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Rajasthan: कहीं खनन के खिलाफ लड़ाई तो कहीं जमीन विवाद, राजस्थान में कैसे मौत के मुंह में जा रहे पुजारी?

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Fri, 19 Aug 2022 07:30 PM IST
सार

राजस्थान में कैसे एक के बाद एक पुजारियों के मौत की घटनाएं सामने आ रही हैं? इन मामलों के पीछे वजह क्या है? इसे लेकर सरकार का रुख रहा है? आइये जानते हैं…

राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत और प्रदर्शन करते पुजारी।
राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत और प्रदर्शन करते पुजारी। - फोटो : Social Media
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विस्तार

राजस्थान में पुजारियों की मौत के मामले एक बार फिर चर्चा में है। 17 अगस्त को हनुमानगढ़ के भकरावली में एक पुजारी की हत्या का मामला सामने आया। बताया जाता है कि यहां 75 वर्षीय साधु चेतन दास की मारपीट के बाद हत्या कर दी गई। कुछ गांववालों को उनका शव तब मिला, जब वे पुजारी को खाना देने मंदिर जा रहे थे। एक और पुजारी की मौत का मामला जयपुर से भी सामने आया है। यहां मंदिर परिसर खाली करने के दबाव में पुजारी ने खुद को आग के हवाले कर दिया। हालांकि, राजस्थान में पुजारियों की मौतों से जुड़ी यह पहली कुछ घटनाएं नहीं हैं।   


राजस्थान में कैसे एक के बाद एक पुजारियों के मौत की घटनाएं सामने आ रही हैं? इन मामलों के पीछे वजह क्या है? इसे लेकर सरकार का रुख रहा है? आइये जानते हैं…

1. चौरासी कोस परिक्रमा में अवैध खनन के खिलाफ 550 दिन से जारी प्रदर्शन
राजस्थान में अवैध खनन का मुद्दा लगातार उठता रहा है। भरतपुर में ब्रज चौरासी कोस सर्किट में हो रहे अवैध खनन को लेकर दर्जनों पुजारियों ने आंदोलन कर रखा है। यहां 550 दिनों से साधुओं का विरोध प्रदर्शन जारी है। इनकी शिकायत है कि राज्य सरकार उनकी मांगों को नहीं सुन रही है।  

2. भरतपुर में अवैध खनन के विरोध में साधु ने खुद को लगाई आग
भरतपुर के दीग में 20 जुलाई को अवैध खनन के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे एक साधु ने खुद को आग लगा ली थी। उन्हें दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया। 80 फीसदी तक जलने की वजह से 23 जुलाई को उनकी मौत हो गई। इस घटना से ठीक पहले एक और साधु बाबा हरिबोलदास ने भी खुद को आग लगाने की धमकी दी थी। 

हालांकि, अधिकारियों ने उन्हें किसी तरह प्रदर्शन करने से रोक दिया। अवैध खनन के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे साधुओं के प्रतिनिधियों ने कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा तक से मुलाकात की थी। हालांकि, उनकी मांग पर कोई सुनवाई नहीं हुई। दीग में ही साधु नारायण दास ने सरकार तक अपनी बात पहुंचाने के लिए 19 जुलाई को वे मोबाइल टावर पर चढ़ गए थे।  

3. जमीन विवाद में साधु ने की आत्महत्या
जालौर में चार अगस्त को एक 60 साल के पुजारी रविनाथ ने आत्महत्या कर ली थी। जिस आश्रम में रविनाथ पुजारी थे, वहां उनके साथियों ने भाजपा विधायक राम चौधरी को रविनाथ की मौत के लिए जिम्मेदार ठहराया था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रविनाथ ने अपने सुसाइड नोट में लिखा था कि उसका जमीन विवाद था। 

पुलिस ने इस मामले में कहा था कि भाजपा विधायक आश्रम के पीछे की जमीन के मालिक थे। उनका और रविनाथ का विवाद तब शुरू हुआ, जब विधायक ने आश्रम की जमीन पर सड़क निर्माण का फैसला किया। पुजारी की मौत से तीन दिन पहले ही विधायक ने अपने कुछ लोगों को भेजकर आश्रम की जमीन की नाप भी करवाई थी। हालांकि, विधायक चौधरी ने इन आरोपों से इनकार किया है। उन्होंने मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की है। इस मामले की जांच सीबी-सीआईडी को सौंपी गई है। 

4. जमीन विवाद में जिंदा जलाए गए मंदिर पुजारी
अक्तूबर 2020 में भी मंदिर के एक पुजारी की हत्या का मामला सामने आया था। करौली में छह लोगों ने जमीन विवाद को लेकर मंदिर के पुजारी को जिंदा जला दिया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुजारी पर पहले पेट्रोल डाला गया और फिर उन्हें आग के हवाले कर दिया गया। पीड़ित बाबूलाल वैष्णव (55) को जयपुर स्थित अस्पताल ले जाया गया। हालांकि, गंभीर तरह से जलने के बाद उनकी मौत हो गई। 

पुलिस ने इस मामले में सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। इन सबके बीच एक थ्योरी यह भी थी कि पुजारी ने खुद को आग लगाई। हालांकि, मरने से पहले पुजारी ने जो बयान दिया, उसी को आधार मानते हुए आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इस घटना के बाद पूरे राजस्थान में जबरदस्त प्रदर्शन हुए थे। ब्राह्मण समुदाय के पुजारियों ने अस्पताल का घेराव कर सरकार के विरोध में नारेबाजी भी की थी। 

5. मंदिर परिसर छोड़ने का बना दबाव, पुजारी ने खुद को जलाया
पुजारी की मौत का एक और मामला शुक्रवार को भी सामने आया। जयपुर में एक पुजारी ने खुद को आग के हवाले कर लिया। करीब 90 फीसदी तक जलने के बाद शुक्रवार को उसकी मौत हो गई। बताया गया है कि मंदिर में रह रहे पुजारी पर परिसर छोड़ने का दबाव बनाया जा रहा था। मंदिर की कथित समिति पुजारी को 10 हजार की तनख्वाह पर रखना चाहती थी और पूजन के लिए दान पेटी में आने वाले पैसों पर भी हक जताना चाहती थी। पुजारी की पांच बेटियां और दो बेटे हैं और उनका जीवन यापन भी मंदिर को मिले दान से ही चलता था। लेकिन जब उस पर मंदिर खाली करने का दबाव बनाया गया, तो उसने खुद को आग लगा ली।
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