्त हो गया है। सूत्रों का कहना है कि अशोक गहलोत को फिलहाल राष्ट्रीय अध्यक्ष की रेस से अब बाहर माना जा रहा है...

Pilot vs Gehlot: AICC Observer Ajay Maken, after meeting Congress interim chief Sonia Gandhi
Pilot vs Gehlot: AICC Observer Ajay Maken, after meeting Congress interim chief Sonia Gandhi - फोटो : ANI
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विस्तार

कांग्रेस के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष को लेकर के अब पेंच फंस गया है। राजस्थान में रविवार शाम को हुए हाई वोल्टेज पॉलिटिकल ड्रामा के बाद अब कांग्रेस और भी कई नामों पर विचार कर रही है। जानकारी के मुताबिक इनमें कुछ नाम ऐसे हैं, जो फिलहाल पूरी तरीके से चकाचौंध से न सिर्फ दूर हैं, बल्कि उनकी छवि भी कांग्रेस पार्टी में अच्छी मानी जा रही है। हालांकि दस जनपथ में चल रही बैठक के बाद राजस्थान में हुए हालिया विवाद का न सिर्फ तोड़ निकाला जाएगा, बल्कि 2023 में होने वाले विधानसभा चुनावों का पूरा रोड मैप भी बनाया जाना भी शुरू कर दिया जाएगा।

गहलोत राष्ट्रीय अध्यक्ष की रेस से बाहर!

अशोक गहलोत की कैबिनेट के मंत्रियों और पार्टी के विधायकों की बगावत के बाद कांग्रेस आलाकमान का रुख अशोक गहलोत को लेकर सख्त हो गया है। सूत्रों का कहना है कि अशोक गहलोत को फिलहाल राष्ट्रीय अध्यक्ष की रेस से अब बाहर माना जा रहा है। दरअसल पार्टी आलाकमान रविवार की देर शाम को जयपुर में हुई पूरी घटना क्रम के पीछे अशोक गहलोत को ही मान रही है। सूत्रों का कहना है कि अगर गहलोत चाहते तो राजस्थान में हुई पार्टी के विधायकों की बगावत इतना मुखर नहीं होती। यही वजह है कि पार्टी आलाकमान भी इस बात को मानकर चल रहा है कि राजस्थान में हुए विरोध में कहीं ना कहीं अशोक गहलोत की सहमति जरूर रही होगी। अगर ऐसा नहीं था तो गहलोत को अपने पार्टी के सभी विधायकों और मंत्रियों को यह बात समझानी चाहिए थी कि आलाकमान की ओर से आए पर्यवेक्षकों को अपने नेता का नाम बता कर दिल्ली सहमति के लिए भेजा जाए। न कि इस्तीफे का दौर शुरू कर चुनावी साल में पार्टी की किरकिरी की जाए। सूत्रों का कहना है कि जल्द ही निष्कर्ष निकल जाएगा कि जयपुर में हुई घटना के बाद सोनिया गांधी अगला कदम क्या उठाने जा रही हैं।

जनार्दन द्विवेदी का अद्यक्ष पद के लिए नाम

वहीं कांग्रेस से जुड़े सूत्रों का कहना है कि अगर अशोक गहलोत के नाम को आलाकमान खारिज कर देता है, तो पार्टी में कुछ और भी नाम ऐसे हैं, जिन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए आगे बढ़ाया जा सकता है। हालांकि राजस्थान में हुए विरोध के बाद एक बार फिर से कांग्रेस के नेताओं ने राहुल गांधी को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने की बात पर जोर देना शुरू कर दिया है, जो लगातार राहुल गांधी को राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर पेश कर रहे थे। इसके अलावा पार्टी में एक नया नाम भी चर्चा में आया है, जो ब्राह्मण चेहरे के तौर पर पार्टी में अपनी अलग पहचान रखते हैं। सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस आलाकमान के सामने जनार्दन द्विवेदी के नाम की भी चर्चा अशोक गहलोत के इस पूरे घटनाक्रम के बाद की गई। इसके अलावा पार्टी में चर्चा शशि थरूर के नाम की भी हुई। क्योंकि शशि थरूर पहले से ही पार्टी में राष्ट्रीय अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ने की इच्छा जता चुके हैं, ऐसे में कांग्रेस पार्टी के एक राजनीतिक धड़े ने उनके नाम का भी प्रस्ताव पार्टी आलाकमान के सामने रखा। सूत्रों के मुताबिक अशोक गहलोत की कमजोर हो रही दावेदारी के चलते कुछ नेताओं ने पार्टी के बड़े नेता मल्लिकार्जुन खड़गे का नाम भी सुझाया है। इसके अलावा कांग्रेस के कमलनाथ और दिग्विजय सिंह के नाम की भी दोबारा चर्चाएं शुरू हुई हैं। हालांकि इनमें से किसी भी नाम पर पार्टी आलाकमान की ओर से कोई भी आधिकारिक तौर पर बयान जारी नहीं किया गया है।

कई बड़े नेताओं को नहीं लगी 'बगावत' की भनक

पार्टी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि आलाकमान सिर्फ विधायकों की बगावत पर ही नाराज नहीं है, बल्कि उन जिम्मेदार नेताओं के खिलाफ भी पार्टी को नाराजगी है, जो राजस्थान के इंचार्ज हैं। सूत्रों का कहना है कि राजस्थान में क्या होने वाला है इसकी जानकारी कम से कम नजदीकी लोगों को पहले से ही थी। बावजूद इसके राजस्थान की राजनीति को पार्टी के लिहाज से देखने वाले बड़े नेताओं को इसकी भनक तक नहीं लगी। पार्टी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि इसमें दो तरह की बातें सामने निकल कर आ रही हैं। पहली बात तो यह कि राजस्थान की राजनीति को केंद्रीय नेतृत्व की ओर से देखने वाले नेता को इसकी भनक नहीं लगी, तो इसका मतलब है कि उसका अपना खुद का नेटवर्क कमजोर है। और दूसरी बात निकल कर सामने आ रही है कि अगर इस बात की जानकारी उक्त नेताओं को थी तो पार्टी आलाकमान को इसके बारे में सूचना क्यों नहीं दी गई। कांग्रेस से जुड़े सूत्रों का कहना है कि पार्टी आलाकमान इस बात से भी खासा नाराज बताया जा रहा है।

2023 से पहले बनानी होगी नई रणनीति

फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब राजस्थान की राजनीति को 2023 के लिहाज से 10 जनपथ में नया आयाम दिया जा रहा है। कांग्रेस से जुड़े सूत्रों का कहना है कि क्योंकि इस पूरे घटनाक्रम का असर 2023 में होने वाले राजस्थान के चुनाव पर भी सीधे तौर पर पड़ रहा है, इसलिए अब कांग्रेस अपनी रणनीति को 2023 के लिहाज से ही तैयार कर रही है। कांग्रेस से जुड़े सूत्रों का कहना है जयपुर में पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट के मुताबिक अगर सब कुछ उसी तरह चला तो अशोक गहलोत को राष्ट्रीय अध्यक्ष पद की रेस से तो बाहर तो किया ही जाएगा, साथ ही 2023 में होने वाले विधानसभा चुनाव से भी उनको किनारे किया जा सकता है। ऐसे में कांग्रेस पार्टी 2023 में अपने नए नेता के लिए अभी से मशक्कत करनी शुरू कर देगी। राजनीतिक विश्लेषक जेएस तोमर कहते हैं कि ऐसी दशा में कांग्रेस के लिए राजस्थान में और बड़ी चुनौतियां सामने आएंगी। जो विरोध रविवार शाम को जयपुर में देखा गया, वही 2023 के चुनावों से पहले भी पार्टी को देखना पड़ सकता है। इसके लिए कांग्रेस को राजस्थान में न सिर्फ नई रणनीति बनानी होगी, बल्कि नए नेतृत्व का चयन भी उसी लिहाज से करना होगा।

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