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Maran-SpiceJet: स्पाइसजेट और कलानिधि मारन के बीच विवाद को लेकर मध्यस्थता पर विचार करेगा सुप्रीम कोर्ट

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Tue, 16 Aug 2022 10:05 PM IST
सार

रोहतगी ने शीर्ष अदालत में कहा कि दोनों पक्ष व्यापक समाधान के लिए प्रयास कर रहे हैं जिसमें तीन मुद्दे शामिल हैं। रोहतगी ने पार्टियों के बीच सभी मुद्दों को सुलझाने के लिए चार से छह सप्ताह का समय मांगा।

सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि वह विमानन कंपनी स्पाइसजेट और मीडिया दिग्गज कलानिधि मारन और उनकी काल एयरवेज के बीच विवाद के निपटारे के लिए मध्यस्थता के संयुक्त अनुरोध पर विचार करेगा। शेयर हस्तांतरण मुद्दे पर विवाद सहित उनके बीच सभी लंबित विवादों को सौहार्दपूर्ण ढंग से निपटाने के लिए यह मध्यस्थता की जा सकती है।  स्पाइसजेट की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने मुख्य न्यायाधीश एन वी रमण और न्यायमूर्ति जे के माहेश्वरी व न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ को बताया कि विमानन कंपनी और मारन के बीच तीन मामले लंबित और एक का निपटारा 29 जुलाई को हो गया है।



रोहतगी ने शीर्ष अदालत में कहा कि दोनों पक्ष व्यापक समाधान के लिए प्रयास कर रहे हैं जिसमें तीन मुद्दे शामिल हैं। रोहतगी ने पार्टियों के बीच सभी मुद्दों को सुलझाने के लिए चार से छह सप्ताह का समय मांगा। मारन और उनके काल एयरवेज का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने हैदराबाद मध्यस्थता केंद्र में पक्षों के बीच मध्यस्थता का सुझाव दिया, जिसे रोहतगी के माध्यम से स्पाइसजेट द्वारा भी समर्थन दिया गया था। काल एयरवेज और मारन को शीर्ष अदालत के समक्ष करंजावाला एंड कंपनी लॉ फर्म द्वारा सहायता प्रदान की गई थी।


शीर्ष अदालत हाई कोर्ट के 2 नवंबर, 2020 के आदेश के खिलाफ स्पाइसजेट की अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें कम लागत वाली एयरलाइन को अपने पूर्व प्रमोटर और कलानिधि मारन के साथ शेयर हस्तांतरण विवाद के संबंध में ब्याज के रूप में लगभग 243 करोड़ रुपये जमा करने के लिए कहा गया था। 7 नवंबर, 2020 को शीर्ष अदालत ने स्पाइसजेट को शेयर हस्तांतरण विवाद के संबंध में ब्याज के रूप में लगभग 243 करोड़ रुपये जमा करने के लिए उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगा दी थी। स्पाइसजेट और उसके प्रमोटर अजय सिंह को 579 करोड़ रुपये पर देय ब्याज के रूप में लगभग 243 करोड़ रुपये जमा करने के लिए कहा गया था, जिसे उच्च न्यायालय ने 2017 में स्पाइसजेट को शेयर हस्तांतरण विवाद में 2018 मध्यस्थता राशि के तहत जमा करने के लिए कहा था।  

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