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Jammu and Kashmir: शांति बहाली के खिलाफ फैलाया जा रहा प्रोपेगेंडा, नकारात्मकता से निपटना सबसे बड़ी चुनौती

Shashidhar Pathak शशिधर पाठक
Updated Tue, 29 Nov 2022 08:59 AM IST
सार

लाल चौक, हजरत बल, डाऊनटाऊन, त्राल, सोपोर, सोपियां, बडगाम, बारामूला, अनंतनाग में तमाम स्थानों पर न केवल तिरंगा झंडा फहराया जाता है, बल्कि राष्ट्रगान भी गाए जाते हैं। लेकिन देश में नकारात्मकता फैलाने वाला समूह काफी सक्रिय है।

श्रीनगर का लाल चौक
श्रीनगर का लाल चौक - फोटो : बासित जरगर

विस्तार

जम्मू कश्मीर के मुख्य सचिव अरुण मेहता का कहना है कि निजी और सार्वजनिक क्षेत्र को मिलाकर अगले पांच साल में 56 हजार करोड़ से अधिक का निवेश आएगा। 2.5 लाख से अधिक रोजगार के अवसर बनेंगे। जम्मू कश्मीर के उप राज्यपाल मनोज सिन्हा मानते हैं कि इन कोशिशों से भयमुक्त जम्मू-कश्मीर का निर्माण होगा। 



अरुण मेहता कहते हैं कि जो हम कर रहे हैं, वह जमीन पर अब दिखने लगा है। लेकिन कुछ लोगों को हमारे प्रयास और जम्मू-कश्मीर में लौट रही शांति भी फर्जी दिखाई दे रही है। कुछ लोग एक घटना होने के बाद 1990 के दशक के लौटने की दुहाई देने लगते हैं। हमारे लिए इस तरह की नकारात्मकता से निपटना भी बड़ी परेशानी का सबब है।


अरुण मेहता की तरह ही राज्य के एडीजीपी विजय कुमार भी कहते हैं कि कश्मीर के अलगाववादी नेता हाशिए पर जा चुके हैं। प्रमुख आतंकी संगठनों में हिजबुल मुजाहिद्दीन को छोड़कर घाटी में किसी का भी शीर्ष कमांडर नहीं है। लश्कर-ए-तय्यबा के नए छद्म संगठन और जैश-ए-मोहम्मद को खोजने पर भी स्थानीय कमांडर नहीं मिल रहा है। कश्मीर के तीन जिले पूरी तरह स्थानीय आतंकियों से मुक्त हैं।

यहां तक कि लाल चौक, हजरत बल, डाऊनटाऊन, त्राल, सोपोर, सोपियां, बडगाम, बारामूला, अनंतनाग में तमाम स्थानों पर न केवल तिरंगा झंडा फहराया जाता है, बल्कि राष्ट्रगान भी गाए जाते हैं। लेकिन देश में नकारात्मकता फैलाने वाला समूह काफी सक्रिय है। इससे निपटना हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती है। विजय कुमार कहते हैं कि इस नकारात्मकता से उन ताकतों को काफी बढ़ावा और शह मिलती है, जो युवाओं को आतंकवाद की तरफ मोड़ने में लगे हैं। अरुण मेहता जोर देकर कहते हैं कि तमाम समूह वर्तमान व्यवस्था को लेकर गलत धारणा फैलाने में सक्रिय है। यह कोशिश रुकने का नाम नहीं ले रही है।

नाको चने चबवा रही हैं तीन चुनौतियां
मुख्य सचिव कहते हैं जम्मू-कश्मीर को लेकर तीन बड़ी चुनौतियां मुश्किलें खड़ी कर रही हैं। पहली चुनौती यही है कि जो परियोजनाएं चल रही हैं, यह समय से लागू हो पाएं। इनके प्रभावी तरीके से लागू होने में तेजी बनी रहे। दूसरी बड़ी चुनौती नकारात्मक मानसिकता, दुष्प्रचार और प्रोपैगैंड़ा से निबटने की है। मेहता कहते हैं कश्मीर में बड़े ही चुनौतीपूर्ण तरीके से काम और बदलाव हो रहा है। एडीजीपी विजय कुमार कहते हैं कि पाकिस्तान से कश्मीर मीडिया सर्विसेज (केएमएस) का संचालन होता है। यह कश्मीर को लेकर प्रोपेगेंडा फैलाने, लोगों को भड़काने में लगा रहता है। टेलीग्राम के माध्यम से पत्रकारों, पुलिस, सुरक्षा बलों समेत अन्य को धमकी व गलत जानकारी भेजी जाती है। कुछ राज्य और राज्य के बाहर की शक्तियां भी हैं जो लौट रही शांति को स्वीकार करने से ज्यादा मनोबल पर असर डालने वाली नकारात्मकता फैलाती हैं। तीसरी बड़ी चुनौती राज्य में बढ़ रही ड्रग्स की खेप, युवाओं को इसके गिरफ्त में लेने की कोशिश और अस्थिरता फैलाने वाले प्रयासों की है।

लोग नकारात्मकता न फैलाएं तो समस्या का चुटकियों में हल
मेहता के कहने का सार है कि अपनी कश्ती वहीं डूबती है, जहां पानी कम होता है। इसी को दूसरे शब्दों में बयां करते हुए एडीजीपी भी कहते हैं कि सावधानी हटी तो दुर्घटना घटी। एक प्रचलित मुहावरा और दूसरी प्रचलित नसीहत में जम्मू-कश्मीर के प्रशासक कहते हैं कि जबतक भय है, तबतक आतंकवाद है। इसलिए उप राज्यपाल मनोज सिन्हा जम्मू-कश्मीर में भयमुक्त हालात के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं। जम्मू-कश्मीर में सरकार हर मुमकिन कोशिश कर रही है। मुख्य सचिव मानते हैं कि पाकिस्तान की शह से राज्य को ड्रग्स की चपेट में लेने की कोशिश हो रही है। पंचायतों से मेरे पास 2000 लोगों के ड्रग्स की चपेट में आने का फीडबैक है। उन्होंने कहा कि इस चुनौती को देखते हुए हर महीने जिला स्तर पर एक मीटिंग की जा रही है। ड्रग्स मुक्ति केन्द्र बनाए जा रहे हैं। हमने युवाओं को बहकने से बचाने के लिए 25 लाख को खेल से जोड़ने का लक्ष्य रखा था, लेकिन नवंबर 2022 तक यह संख्या 47 लाख (पंजीकृत) के पार जा चुकी है। इस अभियान में ग्राम पंचायतों, स्कूलों, शिक्षकों, आंगनवाड़ी, सामाजिक लोगों को शामिल कर रखा है। फुटबाल, हाकी, बैडमिंटन, बास्केटबाल समेत तमाम खेलों को बढ़ावा, संसाधन की उपलब्धता और खेलों का आयोजन हो रहा है।
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रोजगार के मुद्दे पर अरुण मेहता का कहना है कि इससे निपटना एक चुनौती है। सरकार इसके लिए प्रयास कर रही है। वह कहते हैं कि दुनिया के देशों में रोजगार सरकार नहीं देती। यह निजी क्षेत्र में बढ़ा है। इसलिए जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने स्वयं सहायता समूह, स्वयं के काम के लिए अनुदान, ऋण, सहायता आदि दे रही है। हमारा मकसद लोगों को आत्मनिर्भर बनाना है। सभी को सरकारी नौकरी दे पाना सरकार के बस की बात नहीं। वह कहते हैं कि हमें पांच साल दीजिए। डेढ़ साल में हमारे प्रयास काफी चमक के साथ दिखाई देने लगेंगे। एक उद्योग लगने में तीन साल का समय लगता है। हमारे पास 56 हजार करोड़ से अधिक के निवेश के प्रस्ताव हैं। हमें भरोसा है कि अगले तीन साल में सरकार निजी क्षेत्र को मिलाकर 2.5 लाख से अधिक रोजगार के अवसर उपलब्ध कराएगी। लक्ष्य यही है। लूलू समूह, फार्मा, पैकेजिंग, लॉजिस्टिक,कोल्ड स्टोरेज समेत तमाम क्षेत्रों में निवेशक बड़े पैमाने पर रुचि दिखा रहे हैं। उरी-1, उरी-2 पॉवर परियोजना भी काफी कुछ बदलेगी।

पारदर्शी प्रक्रिया से कुछ लोगों को परेशानी हो रही है
मुख्य सचिव मेहता का कहना है कि राज्य प्रशासन बेहद पारदर्शी तरीके से चल रहा है। पहले किसी परियोजना में टेंडर निकालने की प्रक्रिया नहीं थी। लोग मनचाहे तरीके से काम आवंटिंत कर देते हैं। अब बिना ई-टेंडरिंग के काम का आवंटन नहीं हो रहा है। यह कुछ लोगों को हजम नहीं हो रहा है। वह गतिरोध का कारण भी बन रहे हैं। लेकिन हमें जहां भी संदेह होता है, वहां सीबीआई जांच करती है। लोगों को कानून के कठघरे में लाया जाता है। मेहता ने कहा कि वेज इम्पलायमेंट कोई नहीं मांग रहा है। वह कहते हैं कि यह मानने में किसी को गुरेज नहीं होना चाहिए कि आतंकवाद कम हुआ है। लेकिन हम नहीं कहते कि यह खत्म हो गया। यह तो जनता बताएगी कि आतंकवाद खत्म हुआ।

सबकी नजर जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव पर
कश्मीर के जिलों और क्षेत्रों में दौरा करने पर सबसे हॉट मुद्दा राज्य विधानसभा चुनाव का है। लोगबाग चाहते हैं कि यह जल्दी हो। ताकि कश्मीरियत, जम्हूरियत को मजबूती मिले और आवाम कश्मीर के बारे में निर्णय कर सके। राज्य के लोग शांति और शांति प्रयासों को इसी नजरिए से देख रहे हैं। दूसरा सबसे बड़ा मुद्दा राज्य को पूर्ण राज्य का दर्जा देने के केन्द्र सरकार के निर्णय पर टिका है। कश्मीर के प्रशासक भी मानते हैं कि यह मुद्दा काफी महत्वपूर्ण है।

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