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Jolt to NIA: 'केस की कहानी आकर्षक हो सकती है, पर ठोस सबूत भी चाहिए', जाकिर नाइक का कर्मचारी बरी

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Sat, 01 Oct 2022 01:56 PM IST
सार

जाकिर नाइक के फाउंडेशन के दोषमुक्त किए गए इस कर्मचारी को देश के युवाओं को कथित तौर पर आतंकी संगठन ISIS में शामिल होने के लिए प्रेरित करने के आरोप में 2016 में गिरफ्तार किया गया था। 

NIA (सांकेतिक तस्वीर)
NIA (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : PTI (File Photo)
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विस्तार

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को मुंबई की विशेष एनआईए अदालत से झटका लगा है। इस्लामी प्रचारक जाकिर नाइक की संस्था इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन (IRF) के एक कर्मचारी को बरी करते हुए कोर्ट ने एनआईए से कहा कि अभियोजन पक्ष की कहानी आकर्षक हो सकती है, लेकिन ठोस सबूत भी होना चाहिए। 



जाकिर नाइक के फाउंडेशन के दोषमुक्त किए गए इस कर्मचारी को देश के युवाओं को कथित तौर पर आतंकी संगठन ISIS में शामिल होने के लिए प्रेरित करने के आरोप में 2016 में गिरफ्तार किया गया था। विशेष एनआईए अदालत के जत ए एम पाटिल ने शुक्रवार को आरोपी अर्शी कुरेशी को बरी कर दिया। कुरेशी अब प्रतिबंधित किए जा चुके जाकिर नाइक के संगठन आईआरएफ का कर्मचारी था। कोर्ट ने अर्शी को सबूतों के अभाव में सारे आरोपों से बरी किए जाने का विस्तृत आदेश शनिवार को मुहैया कराया।  


आईएसआईएस के सदस्य के पिता की शिकायत पर गिरफ्तार किया था
कुरेशी को 2016 में इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया (ISIS) के एक कथित सदस्य अशफाक मजीद के पिता की शिकायत के बाद गिरफ्तार किया गया था। कुरेशी तब लापता हो गया था और उसने अपनी बहन को बताया था कि वह उक्त आतंकी संगठन में शामिल हो गया है। एनआईए ने कुरेशी के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियों (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) की विभिन्न धाराओं के तहत गैरकानूनी गतिविधियों में उसकी लिप्तता, भारत के खिलाफ नफरत फैलाने और प्रतिबंधित आतंकी संगठन आईएसआईएस को अपनी गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए समर्थन प्रदान करने का आरोप लगाया था।
विशेष लोक अभियोजक सुनील गोंसावेल्स ने कहा कि यह मामला केरल के समान विचारधारा वाले युवाओं के एक समूह और आईआरएफ के कुछ सदस्यों द्वारा अशफाक माजिद और उसके सहयोगियों को जिहादी विचारधारा में शामिल करने से संबंधित है। आईआरएफ ने अशफाक और उसके सहयोगियों को आईएआईएस में शामिल होने के लिए प्रेरित किया और कट्टरपंथी बनाया। 

एनआईए की FIR डिजाइन की गई
एनआईए की ओर से कहा गया कि अशफाक आईएसआईएस के लोगों के संपर्क में था और उनसे संवाद करने के लिए डार्क नेट ब्राउजर का इस्तेमाल करता था। हालांकि, कुरेशी के वकीलों, टी डब्ल्यू पठान और आई ए खान ने दावा किया कि एनआईए की FIR एक सोची समझी और देर से बनाई गई थी क्योंकि इस मामले की जांच पहले से ही केरल के दो पुलिस थानों में की जा रही थी। वकीलों ने कहा कि एनआईए ने मामले को डिजाइन किया ताकि कुरेशी को फंसाया जा सके, जो कि आईआरएफ ट्रस्ट का कर्मचारी था। उसके खिलाफ कोई प्रत्यक्ष और परिस्थितिजन्य सबूत नहीं हैं। 

अभियोजन पक्ष मामले को साबित करने में विफल
यह मामला मुंबई के नागपाड़ा पुलिस थाने में दर्ज प्राथमिकी पर आधारित है। विशेष एनआईए कोर्ट ने कहा कि मामले का अध्ययन करने पर पता चला कि अभियोजन पक्ष को साक्ष्यों के आधार पर इसे साबित करना था। केस मात्र प्रस्तुत करने से सबूत नहीं बन जाते हैं। अभियोजन पक्ष के तर्क और कहानी आकर्षक हो सकती है, लेकिन इसे ठोस सबूत से साबित किया जाना चाहिए। साक्ष्य के अभाव में यह नहीं कहा जा सकता है कि अभियोजन पक्ष मामले को साबित करने में सफल रहा।

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