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राजीव गांधी हत्याकांड: नलिनी, पी रविचंद्रन ने दी रिहाई की याचिका, SC ने केंद्र और तमिलनाडु सरकार को भेजा नोटिस

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: संजीव कुमार झा Updated Mon, 26 Sep 2022 01:32 PM IST
सार

राजीव गांधी की 21 मई 1991 की रात को तमिलनाडु के श्रीपेरंबुदूर में एक महिला आत्मघाती हमलावर द्वारा हत्या कर दी गई थी। इस हमलावर की पहचान धनु के रूप में हुई थी।  

सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे दोषियों नलिनी श्रीहरन और पी रविचंद्रन की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और तमिलनाडु सरकार को नोटिस जारी किया है। दोनों दोषियों ने  याचिका में मांग की है कि इस मामले में दोषी एजी पेरारीवलन की तरह उन्हें भी राहत दी जाए।



मई में मद्रास हाई कोर्ट ने रिहाई की याचिका ठुकरा दी थी
मद्रास हाई कोर्ट ने मई में नलिनी और  रविचंद्रन याचिका को ठुकराते हुए कहा था कि उसके पास संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत विशेष शक्तियां नहीं हैं और इसलिए वह उनकी रिहाई का आदेश नहीं दे सकता, जैसा कि सुप्रीम कोर्ट ने मई 2022 में पेरारिवलन के लिए किया था। इससे पहले एक अन्य सह-दोषी पी रविचंद्रन ने भी राहत के लिए शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था। 30 साल से जेल में बंद रविचंद्रन ने औपचारिक रिहाई के अपने मामले के निष्कर्ष तक पहुंचने तक अंतरिम जमानत मांगी। हाई कोर्ट ने कहा था कि अगर उनकी याचिका पेरारीवलन की रिहाई पर आधारित है तो वे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं।


मई 2018 में पेरारिवलन को सुप्रीम कोर्ट ने रिहा करने का आदेश दिया था
मई 2018 में तमिलनाडु सरकार द्वारा की गई सिफारिश के आधार पर जेल से समय से पहले रिहाई के लिए पेरारिवलन की याचिका पर फैसला करते हुए शीर्ष अदालत ने अनुच्छेद 142 का  इस्तेमाल करते हुए उसकी रिहाई का आदेश दे दिया था। अदालत ने जेल में अच्छे बर्ताव के कारण उसे रिहा करने का आदेश दिया था।

21 मई 1991 की रात हुई थी राजीव गांधी की हत्या
राजीव गांधी की 21 मई 1991 की रात को तमिलनाडु के श्रीपेरंबुदूर में एक महिला आत्मघाती हमलावर द्वारा हत्या कर दी गई थी। इस हमलावर की पहचान धनु के रूप में हुई थी।  

1999 में मिली मौत की सजा, फिर 2014 में बदली उम्रकैद में
मई 1999 के अपने आदेश में, शीर्ष अदालत ने चार दोषियों पेरारिवलन, मुरुगन, संथान और नलिनी की मौत की सजा को बरकरार रखा था। हालांकि, 2014 में, इसने दया याचिकाओं पर फैसला करने में देरी के आधार पर संथान और मुरुगन के साथ पेरारीवलन की मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया। नलिनी की मौत की सजा को 2001 में इस आधार पर आजीवन कारावास में बदल दिया गया था कि उसकी एक बेटी है।

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