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Child Marriage: बाल विवाह को अवैध मानने के हरियाणा के कानून को राष्ट्रपति ने दी मंजूरी, होंगे ये प्रावधान

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Tue, 27 Sep 2022 04:03 PM IST
सार

गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि बाल विवाह निषेध (हरियाणा संशोधन) विधेयक, 2020 अधिनियमित किया गया था और कानून को अब राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Social Media
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विस्तार

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने हरियाणा के उस कानून को अपनी सहमति दे दी है जिसके तहत हर बाल विवाह को शून्य से प्रारंभ माना जाएगा यानि इसका कोई कानून आधार नहीं होगा। किसी पुरुष और 15 से 18 वर्ष के बीच की लड़की के बीच वैवाहिक संबंध बनाना अवैध माना जाएगा। बाल विवाह निषेध (हरियाणा संशोधन) विधेयक, 2020 सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद लागू किया गया था। शीर्ष अदालत ने फैसला दिया था कि यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (POCSO) अधिनियम, 2012, एक विशेष कानून होने के नाते भारतीय दंड संहिता 1860 और 15 से 18 वर्ष की आयु की नाबालिग पत्नी के साथ यौन संबंध पर लागू होता है। 



सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सभी राज्य विधायिकाओं के लिए यह बुद्धिमानी होगी कि वे बाल विवाह को शून्य बनाने के लिए कर्नाटक द्वारा अपनाए गए मॉडल को अपनाएं और यह सुनिश्चित करें कि एक नाबालिग लड़की और उसके पति के बीच यौन संबंध पोक्सो अधिनियम के तहत एक दंडनीय अपराध है।  


जाली दस्तावेजों के आधार पर किए गए पंजीकरण होंगे रद्द 
गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि बाल विवाह निषेध (हरियाणा संशोधन) विधेयक, 2020 अधिनियमित किया गया था और कानून को अब राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई है। राष्ट्रपति ने जाली दस्तावेजों और प्रतिरूपण के पंजीकरण को रोकने और जाली दस्तावेजों के आधार पर किए गए पंजीकरण को रद्द करने के लिए पंजीकरण अधिनियम 1908 और पंजीकरण (तमिलनाडु संशोधन) विधेयक, 2021 को भी अपनी सहमति दी है। विधेयक के अधिनियमन के बाद रजिस्ट्रार कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछ सकता है कि पंजीकरण रद्द क्यों नहीं किया जाना चाहिए और उत्तर पर विचार करने के बाद पंजीकरण रद्द कर सकता है।  

इसमें एक और प्रावधान है जो रजिस्ट्रार के आदेश से असहमत किसी भी व्यक्ति को इसे रद्द करने के 30 दिनों के भीतर महानिरीक्षक के पास अपील दायर करने की अनुमति देता है। वर्तमान में पंजीकरण अधिनियम, 1908 (1908 का केंद्रीय अधिनियम XVI) के प्रावधान पंजीकरण अधिकारी या किसी अन्य प्राधिकारी को धोखाधड़ी और प्रतिरूपण के आधार पर एक बार पंजीकृत दस्तावेज को रद्द करने का अधिकार नहीं देते हैं, जिससे उन लोगों को गंभीर कठिनाई होती है, जिन्होंने धोखा दिया गया है।

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